गो ईस्ट पहल: ओडिशा को पूर्वी भारत का औद्योगिक केंद्र बनाने की नई रणनीति

गो ईस्ट पहल: ओडिशा को पूर्वी भारत का औद्योगिक केंद्र बनाने की नई रणनीति

ओडिशा सरकार ने राज्य में औद्योगिक निवेश और संतुलित क्षेत्रीय विकास को गति देने के उद्देश्य से “गो ईस्ट” (Go East) पहल की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 27 जून 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित सीआईआई ईस्टर्न रीजन काउंसिल की बैठक में इस महत्वाकांक्षी पहल की घोषणा की। इसका उद्देश्य ओडिशा के साथ-साथ पूरे पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में निवेश को आकर्षित करना तथा उद्योगों के लिए तेज, पारदर्शी और सुगम व्यवस्था विकसित करना है।

गो ईस्ट पहल क्या है?

Go East का पूरा नाम Government of Odisha – Eastern Investment Accelerator and Special Task Force है। इस पहल के तहत निवेश परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए एक उच्चस्तरीय स्पेशल टास्क फोर्स बनाई जाएगी। साथ ही, आईपीआईकोल (IPICOL) में एक समर्पित “गो ईस्ट सेल” स्थापित किया जाएगा, जो निवेशकों को परियोजना के विभिन्न चरणों में सहायता प्रदान करेगा। निवेश प्रस्तावों और स्वीकृतियों की वास्तविक समय में निगरानी के लिए “गो स्विफ्ट” (Go Swift) नामक डिजिटल मॉड्यूल भी विकसित किया जाएगा। इससे औद्योगिक परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज बनने की उम्मीद है।

औद्योगिक नीति 2022 में महत्वपूर्ण संशोधन

राज्य सरकार ने औद्योगिक नीति संकल्प-2022 (Industrial Policy Resolution-2022) में संशोधन का प्रस्ताव भी रखा है। इसके तहत आर्थिक रूप से पिछड़े या कम विकसित 15 जिलों को गैर-खनिज आधारित उद्योगों के लिए थ्रस्ट सेक्टर श्रेणी में शामिल किया जाएगा। इन प्राथमिकता प्राप्त जिलों में बलांगीर, कालाहांडी, नुआपाड़ा, कंधमाल, बौध और गजपति सहित अन्य जिले शामिल हैं। थ्रस्ट सेक्टर का दर्जा मिलने से इन क्षेत्रों में उद्योगों को अतिरिक्त प्रोत्साहन, तेज मंजूरी और बेहतर सरकारी सहायता उपलब्ध होगी, जिससे संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।

निवेश और रोजगार के आंकड़े

ओडिशा सरकार के अनुसार जून 2024 से अब तक 477 औद्योगिक परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनका कुल निवेश लगभग 9.5 लाख करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं से लगभग 6 लाख रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इनमें से 152 परियोजनाएं, जिनमें 3.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश शामिल है, जमीन पर उतर चुकी हैं और उद्घाटन या संचालन के चरण में पहुंच गई हैं। यह दर्शाता है कि राज्य केवल निवेश आकर्षित ही नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें तेजी से लागू भी कर रहा है।

ओडिशा के उभरते औद्योगिक क्षेत्र

ओडिशा लंबे समय से लौह अयस्क, बॉक्साइट और अन्य खनिज संसाधनों पर आधारित उद्योगों के लिए प्रसिद्ध रहा है। अब राज्य सरकार भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस्पात, एल्युमिनियम, रसायन, पेट्रोकेमिकल, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों को भी बढ़ावा दे रही है। विशेष रूप से पारादीप को एक प्रमुख औद्योगिक और बंदरगाह आधारित हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • आईपीआईकोल (IPICOL) का पूरा नाम इंडस्ट्रियल प्रमोशन एंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन ऑफ ओडिशा है।
  • औद्योगिक नीति संकल्प-2022 (IPR-2022) ओडिशा की आधिकारिक औद्योगिक नीति का ढांचा है।
  • पारादीप ओडिशा का प्रमुख बंदरगाह एवं औद्योगिक केंद्र है।
  • सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण (हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्रों में शामिल किए जाते हैं।

ओडिशा की गो ईस्ट पहल राज्य को पूर्वी भारत के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। नई निवेश सुविधा व्यवस्था, पिछड़े जिलों के लिए विशेष प्रोत्साहन और भविष्य उन्मुख उद्योगों पर जोर से राज्य में औद्योगिकीकरण, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की संभावना है।

Originally written on June 29, 2026 and last modified on June 29, 2026.

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