गोवा के किसानों के लिए कार्बन क्रेडिट की नई राह
गोवा में किसानों को कार्बन क्रेडिट, जैव-चार और स्वैच्छिक कार्बन बाजार की समझ देने के लिए ICAR-CCARI ने एक विशेष कार्यशाला आयोजित की। ICAR–सेंट्रल कोस्टल एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गोवा ने 21 अगस्त 2026 को ICAR-KVK, ओल्ड गोवा में “Carbon Pathshala: Voluntary Carbon Market (VCM) for Farmers” शीर्षक से एक दिवसीय कार्यक्रम किया। यह पहल पश्चिमी तटीय क्षेत्र में वृक्षारोपण आधारित प्रणालियों, जैव-चार उत्पादन और कार्बन क्रेडिट निर्माण पर चल रहे शोध प्रोजेक्ट से जुड़ी है।
किसानों के लिए क्यों अहम है यह पहल
कार्यशाला का उद्देश्य किसानों को यह समझाना था कि खेत और बागान से निकलने वाले अवशेषों को केवल कचरा मानने के बजाय उन्हें आय और पर्यावरण संरक्षण से कैसे जोड़ा जा सकता है। स्वैच्छिक कार्बन बाजार में ऐसे प्रोजेक्ट्स से बने कार्बन क्रेडिट खरीदे-बेचे जाते हैं, जो अनिवार्य उत्सर्जन-नियंत्रण व्यवस्था से बाहर होते हैं। एक कार्बन क्रेडिट सामान्यतः एक मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य की कमी, अवशोषण या बचाव को दर्शाता है।
जैव-चार और कार्बन अवशोषण पर तकनीकी चर्चा
ICAR-CCARI के निदेशक डॉ. परवीन कुमार ने कहा कि कार्बन क्रेडिट में भागीदारी किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकती है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ए. आर. उथप्पा ने कुलागर प्रणालियों में किए जा रहे पायलट कार्य और खेत तथा बागान अवशेषों को जैव-चार में बदलने की प्रक्रिया पर जानकारी दी। ICAR-CIAE, भोपाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संदीप मंडल ने पोर्टेबल यूनिट के माध्यम से जैव-चार उत्पादन का प्रदर्शन किया।
जैव-चार कार्बन-समृद्ध पदार्थ है, जिसे सीमित ऑक्सीजन में जैविक पदार्थ को गर्म करके तैयार किया जाता है। इसका उपयोग मिट्टी प्रबंधन, कार्बन भंडारण और टिकाऊ कृषि परियोजनाओं में किया जाता है। इसी वजह से यह तकनीक किसानों, शोध संस्थानों और कार्बन बाजार के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बन रही है।
कार्बन प्रोजेक्ट चक्र और खेतों में उपयोग
Core CarbonX Solutions Pvt. Ltd., हैदराबाद के श्री संदीप कंडा ने कार्बन प्रोजेक्ट चक्र और कृषि कार्बन बाजार में प्रवेश की प्रक्रिया समझाई। कार्यशाला में यह भी बताया गया कि कैसे वृक्षारोपण अवशेष, मिट्टी की सेहत में सुधार और कार्बन क्रेडिट निर्माण को एक ही परियोजना ढांचे में जोड़ा जा सकता है।
इस कार्यक्रम से जुड़ा शोध प्रोजेक्ट “Potential of Plantation-Based Systems in Generating Carbon Credit through Biochar Production in the West Coast Region of India” है। यह प्रोजेक्ट कृषि वानिकी, अवशेष प्रबंधन और कार्बन लेखांकन को तटीय कृषि प्रणालियों से जोड़ता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ICAR-CCARI का पूरा नाम ICAR–Central Coastal Agricultural Research Institute है।
- स्वैच्छिक कार्बन बाजार अनिवार्य उत्सर्जन व्यापार प्रणालियों से बाहर काम करता है।
- एक कार्बन क्रेडिट आम तौर पर 1 मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य के बराबर माना जाता है।
- जैव-चार का निर्माण कम ऑक्सीजन में जैविक पदार्थ को गर्म करने की प्रक्रिया, यानी पायरोलिसिस, से होता है।
कार्यशाला में करीब 100 किसान शामिल हुए, जिनमें केरी, प्रियोल, मडगांव, कुम्भरजुआ और कर्माली क्षेत्र के किसान थे। कार्यक्रम को विशेष रूप से महिला किसानों और छोटे किसानों को पायलट परियोजनाओं से जोड़ने के लिए तैयार किया गया था।