HAL-सफरान समझौते से भारत के हेलीकॉप्टर इंजन विकास को नई गति
भारत के हेलीकॉप्टर निर्माण कार्यक्रम को बड़ा सहारा देते हुए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और फ्रांस की सफरान हेलीकॉप्टर इंजन ने 13 टन श्रेणी के हेलीकॉप्टरों के लिए नए उच्च-शक्ति टर्बोशाफ्ट इंजन के विकास और उत्पादन का अंतिम अनुबंध किया है। यह समझौता बेंगलुरु में 26 अगस्त 2026 को SAFHAL Helicopter Engines Pvt. Ltd. के माध्यम से हुआ, जो दोनों कंपनियों का संयुक्त उपक्रम है।
अर्वल्ली इंजन कार्यक्रम क्या है
इस नए इंजन का नाम अर्वल्ली रखा गया है, जो भारत की पर्वत श्रृंखला से प्रेरित है। इसे 3,500 से 4,000 शाफ्ट हॉर्सपावर की शक्ति श्रेणी के लिए तैयार किया जा रहा है, यानी यह हेलीकॉप्टर प्रणोदन के उच्च-शक्ति वर्ग में आएगा। अनुबंध के दायरे में इंजन का डिजाइन, विकास, निर्माण, आपूर्ति और पूरे जीवनचक्र के लिए सहायता शामिल है।
टर्बोशाफ्ट इंजन हेलीकॉप्टरों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि वे ट्रांसमिशन सिस्टम के जरिए रोटरी पावर उपलब्ध कराते हैं। इसी वजह से ऐसे इंजन भारी-भरकम और बहुउद्देशीय हेलीकॉप्टरों के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।
किन हेलीकॉप्टरों में होगा उपयोग
अर्वल्ली इंजन को HAL के प्रस्तावित इंडियन मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर (IMRH) और उसके नौसैनिक संस्करण डेक-बेस्ड मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर (DBMRH) के लिए चुना गया है। IMRH 13 टन श्रेणी का कार्यक्रम है, जबकि DBMRH को भारतीय नौसेना के जहाजों और विमानवाहकों से संचालन के लिए तैयार किया जा रहा है।
यह कार्यक्रम भारतीय सशस्त्र बलों के पुराने रूसी मूल के Mi-17 मध्यम-उठान हेलीकॉप्टरों के स्थान पर एक स्वदेशी विकल्प विकसित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इससे भविष्य में सैन्य जरूरतों के साथ-साथ घरेलू एयरोस्पेस क्षमता भी मजबूत होने की उम्मीद है।
औद्योगिक साझेदारी और भविष्य की संभावनाएं
समझौते पर HAL के इंजीनियरिंग, अनुसंधान एवं विकास निदेशक अजय कुमार श्रीवास्तव और SAFHAL के निदेशक तथा सफरान के कार्यकारी उपाध्यक्ष ओलिवियर सविन ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर HAL के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक आर. माधवन और सफरान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सेद्रिक गोबे भी मौजूद थे।
HAL ने संकेत दिया है कि यह इंजन कार्यक्रम केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। इसका उपयोग भविष्य में ऑफशोर परिवहन, उपयोगिता मिशनों और वीवीआईपी परिवहन जैसे नागरिक उड्डयन कार्यों में भी हो सकता है। साथ ही, इस इंजन परिवार के लिए देश में मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (MRO) क्षमता विकसित करने की योजना भी है, जो दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- टर्बोशाफ्ट इंजन मुख्य रूप से हेलीकॉप्टरों में उपयोग होते हैं और ट्रांसमिशन के जरिए शक्ति देते हैं।
- SAFHAL Helicopter Engines Pvt. Ltd. HAL और सफरान हेलीकॉप्टर इंजन का संयुक्त उपक्रम है।
- DBMRH का उपयोग जहाजों और विमानवाहकों से संचालन के लिए किया जाता है।
- MRO का अर्थ Maintenance, Repair and Overhaul है, जो विमानन में दीर्घकालिक रखरखाव के लिए इस्तेमाल होने वाला मानक शब्द है।
अर्वल्ली इंजन समझौता भारत की हेलीकॉप्टर तकनीक, रक्षा उत्पादन और एयरोस्पेस साझेदारी को एक साथ आगे बढ़ाने वाला कदम है। इससे आने वाले वर्षों में भारी श्रेणी के स्वदेशी हेलीकॉप्टरों के लिए मजबूत इंजन आधार तैयार होने की संभावना बढ़ गई है।