अरुणाचल में हिमालयी सूरजमुखी परिवार की नई प्रजाति मिली

अरुणाचल में हिमालयी सूरजमुखी परिवार की नई प्रजाति मिली

अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में वैज्ञानिकों ने सूरजमुखी कुल की एक नई पौध प्रजाति की पहचान की है। हिमाचल प्रदेश स्थित सीएसआईआर-हिमालयन बायोरिसोर्स टेक्नोलॉजी संस्थान (IHBT) के शोधकर्ताओं ने इस प्रजाति को Doronicum sanctum नाम दिया है। यह खोज हिमालयी जैव विविधता के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण जोड़ मानी जा रही है, क्योंकि इससे पूर्व इस वंश की भारतीय उपस्थिति पश्चिमी हिमालय तक ही सीमित मानी जाती थी।

तवांग की ऊंची पहाड़ियों से मिली नई प्रजाति

यह पौधा तवांग जिले में लगभग 4,000 से 4,086 मीटर की ऊंचाई पर दर्ज किया गया। इसका टाइप लोकैलिटी चुमी ग्यात्से होली वॉटरफॉल्स के पास बताई गई है, जो पूर्वी हिमालय में स्थानीय धार्मिक परंपराओं से जुड़ा स्थल है। ऐसे ऊंचाई वाले क्षेत्र अक्सर दुर्लभ और विशिष्ट वनस्पतियों के लिए जाने जाते हैं, इसलिए यहां नई प्रजातियों की खोज वैज्ञानिक दृष्टि से खास महत्व रखती है।

यह अध्ययन 11 अगस्त 2026 को एक Springer Nature जर्नल में प्रकाशित हुआ। शोधकर्ताओं ने इसे हिमालयी जैव-विविधता हॉटस्पॉट्स के वनस्पति सर्वेक्षण के दौरान पहचाना।

कैसे पहचानी गई Doronicum sanctum

इस पौधे की पहचान इसके कुछ विशिष्ट लक्षणों के आधार पर की गई। इसमें पीले फूल, दिल के आकार की पत्तियां, pubescent ray cypselae और caducous pappus जैसे गुण पाए गए। वनस्पति विज्ञान में cypsela एस्टेरेसी कुल का विशिष्ट सूखा फल होता है, जबकि pappus संशोधित बाह्यदल संरचना है, जो कई पौधों में बीजों के प्रसार में मदद करती है।

Doronicum वंश को सामान्यतः Leopard’s Bane कहा जाता है और यह Asteraceae यानी सूरजमुखी कुल का हिस्सा है। यह कुल फूलदार पौधों के सबसे बड़े परिवारों में गिना जाता है और इसके कई सदस्य समशीतोष्ण तथा अल्पाइन क्षेत्रों में पाए जाते हैं।

हिमालयी वनस्पति अनुसंधान के लिए क्यों अहम है यह खोज

इस नई प्रजाति की खोज केवल एक पौधे की पहचान भर नहीं है, बल्कि यह पूर्वी हिमालय की वनस्पति विविधता और उसके संरक्षण की जरूरतों को भी सामने लाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार Doronicum sanctum भारतीय संदर्भ में इस वंश का पहला दर्ज सदस्य है, जबकि पहले उपलब्ध भारतीय रिकॉर्ड पश्चिमी हिमालय तक सीमित थे।

प्रजाति नाम में sanctum का अर्थ लैटिन में “पवित्र” होता है, जो इसके खोज-स्थल की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से भी मेल खाता है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि हिमालय के ऊंचे और दुर्गम क्षेत्रों में अभी भी कई ऐसी वनस्पतियां मौजूद हो सकती हैं, जिनका वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण बाकी है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • Doronicum sanctum सूरजमुखी कुल Asteraceae से संबंधित है, जो फूलदार पौधों के सबसे बड़े कुलों में से एक है।
  • यह भारतीय उपमहाद्वीप में Doronicum वंश का पहला दर्ज सदस्य है।
  • इस प्रजाति को अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में लगभग 4,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर पाया गया।
  • Cypsela और pappus जैसे शब्द एस्टेरेसी कुल के पौधों की पहचान में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

हिमालयी क्षेत्रों में नई प्रजातियों की खोज यह दिखाती है कि भारत की जैव-विविधता अभी भी कई वैज्ञानिक रहस्यों को समेटे हुए है। ऐसे अध्ययन संरक्षण नीति, वनस्पति वर्गीकरण और पारिस्थितिकी अनुसंधान के लिए आधार तैयार करते हैं।

Originally written on August 26, 2026 and last modified on August 26, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *