गेहूं और आटे के निर्यात पर लगी रोक हटी, व्यापार को नई राहत

गेहूं और आटे के निर्यात पर लगी रोक हटी, व्यापार को नई राहत

भारत ने गेहूं, ड्यूरम गेहूं और उनसे बने कुछ प्रमुख आटा उत्पादों के निर्यात नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए इन्हें “Prohibited” से “Free” श्रेणी में डाल दिया है। 24 अगस्त 2026 से लागू इस फैसले के बाद मैदा, सूजी/रवा, गेहूं का आटा और रेज़ल्टेंट आटा जैसे उत्पादों के निर्यात पर लगी रोक समाप्त हो गई है।

क्यों अहम है यह फैसला

यह कदम ऐसे समय आया है जब देश में खाद्यान्न उत्पादन मजबूत रहा है और सरकार घरेलू उपलब्धता, सार्वजनिक वितरण व्यवस्था तथा कीमतों के संतुलन को ध्यान में रखकर नीतियां बनाती रही है। 2022 में वैश्विक खाद्य संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद गेहूं पर निर्यात प्रतिबंध लगाए गए थे। अब नीति में ढील से मिलिंग उद्योग, निर्यात व्यापार और विदेशी बाजारों में भारतीय गेहूं उत्पादों की पहुंच को राहत मिलने की उम्मीद है।

“Prohibited” का अर्थ है कि निर्यात की अनुमति नहीं होती, जबकि “Free” श्रेणी में निर्यात सामान्य व्यापारिक प्रक्रियाओं और अन्य लागू नियमों के तहत किया जा सकता है। इस बदलाव का सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ेगा जो गेहूं आधारित प्रसंस्कृत उत्पादों का निर्यात करती हैं।

किस पर लागू हुआ नया आदेश

यह निर्णय केवल गेहूं तक सीमित नहीं है, बल्कि ड्यूरम गेहूं और उससे जुड़े कुछ प्रसंस्कृत उत्पादों पर भी लागू है। मैदा, सूजी, गेहूं का आटा और रेज़ल्टेंट आटा इस दायरे में आते हैं। ड्यूरम गेहूं एक कठोर किस्म है, जिसका उपयोग पास्ता और कुछ विशेष आटा मिश्रणों में किया जाता है।

भारत में गेहूं उत्तर और मध्य भारत के लिए प्रमुख खाद्य अनाजों में से एक है। ऐसे में निर्यात नीति में किसी भी बदलाव का असर केवल व्यापार पर नहीं, बल्कि घरेलू आपूर्ति और मूल्य प्रबंधन पर भी देखा जाता है। सरकार ने इससे पहले फरवरी 2026 में सीमित मात्रा में गेहूं और गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी, लेकिन अब इन उत्पादों पर लगी व्यापक रोक हट गई है।

उत्पादन और व्यापार पर संभावित असर

यह नीति बदलाव रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन के संदर्भ में आया है। 2025-26 फसल वर्ष में भारत का खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन बताया गया है। बेहतर उत्पादन के कारण निर्यात के लिए अतिरिक्त गुंजाइश बनी है, जिससे मिलों की क्षमता उपयोगिता बढ़ सकती है और दक्षिण एशिया तथा पश्चिम एशिया के बाजारों में भारतीय गेहूं उत्पादों की मांग को समर्थन मिल सकता है।

गेहूं आधारित उत्पादों का निर्यात भारत के कृषि-व्यापार ढांचे में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। खासकर प्रसंस्कृत आटा उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय मांग बनी रहती है, और नीति में ढील से निर्यातकों को अधिक लचीलापन मिलेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत में निर्यात और आयात नीति से जुड़ी अधिसूचनाएं Directorate General of Foreign Trade (DGFT) जारी करता है।
  • Maida refined wheat flour है, semolina को सूजी या रवा कहा जाता है, और atta पूरे गेहूं से बना आटा होता है।
  • गेहूं पर निर्यात प्रतिबंध मई 2022 में पहली बार लगाए गए थे।
  • 2025-26 में भारत का खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन दर्ज किया गया।

कुल मिलाकर, यह फैसला घरेलू आपूर्ति की मजबूती और निर्यात अवसरों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे गेहूं प्रसंस्करण उद्योग और विदेशी व्यापार दोनों को नई गति मिलने की संभावना है।

Originally written on August 24, 2026 and last modified on August 24, 2026.

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