गुजरात में एशियाई शेरों की संख्या 891 पहुंची, संरक्षण प्रयासों को मिली बड़ी सफलता
गुजरात में एशियाई शेरों की आबादी बढ़कर 891 हो गई है। 16वीं एशियाई शेर जनसंख्या गणना में यह संख्या दर्ज की गई, जो 2015 में 523 थी। पिछले एक दशक में यह बढ़ोतरी संरक्षण, निगरानी और आवास प्रबंधन के प्रयासों का संकेत देती है।
गिर और ग्रेटर गिर में बढ़ता दायरा
एशियाई शेर Panthera leo persica प्रजाति का उप-प्रजातीय शेर है और इसकी जंगली प्राकृतिक आबादी केवल भारत में, मुख्य रूप से गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में पाई जाती है। इसका प्रमुख आवास गिर राष्ट्रीय उद्यान और गिर वन्यजीव अभयारण्य है, लेकिन अब इसका फैलाव केवल कोर क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। 2020 में इसका क्षेत्र लगभग 30,000 वर्ग किलोमीटर था, जो 2025 तक बढ़कर करीब 35,000 वर्ग किलोमीटर हो गया। यह विस्तार बताता है कि शेर अब गिर और ग्रेटर गिर परिदृश्य के बड़े हिस्से में मौजूद हैं।
गणना कैसे हुई और क्या सामने आया
16वीं जनसंख्या गणना 10 से 13 मई 2025 के बीच गुजरात के 11 जिलों में की गई। इसमें direct beat verification method का उपयोग किया गया और 3,800 से अधिक वनकर्मी तथा स्थानीय स्वयंसेवक शामिल रहे। प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार 891 शेरों में 330 वयस्क मादा शेर शामिल थीं, जबकि 497 शेर कोर संरक्षित क्षेत्रों के बाहर पाए गए। यह तथ्य दर्शाता है कि शेरों की मौजूदगी अब संरक्षित सीमा से आगे भी फैल रही है, जिससे मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व और निगरानी की जरूरत और बढ़ जाती है।
संरक्षण रणनीति और आगे की चुनौती
एशियाई शेरों के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए Project Lion 15 अगस्त 2020 को शुरू किया गया था। इस परियोजना में रोग निगरानी, पशु-चिकित्सा सहायता, आवास सुधार और परिदृश्य-स्तरीय प्रबंधन जैसे उपाय शामिल हैं। शेरों की संख्या में वृद्धि उत्साहजनक है, लेकिन सीमित भौगोलिक क्षेत्र में केंद्रित आबादी होने के कारण बीमारी, आवास दबाव और मानवीय गतिविधियों से जुड़ी चुनौतियां बनी रहती हैं। इसलिए संरक्षण का फोकस केवल संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि आबादी की स्थिरता और विविधता बनाए रखने पर भी है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एशियाई शेर दुनिया में केवल भारत में जंगली अवस्था में पाए जाते हैं।
- इनका मुख्य आवास गुजरात का गिर राष्ट्रीय उद्यान और गिर वन्यजीव अभयारण्य है।
- विश्व शेर दिवस हर साल 10 अगस्त को मनाया जाता है।
- 2025 की गणना में गुजरात में 891 एशियाई शेर दर्ज किए गए।
2015 से 2025 के बीच 523 से 891 तक पहुंची यह वृद्धि भारत की वन्यजीव संरक्षण नीति के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। एशियाई शेरों की यह सफलता गिर परिदृश्य के सतत प्रबंधन और निगरानी की अहमियत को और मजबूत करती है।