खिजड़िया अभयारण्य बना ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क का अहम प्रजनन केंद्र

खिजड़िया अभयारण्य बना ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क का अहम प्रजनन केंद्र

गुजरात के जामनगर स्थित खिजड़िया पक्षी अभयारण्य को ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क के एक प्रमुख प्रजनन स्थल के रूप में पहचाना गया है। यह निष्कर्ष पश्चिम भारत के आर्द्रभूमि तंत्र और पक्षी संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह अभयारण्य पहले से ही रामसर स्थल के रूप में अंतरराष्ट्रीय महत्व रखता है।

खिजड़िया की आर्द्रभूमियाँ और पक्षी विविधता

खिजड़िया पक्षी अभयारण्य जामनगर जिले में स्थित है और यहाँ मीठे तथा खारे पानी की आर्द्रभूमियाँ दोनों मिलती हैं। अभयारण्य के आठ प्रबंधन क्षेत्र हैं, जो इसे विभिन्न प्रकार के आवास उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। यही कारण है कि यहाँ निवासी और प्रवासी, दोनों तरह की पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

आर्द्रभूमियों का यह मिश्रित स्वरूप पक्षियों के लिए भोजन, विश्राम और प्रजनन के अनुकूल वातावरण बनाता है। विशेष रूप से उथले जल वाले क्षेत्र कई जलपक्षियों के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।

ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क के लिए क्यों खास है यह स्थल

ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क, जिसका वैज्ञानिक नाम Ephippiorhynchus asiaticus है, एक बड़ा जलपक्षी है और यह Ciconiidae परिवार से संबंधित है। यह दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में पाया जाता है। यह पक्षी भोजन और घोंसला बनाने के लिए दलदली इलाकों, आर्द्रभूमियों और उथले जल स्रोतों पर निर्भर रहता है।

गुजरात इकोलॉजिकल एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के शोधकर्ताओं ने जुलाई 2024 से मार्च 2025 के बीच 48 जियो-रेफरेंस्ड सैंपलिंग पॉइंट्स पर फील्ड सर्वे किया। निगरानी अवधि में यहाँ ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क की अधिकतम मौसमी संख्या 21 से 23 के बीच दर्ज की गई। इनमें प्रजनन करने वाले जोड़े, गैर-प्रजनन पक्षी और किशोर पक्षी शामिल थे।

प्रजनन व्यवहार और अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष

अक्टूबर से दिसंबर के प्रजनन चरण में चार सक्रिय घोंसले दर्ज किए गए और सभी में सफल प्रजनन हुआ। प्रत्येक जोड़े ने दो-दो चूजे तैयार किए, जिससे कुल आठ किशोर पक्षी सामने आए। यह परिणाम बताता है कि खिजड़िया का आवास इस प्रजाति के लिए केवल अस्थायी ठिकाना नहीं, बल्कि सफल प्रजनन क्षेत्र भी है।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि सभी निगरानी किए गए घोंसले Neltuma juliflora नामक आक्रामक वृक्ष पर बने थे, जिसे गुजरात में गंदो बावर कहा जाता है। घोंसले 3 से 4.5 मीटर की ऊँचाई पर बनाए गए थे। सफल घोंसले मुख्यतः 0.3 से 0.7 मीटर जल-गहराई वाली उथली, अर्ध-स्थायी आर्द्रभूमियों में पाए गए, जहाँ इस पक्षी के लिए उपयुक्त जलीय शिकार उपलब्ध था।

निगरानी के दौरान यह भी दर्ज किया गया कि घोंसले की देखभाल में नर और मादा दोनों की भागीदारी रही। 94 प्रतिशत मामलों में एक साथी के भोजन खोजने जाने पर दूसरा घोंसले की जिम्मेदारी संभालता दिखा। औसतन प्रत्येक दौरे में घोंसले पर 62 मिनट की उपस्थिति दर्ज की गई।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • खिजड़िया पक्षी अभयारण्य गुजरात का एक रामसर स्थल है।
  • ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क Ciconiidae परिवार का बड़ा जलपक्षी है।
  • Neltuma juliflora को गुजरात में गंदो बावर कहा जाता है और यह एक आक्रामक प्रजाति है।
  • अध्ययन में 0.3 से 0.7 मीटर गहराई वाली उथली आर्द्रभूमियाँ प्रजनन के लिए सबसे अनुकूल पाई गईं।

यह अध्ययन 27 जुलाई 2026 को Journal of Threatened Taxa में प्रकाशित हुआ। खिजड़िया का यह नया महत्व बताता है कि आर्द्रभूमियों का संरक्षण केवल पक्षियों की संख्या बचाने तक सीमित नहीं, बल्कि उनके सफल प्रजनन और दीर्घकालिक अस्तित्व से भी जुड़ा है।

Originally written on August 25, 2026 and last modified on August 25, 2026.

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