समुद्र की सतह का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर, जलवायु संकट के नए संकेत

समुद्र की सतह का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर, जलवायु संकट के नए संकेत

दुनिया के गैर-ध्रुवीय महासागरों की औसत दैनिक समुद्री सतह का तापमान 21 और 22 अगस्त 2026 को 21.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह अब तक दर्ज किया गया सबसे ऊंचा दैनिक वैश्विक समुद्री सतह तापमान है। यह रिकॉर्ड ऐसे समय में बना है जब महासागरों के गर्म होने के असर समुद्री पारिस्थितिकी, मत्स्य संसाधनों और जलवायु प्रणाली पर लगातार गहराते जा रहे हैं।

समुद्री सतह तापमान क्या बताता है

समुद्री सतह तापमान यानी Sea Surface Temperature समुद्र की सबसे ऊपरी परत का तापमान होता है। इसे उपग्रहों, बुआयों और जहाजों से जुटाए गए अवलोकनों के आधार पर मापा जाता है। यह संकेतक इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि समुद्र की ऊपरी परत में होने वाले बदलाव सीधे मौसम, समुद्री जीवन और कार्बन अवशोषण को प्रभावित करते हैं।

यह रिकॉर्ड 60 डिग्री दक्षिण से 60 डिग्री उत्तर अक्षांश के बीच के महासागरीय क्षेत्र के लिए दर्ज हुआ है, जिसे एक्स्ट्रा-पोलर ओशन्स कहा जाता है। इसमें ध्रुवीय समुद्र शामिल नहीं होते, लेकिन दुनिया के अधिकांश प्रमुख समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र इसी दायरे में आते हैं।

अगस्त में रिकॉर्ड बनना क्यों असामान्य है

आमतौर पर वैश्विक समुद्री सतह तापमान मार्च या अप्रैल में अपने चरम पर पहुंचता है। ऐसे में अगस्त में नया रिकॉर्ड बनना मौसमी पैटर्न के लिहाज से असामान्य माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि महासागरों में गर्मी का स्तर सामान्य चक्र से अलग दिशा में बढ़ रहा है।

इससे पहले इस क्षेत्र का दैनिक वैश्विक रिकॉर्ड 1 मार्च 2024 को 21.09 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। नया आंकड़ा भले ही उससे थोड़ा अधिक हो, लेकिन जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में इसका महत्व बहुत बड़ा है।

गर्म होते महासागर किस तरह असर डालते हैं

महासागरों के गर्म होने के पीछे दो बड़े कारण बताए जा रहे हैं। पहला, 2026 में विकसित हो रहा एक मजबूत एल नीनो घटनाक्रम, जो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से के गर्म होने से जुड़ा होता है। दूसरा, मानव-जनित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, जिसने पिछले कई दशकों में समुद्रों के औसत तापमान का आधार स्तर ही ऊपर उठा दिया है।

गर्म समुद्री जल प्रवाल भित्तियों को नुकसान पहुंचा सकता है, मछलियों और अन्य समुद्री जीवों के वितरण को बदल सकता है और पानी में ऑक्सीजन की मात्रा घटा सकता है। इसके अलावा, गर्म महासागर अधिक कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैं, जिससे समुद्री जल की अम्लता बढ़ती है और शेल बनाने वाले जीवों तथा मत्स्य उद्योग पर असर पड़ता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • Copernicus Climate Change Service यूरोपीय संघ का जलवायु निगरानी कार्यक्रम है।
  • El Niño एल नीनो- साउदर्न ऑस्सिलेशन (ENSO) जलवायु पैटर्न का एक चरण है।
  • Marine heatwaves लंबे समय तक रहने वाली असामान्य समुद्री गर्मी की घटनाएं होती हैं।
  • Coral bleaching में प्रवाल थर्मल तनाव के कारण अपने सहजीवी शैवाल खो देते हैं।

समुद्री तापमान में यह रिकॉर्ड वृद्धि केवल एक वैज्ञानिक आंकड़ा नहीं, बल्कि जलवायु प्रणाली में हो रहे तेज बदलाव का संकेत है। इसका असर समुद्री जैव विविधता से लेकर खाद्य सुरक्षा, मौसम और मानव स्वास्थ्य तक फैल सकता है।

Originally written on August 25, 2026 and last modified on August 25, 2026.

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