खनिज कानून में बड़ा बदलाव, संसद से एमएमडीआर संशोधन विधेयक पारित

खनिज कानून में बड़ा बदलाव, संसद से एमएमडीआर संशोधन विधेयक पारित

खनिज क्षेत्र के नियमन और कराधान से जुड़े देश के प्रमुख कानून में बड़ा बदलाव हुआ है। माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) संशोधन विधेयक, 2026 को 13 अगस्त 2026 को संसद के दोनों सदनों की मंजूरी मिल गई। यह विधेयक 1957 के उस मूल कानून में संशोधन करता है, जो भारत में खनिजों के विकास, नियंत्रण और खनन अधिकारों की व्यवस्था तय करता है।

संसद में विधेयक कैसे आगे बढ़ा

इस विधेयक को 10 अगस्त 2026 को केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने लोकसभा में पेश किया था। लोकसभा ने इसे 12 अगस्त को पारित किया और इसके बाद 13 अगस्त को राज्यसभा ने भी मंजूरी दे दी। अब यह विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद कानून का रूप लेगा। संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत संसद से पारित विधेयक पर राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक होती है।

खनिज अधिकार और राज्यों की कर-सीमा

संशोधन विधेयक का सबसे अहम पहलू खनिज-समृद्ध भूमि पर नियमन को लेकर केंद्र की भूमिका को मजबूत करना है। इसके तहत राज्यों को खनिज अधिकारों पर स्वतंत्र रूप से कर, उपकर या अन्य लेवी लगाने की छूट सीमित कर दी गई है, जब तक कि केंद्रीय दिशानिर्देशों के तहत इसकी अनुमति न हो।

विधेयक में यह भी प्रावधान है कि संशोधन से पहले राज्यों द्वारा लगाए गए ऐसे खनिज कर, जो वसूले नहीं जा सके या जमा नहीं किए गए, उन्हें अमान्य माना जाएगा। हालांकि, पहले से वसूले जा चुके करों की वापसी का प्रावधान नहीं रखा गया है।

खनन उद्योग और लीज व्यवस्था पर असर

विधेयक का दूसरा बड़ा असर खनन उद्योग की संचालन व्यवस्था पर पड़ेगा। इसके तहत लीजधारकों को अपनी मौजूदा खनन लीज में कई खनिज जोड़ने की अनुमति दी गई है, जिनमें लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट, सोना और चांदी जैसे महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं। इसके लिए अतिरिक्त भुगतान की आवश्यकता नहीं होगी।

इसके साथ ही कैप्टिव माइन्स से खनिजों की बिक्री पर लगी सीमा भी हटाई गई है। कैप्टिव माइन्स वे खदानें होती हैं, जो किसी उद्योग या संयंत्र की अपनी जरूरतों के लिए आरक्षित रहती हैं। इस बदलाव से खनिज उपयोग और आपूर्ति व्यवस्था में अधिक लचीलापन आने की संभावना है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957 भारत में खनिज विकास से जुड़ा प्रमुख कानून है।
  • संविधान का अनुच्छेद 111 संसद से पारित विधेयकों पर राष्ट्रपति की स्वीकृति से संबंधित है।
  • कैप्टिव माइन्स वे खदानें होती हैं, जिनका खनिज उत्पादन मुख्य रूप से मालिक के अपने उद्योग के उपयोग के लिए होता है।
  • खनिज अधिकारों और खनिज-समृद्ध भूमि के नियमन का मुद्दा केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के संवैधानिक बंटवारे से जुड़ा है।

इस संशोधन को खनिज नीति, संघीय ढांचे और राज्य-राजस्व के नजरिये से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह बदलाव देश के खनिज प्रशासन की दिशा तय करेगा।

Originally written on August 13, 2026 and last modified on August 13, 2026.

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