कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए नई योजना को मंजूरी

कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए नई योजना को मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 18 जून 2026 को सतही कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की नई योजना को मंजूरी प्रदान की है। यह योजना भारत में कोयला गैसीकरण और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं के विकास को गति देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इससे पहले जनवरी 2024 में सरकार ने 8,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को स्वीकृति दी थी। नई योजना देश में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयात पर निर्भरता कम करने और कोयले से मूल्यवर्धित उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

सतही कोयला गैसीकरण क्या है?

सतही कोयला गैसीकरण एक औद्योगिक प्रक्रिया है, जिसमें कोयले को नियंत्रित परिस्थितियों में ऑक्सीजन, भाप या वायु के साथ प्रतिक्रिया कराकर संश्लेषण गैस (सिंगैस) में परिवर्तित किया जाता है। यह सिंगैस कई महत्वपूर्ण औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में कच्चे माल के रूप में उपयोग होती है। सिंगैस से मेथनॉल, हाइड्रोजन, सिंथेटिक प्राकृतिक गैस, अमोनिया, यूरिया तथा सतत विमानन ईंधन जैसे उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। यही कारण है कि कोयला गैसीकरण को ऊर्जा और रासायनिक उद्योगों के लिए एक रणनीतिक तकनीक माना जाता है।

सरकारी समर्थन और परियोजनाओं की प्रगति

जनवरी 2024 में स्वीकृत प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत वर्तमान में 8 परियोजनाएं कार्यान्वयन चरण में हैं, जिनके लिए 6,233 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि निर्धारित की गई है। देश में 65,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की कोयला गैसीकरण परियोजनाएं पहले से ही प्रगति पर हैं। सरकार का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक लगभग 25 कोयला गैसीकरण परियोजनाएं विकसित हो सकती हैं, जिनमें कुल निवेश 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये के बीच रहने की संभावना है। इससे ऊर्जा, उर्वरक और रासायनिक क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

रोड शो और राज्यों की भागीदारी

कोयला मंत्रालय ने 18 जून 2026 को मुंबई में इस योजना के संबंध में तीसरा रोड शो आयोजित किया। इससे पहले ऐसे रोड शो नई दिल्ली और हैदराबाद में आयोजित किए जा चुके हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य निवेशकों और उद्योग जगत को योजना के लाभों से अवगत कराना तथा नई परियोजनाओं को प्रोत्साहित करना है। महाराष्ट्र इस क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ राज्य माना जा रहा है। यहां पांच परियोजनाएं विकासाधीन हैं, जिन्हें वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड और राज्य सरकार की नीतिगत सहायता प्राप्त हो रही है।

ऊर्जा सुरक्षा और आयात में कमी

भारत में कोयला गैसीकरण को ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। देश वर्तमान में एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसे उत्पादों के आयात पर बड़ी राशि खर्च करता है। वित्त वर्ष 2025 में इन उत्पादों के आयात का मूल्य लगभग 2.77 लाख करोड़ रुपये रहा। कोयला और लिग्नाइट से इन उत्पादों का घरेलू उत्पादन बढ़ने पर आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही कोयले के संसाधनों का अधिक प्रभावी और मूल्यवर्धित उपयोग संभव हो सकेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत के पास 400 अरब टन से अधिक कोयला भंडार उपलब्ध है।
  • भारत ने वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है।
  • कोयला गैसीकरण से मेथनॉल, अमोनिया, यूरिया, हाइड्रोजन और सिंथेटिक प्राकृतिक गैस का उत्पादन किया जा सकता है।
  • वित्त वर्ष 2025 में एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल के आयात का कुल मूल्य लगभग 2.77 लाख करोड़ रुपये था।

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत यह नई योजना भारत के ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण के माध्यम से देश न केवल अपने विशाल कोयला संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकेगा, बल्कि उर्वरक, ईंधन और रसायनों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ाएगा। इससे ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है।

Originally written on June 20, 2026 and last modified on June 20, 2026.

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