केरल की नई रणनीति से सर्पदंश नियंत्रण को मिली दिशा

केरल की नई रणनीति से सर्पदंश नियंत्रण को मिली दिशा

केरल ने सर्पदंश से होने वाली मौतों और विकलांगता को रोकने के लिए एक व्यापक राज्य कार्ययोजना पेश की है। 20 जुलाई 2026 को जारी State Action Plan for Prevention and Control of Snakebite Envenoming (SAPSE) का लक्ष्य 2030 तक सर्पदंश से शून्य मृत्यु और शून्य विकलांगता हासिल करना है। यह योजना विश्व स्वास्थ्य संगठन और राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप तैयार की गई है।सर्पदंश को अब केवल एक सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। सांप के काटने के बाद शरीर में विष प्रवेश कर जाए तो यह मेडिकल इमरजेंसी बन जाती है। इसी वजह से केरल ने इसे निगरानी और रिपोर्टिंग के दायरे में लाने के लिए बड़ा कदम उठाया है।

सर्पदंश को नोटिफाएबल रोग घोषित करने का असर

केरल ने 13 अक्टूबर 2025 को Kerala Public Health Act, 2023 के तहत सर्पदंश विषाक्तता को नोटिफाएबल रोग घोषित किया था। इसका मतलब है कि अब ऐसे मामलों की व्यवस्थित रिपोर्टिंग और निगरानी स्वास्थ्य तंत्र की जिम्मेदारी होगी। इससे राज्य को यह समझने में मदद मिलेगी कि किन इलाकों में जोखिम ज्यादा है, इलाज की उपलब्धता कैसी है और किन स्तरों पर सुधार की जरूरत है।नई कार्ययोजना में निगरानी, उपचार और अस्पतालों की तैयारी पर विशेष जोर दिया गया है। सर्पदंश के मामलों और मौतों की ट्रैकिंग के लिए Integrated Health Information Platform, Health Management Information System और SARPA app का उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही अस्पतालों की मैपिंग कर “रेड फ्लैग” हॉटस्पॉट चिन्हित किए जाएंगे, जहां अतिरिक्त संसाधन और सहायता दी जाएगी।

वन हेल्थ मॉडल और विभागों का समन्वय

SAPSE को One Health दृष्टिकोण पर तैयार किया गया है, जिसमें मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को एक साथ जोड़कर देखा जाता है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सर्पदंश का जोखिम केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि जंगल, खेत, बस्तियों और मौसमीय परिस्थितियों से भी जुड़ा होता है।इस योजना में स्वास्थ्य, वन, पशुपालन, कृषि, शिक्षा, स्थानीय स्वशासन और वन्यजीव से जुड़े विभागों की भूमिका तय की गई है। अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में 13 फरवरी 2025 को हुई बहु-विषयक बैठक ने इस योजना के निर्माण में योगदान दिया।

इलाज, जागरूकता और विशेष प्रोटोकॉल

राज्य ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, रेफरल अस्पतालों को बेहतर बनाने और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त anti-snake venom सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में भी कदम तय किए हैं। केरल में फिलहाल 151 सरकारी और 150 निजी अस्पतालों में एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध है।2025 में राज्य के 133 अस्पतालों में 8,456 वायल वितरित किए गए, जबकि 6,382 वायल मरीजों को दिए गए। इसी वर्ष सर्पदंश से 18 मौतें दर्ज हुईं, जो 2018-19 के 123 मामलों की तुलना में काफी कम हैं।योजना में Hump-nosed Pit Viper और Malabar Pit Viper के लिए अलग उपचार प्रोटोकॉल भी शामिल हैं। जागरूकता के लिए शिक्षकों को सर्पा स्वयंसेवकों के साथ प्रशिक्षण, स्कूल सोशल मीडिया क्लबों के जरिए वीडियो निर्माण और पाठ्यक्रम में सर्पदंश रोकथाम से जुड़े विषय शामिल करने की बात कही गई है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • केरल ने 20 जुलाई 2026 को सर्पदंश नियंत्रण के लिए SAPSE कार्ययोजना जारी की।
  • राज्य का लक्ष्य 2030 तक सर्पदंश से शून्य मृत्यु और शून्य विकलांगता है।
  • 13 अक्टूबर 2025 को सर्पदंश विषाक्तता को नोटिफाएबल रोग घोषित किया गया।
  • 2025 में केरल में सर्पदंश से 18 मौतें दर्ज हुईं, जबकि 2018-19 में यह संख्या 123 थी।

राज्य ने एंटी-वेनम उत्पादन सुविधा स्थापित करने पर भी चर्चा की है, ताकि उपचार व्यवस्था और मजबूत हो सके। आपात स्थिति में मरीजों को Kanivu 108 एम्बुलेंस सेवा से अस्पताल पहुंचाया जाता है। कुल मिलाकर, केरल की यह योजना सर्पदंश को एक समन्वित सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती मानकर उससे निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मॉडल पेश करती है।

Originally written on July 20, 2026 and last modified on July 20, 2026.

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