आंध्र प्रदेश ने लागू किए कॉमन ज़ोनिंग रेगुलेशंस 2026, राज्यभर में बनेगा एक समान भूमि उपयोग ढांचा

आंध्र प्रदेश ने लागू किए कॉमन ज़ोनिंग रेगुलेशंस 2026, राज्यभर में बनेगा एक समान भूमि उपयोग ढांचा

आंध्र प्रदेश सरकार ने 18 जुलाई 2026 को कॉमन ज़ोनिंग रेगुलेशंस, 2026 (Common Zoning Regulations, 2026) को अधिसूचित किया। इसका उद्देश्य पूरे राज्य में भूमि उपयोग (लैंड यूज़) और शहरी विकास के लिए एक समान नियामक ढांचा तैयार करना है। ये नियम मास्टर प्लान, जोनल डेवलपमेंट प्लान और जनरल टाउन प्लानिंग स्कीम पर लागू होंगे। हालांकि, राज्य की राजधानी क्षेत्र को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। इस नई नीति से शहरी विकास को अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भूमि उपयोग नियमन का महत्व

भूमि उपयोग नियमन (Land-use Regulation) शहरी नियोजन का एक महत्वपूर्ण वैधानिक उपकरण है, जिसके माध्यम से भूमि को विभिन्न उद्देश्यों जैसे आवास, उद्योग, परिवहन, कृषि, व्यापार और मनोरंजन के लिए वर्गीकृत किया जाता है। भारत में मास्टर प्लान और जोनल डेवलपमेंट प्लान नगर एवं क्षेत्रीय नियोजन कानूनों के तहत तैयार किए जाते हैं। इनका उद्देश्य शहरों के सुनियोजित विस्तार, आधारभूत संरचना के विकास, भवन निर्माण नियंत्रण तथा विभिन्न गतिविधियों के लिए उपयुक्त क्षेत्रों का निर्धारण करना होता है।

कॉमन ज़ोनिंग रेगुलेशंस 2026 की प्रमुख विशेषताएं

नई अधिसूचना के तहत पहले लागू ज़ोनिंग ढांचे को समाप्त कर दिया गया है और 22 अक्टूबर 2025 को जारी जी.ओ.एम.एस. संख्या 216 का स्थान इस नई व्यवस्था ने ले लिया है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि पहले की 16 भूमि उपयोग श्रेणियों को घटाकर 9 मानकीकृत श्रेणियों में बदल दिया गया है। इनमें आवासीय क्षेत्र, वाणिज्यिक क्षेत्र, सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक क्षेत्र, मनोरंजन क्षेत्र, औद्योगिक क्षेत्र, परिवहन क्षेत्र, मिश्रित उपयोग क्षेत्र, कृषि क्षेत्र तथा विकास-प्रतिबंधित क्षेत्र शामिल हैं। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य भूमि उपयोग संबंधी नियमों को सरल बनाना, अनुमोदन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और निवेश तथा शहरी विकास को प्रोत्साहित करना है।

नेगेटिव-लिस्ट ज़ोनिंग प्रणाली

कॉमन ज़ोनिंग रेगुलेशंस 2026 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक नेगेटिव-लिस्ट ज़ोनिंग प्रणाली है। इस प्रणाली के तहत किसी क्षेत्र में सभी गतिविधियों की अनुमति मानी जाती है, जब तक कि उन्हें स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित न किया गया हो। यह पारंपरिक अनुमति-आधारित प्रणाली से अलग है, जहां केवल सूचीबद्ध गतिविधियों को ही अनुमति दी जाती थी। नई व्यवस्था से परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया तेज होने और प्रशासनिक जटिलताओं में कमी आने की उम्मीद है।

क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा

राज्य सरकार ने 17 जुलाई 2026 को अमरावती आर्थिक क्षेत्र (Amaravati Economic Region) के लिए एक कार्यान्वयन समिति का भी गठन किया है, जिसका उद्देश्य नौ जिलों में क्षेत्रीय भूमि उपयोग और विकास योजनाओं का समन्वय करना है। इसके अलावा विशाखापत्तनम महानगरीय क्षेत्र मास्टर प्लान 2041 को भी मंजूरी दी गई है। यह दीर्घकालिक योजना विशाखापत्तनम, अनाकापल्ली और विजयनगरम जिलों में शहरी विस्तार, आधारभूत संरचना विकास और भूमि उपयोग नियमन का मार्गदर्शन करेगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • मास्टर प्लान शहरी विकास और भूमि उपयोग के लिए दीर्घकालिक वैधानिक योजना दस्तावेज होता है।
  • जोनल डेवलपमेंट प्लान किसी बड़े मास्टर प्लान के अंतर्गत क्षेत्र-विशिष्ट विकास नियंत्रण प्रदान करता है।
  • नेगेटिव-लिस्ट ज़ोनिंग में सभी गतिविधियां अनुमत होती हैं, सिवाय उन गतिविधियों के जिन्हें स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया हो।
  • आंध्र प्रदेश के प्रमुख नियोजन क्षेत्रों में अमरावती आर्थिक क्षेत्र और विशाखापत्तनम महानगरीय क्षेत्र शामिल हैं।

आंध्र प्रदेश का कॉमन ज़ोनिंग रेगुलेशंस, 2026 राज्य में आधुनिक और एकरूप शहरी नियोजन व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार है। इससे भूमि उपयोग संबंधी नियम अधिक स्पष्ट होंगे, विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी और दीर्घकालिक शहरी विस्तार को वैज्ञानिक एवं संतुलित तरीके से संचालित करने में सहायता मिलेगी।

Originally written on July 18, 2026 and last modified on July 21, 2026.

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