चीन के तियांगोंग मिशन से पाकिस्तान की मानव अंतरिक्ष उड़ान में एंट्री

चीन के तियांगोंग मिशन से पाकिस्तान की मानव अंतरिक्ष उड़ान में एंट्री

पाकिस्तान के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र में एक बड़ा कदम आकार ले रहा है। देश के दो पायलट, ज़ीशान अली और खुर्रम दाऊद, चीन में अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण ले रहे हैं ताकि सितंबर 2026 में तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन के मिशन में शामिल हो सकें। इनमें से एक पायलट पाकिस्तान का पहला अंतरिक्ष यात्री बनेगा और तियांगोंग स्टेशन पर जाने वाला पहला विदेशी नागरिक भी होगा।

तियांगोंग मिशन क्यों अहम है

तियांगोंग चीन का मॉड्यूलर अंतरिक्ष स्टेशन है, जो निम्न पृथ्वी कक्षा में स्थित है। इसे चीन मानवयुक्त अंतरिक्ष एजेंसी संचालित करती है और यह लंबे समय तक मानव अंतरिक्ष उड़ान, सूक्ष्म गुरुत्व अनुसंधान और कक्षीय प्रयोगों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। पाकिस्तान के लिए यह मिशन इसलिए भी खास है क्योंकि इससे देश पहली बार मानवयुक्त कक्षीय अंतरिक्ष उड़ान के क्षेत्र में प्रवेश करेगा।

यह मिशन पाकिस्तान-चीन अंतरिक्ष सहयोग की उस दिशा को भी मजबूत करता है, जो 2019 में मानव अंतरिक्ष उड़ान के विचार के साथ शुरू हुई थी। चयनित अंतरिक्ष यात्री को पेलोड स्पेशलिस्ट के रूप में भेजा जाएगा, यानी उसका मुख्य काम वैज्ञानिक प्रयोग होंगे, न कि यान को उड़ाना।

प्रशिक्षण में क्या-क्या शामिल है

बीजिंग स्थित चीन अंतरिक्ष यात्री अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र में चल रहे कार्यक्रम में कई स्तरों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें मंदारिन भाषा, अंतरिक्ष यान प्रणालियों की समझ, सूक्ष्म गुरुत्व में काम करने की प्रक्रिया और सेंट्रीफ्यूज अभ्यास शामिल हैं। यह प्रशिक्षण इसलिए जरूरी है ताकि अंतरिक्ष यात्री स्टेशन पर सीमित समय में वैज्ञानिक कार्यों को सुरक्षित और प्रभावी ढंग से पूरा कर सके।

अंतिम चयन का निर्णय अक्टूबर 2026 के मध्य से अंत तक आने की संभावना है। मिशन लगभग एक सप्ताह का होगा, जिसमें पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्री वैज्ञानिक गतिविधियों पर केंद्रित रहेगा।

वैज्ञानिक प्रयोग और भविष्य की साझेदारी

पाकिस्तान की अंतरिक्ष एजेंसी SUPARCO के अनुसार, इस मिशन के दौरान पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्री चार जैव-प्रौद्योगिकी प्रयोग करेगा। ये प्रयोग खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से जुड़े शोध से संबंधित हैं। यह पहल दिखाती है कि अंतरिक्ष अनुसंधान अब केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि कृषि, पर्यावरण और जीवन-समर्थन प्रणालियों से भी जुड़ता जा रहा है।

यह सहयोग केवल मानव अंतरिक्ष उड़ान तक सीमित नहीं है। पाकिस्तान और चीन के बीच उपग्रह परियोजनाओं पर भी संयुक्त काम चल रहा है। इसके अलावा पाकिस्तान चीन के चांग’ए 8 मिशन के लिए एक लूनर रोवर भी तैयार कर रहा है, जिसे लगभग 2028 के आसपास भेजे जाने की योजना है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • तियांगोंग चीन का स्थायी अंतरिक्ष स्टेशन है, जो निम्न पृथ्वी कक्षा में स्थित है।
  • पेलोड स्पेशलिस्ट वह अंतरिक्ष यात्री होता है, जो मुख्य रूप से वैज्ञानिक प्रयोगों और मिशन-विशिष्ट कार्यों पर काम करता है।
  • पाकिस्तान के पास इस मिशन के लिए अपना स्वतंत्र मानवयुक्त अंतरिक्ष यान या प्रक्षेपण यान नहीं है।
  • अक्टूबर 2023 में नमीरा सलीम वर्जिन गैलैक्टिक के साथ उपकक्षीय अंतरिक्ष यात्रा करने वाली पहली पाकिस्तानी महिला बनी थीं।

यदि यह मिशन तय समय पर पूरा होता है, तो यह पाकिस्तान के अंतरिक्ष इतिहास में एक नई शुरुआत होगी। साथ ही, यह चीन के तियांगोंग स्टेशन पर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग के दायरे को भी और व्यापक बनाएगा।

Originally written on September 29, 2026 and last modified on September 29, 2026.

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