ओरंग में पहली बार दर्ज हुआ राष्ट्रीय पक्षी, जैव विविधता रिकॉर्ड में नई कड़ी
असम के ओरंग राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व में भारतीय मोर का पहली बार आधिकारिक रिकॉर्ड दर्ज हुआ है। 28 सितंबर 2026 को पार्क के भीतर इस पक्षी की उपस्थिति दर्ज की गई, जबकि इससे पहले रौमारी और हाजरिबाग एंटी-पोचिंग कैंप के आसपास क्षेत्रीय अवलोकन किए गए थे। यह रिकॉर्ड ओरंग की जैव विविधता सूची में एक महत्वपूर्ण जोड़ माना जा रहा है।
कैसे दर्ज हुआ यह रिकॉर्ड
भारतीय मोर की पहली फोटोग्राफिक पुष्टि वन्यजीव फोटोग्राफर नेजीब अहमद और सिनेमैटोग्राफर चंदन सैकिया ने की। बाद में 29 सितंबर 2026 को असम के पर्यावरण एवं वन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने भी इस रिकॉर्ड का उल्लेख करते हुए इसे ओरंग और असम की जैव विविधता के लिए अहम उपलब्धि बताया। इससे पहले ओरंग राष्ट्रीय उद्यान से भारतीय मोर का कोई पुष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।
भारतीय मोर और ओरंग का पारिस्थितिक महत्व
भारतीय मोर का वैज्ञानिक नाम Pavo cristatus है और यह तीतर कुल Phasianidae का पक्षी है। नर मोर की लंबी पूंछ पर बने आकर्षक पंख इसे आसानी से पहचाने जाने योग्य बनाते हैं। यह भारत का राष्ट्रीय पक्षी भी है, इसलिए इसकी उपस्थिति किसी भी संरक्षित क्षेत्र की पक्षी विविधता के लिहाज से खास मानी जाती है।
ओरंग राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व असम में स्थित है और अपने घास के मैदानों, आर्द्रभूमियों तथा नदी-तटीय आवासों के लिए जाना जाता है। इसे अक्सर “मिनी काजीरंगा” भी कहा जाता है, क्योंकि इसकी कई पारिस्थितिक विशेषताएँ काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से मिलती-जुलती हैं। ऐसे आवास कई प्रजातियों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराते हैं और नए पक्षी रिकॉर्ड इसी जैविक समृद्धि का संकेत देते हैं।
निगरानी और संरक्षण की दिशा
वन विभाग ने क्षेत्र में आगे भी निगरानी जारी रखने की योजना बनाई है, ताकि मोर की आवाजाही और उसके आवास उपयोग को समझा जा सके। किसी संरक्षित क्षेत्र में किसी नई प्रजाति का दर्ज होना केवल सूची बढ़ाने की बात नहीं होती, बल्कि यह उस क्षेत्र की पारिस्थितिकी, आवास गुणवत्ता और संरक्षण प्रयासों की भी झलक देता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय मोर का वैज्ञानिक नाम Pavo cristatus है।
- भारतीय मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है।
- ओरंग राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व असम में स्थित है और घासभूमि व आर्द्रभूमि आवासों के लिए जाना जाता है।
- इस क्षेत्र में भारतीय मोर का पहले ज्ञात निकटतम रिकॉर्ड उदलगुड़ी जिले के नुनोई वन्यजीव अभयारण्य से था।
ओरंग में भारतीय मोर का दर्ज होना असम की बढ़ती जैव विविधता और संरक्षण निगरानी की उपयोगिता को रेखांकित करता है। यह रिकॉर्ड भविष्य में क्षेत्रीय वन्यजीव अध्ययन और संरक्षण रणनीतियों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।