बर्दा में शेर पुनर्वास के लिए गुजरात ने बदली वन प्रशासनिक संरचना
गुजरात ने पोरबंदर वन मंडल की प्रशासनिक संरचना में बदलाव कर बर्दा क्षेत्र में एशियाई शेरों के पुनर्वास और संरक्षण प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। 29 सितंबर 2026 को की गई इस पुनर्संरचना में वन क्षेत्रों, गांवों की सीमाओं, बीट सीमाओं और कुछ क्षेत्रों के अंतर-मंडलीय हस्तांतरण को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य पश्चिमी गुजरात में वन प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाना और शेरों के लिए विकसित हो रहे दूसरे आवास क्षेत्र को बेहतर समर्थन देना है।
पोरबंदर वन मंडल में नया प्रशासनिक ढांचा
पुनर्गठन के बाद पोरबंदर रेंज अब 6,840.84 हेक्टेयर क्षेत्र और 80 गांवों को कवर करेगी। इसके अंतर्गत पोरबंदर सिटी, गोसाबारा, मोकर, विसावदा, कांटेला, माधवपुर और सटिया जैसी बीट शामिल की गई हैं। राणावाव रेंज का दायरा 13,051.25 हेक्टेयर और 27 गांवों तक तय किया गया है, जिसमें गोडाना, बिलेश्वर, सवदिवादर और राणावाव बीट शामिल हैं।
इसके साथ ही जामनगर वन मंडल की आरएफडब्ल्यू भाटिया रेंज से 305.94 हेक्टेयर वन क्षेत्र को पोरबंदर वन मंडल के भानवड रेंज में स्थानांतरित किया गया है। यह क्षेत्र भानवड तालुका के कंदरदा जोगाना, सजदियाला, जुना और जाम्बूसर गांवों से जुड़ा है। प्रशासनिक नियंत्रण के तहत कुटियाना, पोरबंदर सोशल फॉरेस्ट्री और राणावाव सोशल फॉरेस्ट्री रेंज भी अब पोरबंदर वन मंडल के अधीन आ गई हैं।
बर्दा में शेरों के लिए दूसरा आवास क्यों अहम है
बर्दा क्षेत्र को प्रोजेक्ट लायन के तहत एशियाई शेरों के लिए दूसरे आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह पहल 2020 में शुरू की गई थी। एशियाई शेर वulnerable श्रेणी में आते हैं और प्राकृतिक रूप से केवल भारत में पाए जाते हैं। बर्दा क्षेत्र में शेरों की प्राकृतिक वापसी 143 वर्षों के अंतराल के बाद हुई, जो संरक्षण के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है।
2023 की वन्यजीव गणना में बर्दा वन्यजीव अभयारण्य में 17 एशियाई शेर, जिनमें शावक भी शामिल थे, दर्ज किए गए। उसी गणना में 25 तेंदुए भी पाए गए। यह अभयारण्य गिर संरक्षित क्षेत्र से बाहर व्यापक संरक्षण परिदृश्य का हिस्सा है, इसलिए यहां प्रबंधन, शिकार-आधार और मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
प्रबंधन, शिकार-आधार और दीर्घकालिक योजना
वन विभाग ने जून 2024 में गिर वन से बर्दा वन्यजीव अभयारण्य में चीतल और सांभर के स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू की थी। ये प्रजातियां शेरों के लिए शिकार-आधार तैयार करने में महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इसी कारण बर्दा क्षेत्र में आवास सुधार और प्रजाति प्रबंधन को साथ-साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
गुजरात सरकार ने नए शेर आवासों के लिए 180 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसके अलावा प्रोजेक्ट लायन @ 2047 के तहत 10 वर्षों के लिए 2,927 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें आवास पुनर्स्थापन, शिकार-आधार बढ़ाने और समुदाय संपर्क जैसे कार्य शामिल हैं। यह संकेत देता है कि शेर संरक्षण अब केवल अभयारण्यों तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक परिदृश्य-आधारित रणनीति का हिस्सा बन चुका है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एशियाई शेर का वैज्ञानिक नाम Panthera leo persica है।
- गिर राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य, गुजरात, एशियाई शेरों का विश्व में एकमात्र प्राकृतिक आवास है।
- बर्दा वन्यजीव अभयारण्य गुजरात के पोरबंदर और जामनगर क्षेत्र में स्थित है।
- प्रोजेक्ट लायन की शुरुआत वर्ष 2020 में एशियाई शेरों के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए की गई थी।
पोरबंदर वन मंडल का यह पुनर्गठन बर्दा क्षेत्र में शेर पुनर्वास, वन प्रबंधन और संरक्षण ढांचे को अधिक संगठित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे पश्चिमी गुजरात में वन्यजीव संरक्षण की दीर्घकालिक रणनीति को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।