भारत में पहली बार PRAMAAN प्रमाणपत्र, टिकाऊ वन प्रबंधन को मिली नई पहचान
भारत ने 29 सितंबर 2026 को भारतीय वन एवं लकड़ी प्रमाणन योजना के तहत अपने पहले PRAMAAN प्रमाणपत्र जारी किए। ये प्रमाणपत्र आंध्र प्रदेश वन विकास निगम और ओडिशा के एक बांस किसान को दिए गए। यह कदम देश में टिकाऊ वन प्रबंधन, जिम्मेदार वानिकी और लकड़ी आधारित उत्पादों की प्रमाणन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
PRAMAAN क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है
PRAMAAN, भारतीय वन एवं लकड़ी प्रमाणन योजना का ब्रांड नाम है। इसे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने दिसंबर 2023 में शुरू किया था। इस योजना का उद्देश्य भारत में वन, वृक्ष और लकड़ी आधारित मूल्य शृंखलाओं को प्रमाणित करना है, ताकि उत्पादन से लेकर व्यापार तक पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
यह योजना सतत वन प्रबंधन, कृषि वानिकी और लकड़ी उद्योगों में जिम्मेदार प्रक्रियाओं से जुड़ी है। साथ ही, इसे राष्ट्रीय कार्य योजना संहिता 2023 और यूरोपीय संघ के वनों की कटाई-रोधी नियमों जैसी अंतरराष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप भी तैयार किया गया है। इससे भारतीय उत्पादों के लिए वैश्विक बाजारों में स्वीकार्यता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
कौन-कौन से प्रमाणन शामिल हैं
PRAMAAN के तहत तीन तरह के प्रमाणन दिए जाते हैं। पहला, वन प्रबंधन प्रमाणन, जो स्वीकृत मानकों के तहत प्रबंधित जंगलों और वृक्षारोपण पर लागू होता है। दूसरा, वनों के बाहर वृक्ष प्रबंधन प्रमाणन, जो खेतों, खेत की मेड़ों और कृषि वानिकी क्षेत्रों जैसे गैर-वन क्षेत्रों में उगे पेड़ों के लिए है। तीसरा, श्रृंखला अभिरक्षा प्रमाणन, जो प्रमाणित सामग्री की कटाई, प्रसंस्करण और व्यापार के दौरान उसकी ट्रैकिंग सुनिश्चित करता है।
यह ढांचा इसलिए भी अहम है क्योंकि प्रमाणित सामग्री की पहचान और निगरानी से उपभोक्ताओं, उद्योगों और निर्यात बाजारों में भरोसा बढ़ता है।
आंध्र प्रदेश और ओडिशा से मिली शुरुआती पहचान
आंध्र प्रदेश इस योजना के तहत पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ खेती पद्धतियों के लिए प्रमाणन पाने वाला पहला राज्य बनने की ओर बढ़ रहा है। राज्य के सत्या वेडु, कवाली, नेल्लोर और नायडुपेटा क्षेत्रों में आंध्र प्रदेश वन विकास निगम के लगभग 33,000 हेक्टेयर यूकेलिप्टस वृक्षारोपण को इस प्रक्रिया में शामिल किया गया।
ओडिशा के एक बांस किसान को मिला प्रमाणपत्र यह संकेत देता है कि यह योजना केवल बड़े संस्थानों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे उत्पादकों और कृषि वानिकी से जुड़े किसानों तक भी पहुंच सकती है।
प्रमाणन दायरे और बाजार से जुड़ाव
28 फरवरी 2026 तक IFWCS-PRAMAAN के तहत प्री-ऑडिट में वन प्रबंधन प्रमाणन के लिए 7.76 लाख हेक्टेयर और वनों के बाहर वृक्ष प्रमाणन के लिए 10.78 हजार हेक्टेयर क्षेत्र शामिल किया गया था। यह आंकड़ा बताता है कि योजना का दायरा धीरे-धीरे व्यापक हो रहा है।
इस प्रमाणन व्यवस्था का एक बड़ा उद्देश्य प्रमाणित वन उत्पादों और लकड़ी उत्पादों के लिए बाजार तक पहुंच आसान बनाना है। ऐसे समय में जब वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में पर्यावरणीय जवाबदेही पर जोर बढ़ रहा है, PRAMAAN भारत के लिए एक रणनीतिक उपकरण बन सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- PRAMAAN, भारतीय वन एवं लकड़ी प्रमाणन योजना का ब्रांड नाम है।
- इस योजना की शुरुआत दिसंबर 2023 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने की थी।
- PRAMAAN के तहत तीन प्रमाणन श्रेणियां हैं: वन प्रबंधन, वनों के बाहर वृक्ष प्रबंधन और श्रृंखला अभिरक्षा।
- यूरोपीय संघ के वनों की कटाई-रोधी नियमों को ध्यान में रखकर इस ढांचे को अंतरराष्ट्रीय मानकों से जोड़ा गया है।
पहले PRAMAAN प्रमाणपत्रों का जारी होना भारत में प्रमाणित, टिकाऊ और बाजार-उन्मुख वन प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। यह पहल आने वाले समय में किसानों, वन-आधारित उद्योगों और निर्यातकों के लिए नई संभावनाएं खोल सकती है।