कलबुर्गी में पीएम मित्रा टेक्सटाइल पार्क के पहले चरण की तैयारी पूरी

कलबुर्गी में पीएम मित्रा टेक्सटाइल पार्क के पहले चरण की तैयारी पूरी

कर्नाटक के कलबुर्गी में विकसित किए जा रहे पीएम मित्रा टेक्सटाइल पार्क के पहले चरण के लिए बुनियादी ढांचे की रूपरेखा और प्रशासनिक ढांचा 12 जून 2026 तक अंतिम रूप ले चुका है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना 1,000 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी और केंद्र सरकार की पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (PM MITRA) योजना के अंतर्गत स्थापित की जा रही है। परियोजना का उद्देश्य वस्त्र उद्योग के लिए एकीकृत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना तथा क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति देना है।

पीएम मित्रा योजना क्या है?

पीएम मित्रा का पूर्ण रूप “प्रधानमंत्री मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल” है। यह केंद्र सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य देश में विश्वस्तरीय टेक्सटाइल पार्क विकसित करना है। इस योजना के तहत वस्त्र निर्माण, प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स, डिजाइनिंग और निर्यात से संबंधित सुविधाओं को एक ही परिसर में विकसित किया जाता है। इससे उत्पादन लागत कम होती है, निवेश आकर्षित होता है और रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं।

परियोजना की मंजूरी और तैयारी

कर्नाटक सरकार ने राज्य के हथकरघा एवं वस्त्र विभाग को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में बाहरी बुनियादी ढांचा कार्यों को शामिल करने के लिए संशोधन करने का निर्देश दिया है। संशोधित डीपीआर को अंतिम स्वीकृति के लिए भारत सरकार की परियोजना अनुमोदन समिति (Project Approval Committee) के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। 11 जून 2026 को बेंगलुरु में आयोजित समीक्षा बैठक में परियोजना के पहले चरण की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई।

वित्तीय सहायता और अवसंरचना विकास

यह परियोजना केंद्र सरकार की डेवलपमेंट कैपिटल सपोर्ट योजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए पात्र है। इसके तहत कुल परियोजना लागत का अधिकतम 30 प्रतिशत या अधिकतम 500 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जा सकती है। इस अनुदान का उपयोग आंतरिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए किया जाएगा, जिसमें सड़कें, जलापूर्ति व्यवस्था, विद्युत आपूर्ति, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) तथा श्रमिकों के लिए छात्रावास जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

केआईएडीबी निभाएगा प्रमुख भूमिका

परियोजना के पहले चरण का विकास कर्नाटक इंडस्ट्रियल एरियाज डेवलपमेंट बोर्ड (KIADB) द्वारा किया जाएगा। यह कर्नाटक में औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए जिम्मेदार एक वैधानिक संस्था है। राज्य कार्यान्वयन एजेंसी को प्रारंभिक भौतिक अवसंरचना विकास कार्यों के लिए न्यूनतम 25 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने होंगे, जिससे निर्माण और अन्य विकास गतिविधियों की शुरुआत की जा सके।

प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर आधारित पार्क

पीएम मित्रा टेक्सटाइल पार्क को ‘प्लग-एंड-प्ले’ औद्योगिक मॉडल के आधार पर विकसित किया जाएगा। इस मॉडल में उद्योगों को भूमि आवंटित करने से पहले सभी आवश्यक सुविधाएं और आधारभूत संरचना तैयार कर दी जाती हैं। इससे निवेशकों को उत्पादन इकाइयां स्थापित करने में कम समय लगता है और औद्योगिक गतिविधियों को तेजी से शुरू किया जा सकता है। यह मॉडल वर्तमान समय में औद्योगिक पार्कों के विकास का एक लोकप्रिय तरीका माना जाता है।

कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण परियोजना

कलबुर्गी उत्तर-पूर्वी कर्नाटक के कल्याण कर्नाटक क्षेत्र का हिस्सा है। इस क्षेत्र को औद्योगिक और आर्थिक विकास की दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मित्रा टेक्सटाइल पार्क से क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, रोजगार के अवसर सृजित होंगे और वस्त्र उद्योग को नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी महत्वपूर्ण लाभ मिलने की संभावना है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • पीएम मित्रा का पूर्ण रूप “प्रधानमंत्री मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल” है।
  • परियोजना कलबुर्गी में 1,000 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही है।
  • केंद्र सरकार कुल परियोजना लागत का अधिकतम 30 प्रतिशत या 500 करोड़ रुपये तक सहायता प्रदान कर सकती है।
  • कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) औद्योगिक अपशिष्ट जल के सामूहिक उपचार के लिए उपयोग किया जाता है।
  • कर्नाटक इंडस्ट्रियल एरियाज डेवलपमेंट बोर्ड (KIADB) कर्नाटक में औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए जिम्मेदार संस्था है।
  • टेक्सटाइल पार्कों में विनिर्माण, प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स और साझा सुविधाओं को एकीकृत रूप से विकसित किया जाता है।

कलबुर्गी में स्थापित होने वाला पीएम मित्रा टेक्सटाइल पार्क भारत के वस्त्र उद्योग को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। आधुनिक अवसंरचना, निवेश प्रोत्साहन और एकीकृत औद्योगिक सुविधाओं के माध्यम से यह परियोजना न केवल कर्नाटक बल्कि देश के वस्त्र क्षेत्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

Originally written on June 13, 2026 and last modified on June 13, 2026.

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