जापान के एच3 रॉकेट ने नई ‘30 कॉन्फ़िगरेशन’ के साथ सफल वापसी की
जापान के अगली पीढ़ी के एच3 रॉकेट ने 12 जून 2026 को सफल प्रक्षेपण के साथ अंतरिक्ष मिशनों में वापसी की। यह प्रक्षेपण जापान के कागोशिमा प्रान्त स्थित तानेगाशिमा स्पेस सेंटर से किया गया। ‘फ्लाइट 6’ नामक इस मिशन की विशेषता इसकी नई और कम लागत वाली ‘30 कॉन्फ़िगरेशन’ थी, जिसमें तीन एलई-9 तरल ईंधन इंजन लगाए गए थे और किसी भी ठोस रॉकेट बूस्टर का उपयोग नहीं किया गया। मिशन के दौरान रॉकेट का दूसरा चरण निर्धारित कक्षा तक सफलतापूर्वक पहुंचा और इसमें ले जाए गए छह छोटे उपग्रहों के भी सफलतापूर्वक पृथक होने की संभावना व्यक्त की गई है।
एच3 रॉकेट क्या है?
एच3 जापान का प्रमुख और अगली पीढ़ी का प्रक्षेपण यान है, जिसे जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) और मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। इस रॉकेट का उद्देश्य उपग्रह प्रक्षेपण, वैज्ञानिक अनुसंधान मिशन और वाणिज्यिक अंतरिक्ष सेवाओं के लिए जापान की क्षमता को मजबूत करना है। एच3 कार्यक्रम को जापान के अंतरिक्ष क्षेत्र में लागत कम करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जाता है।
‘30 कॉन्फ़िगरेशन’ की विशेषताएं
फ्लाइट 6 में पहली बार ‘30 कॉन्फ़िगरेशन’ का उपयोग किया गया। इस विन्यास में तीन एलई-9 तरल ईंधन इंजन लगाए गए थे और कोई ठोस रॉकेट बूस्टर नहीं जोड़ा गया था। एच3 रॉकेट परिवार में विभिन्न प्रकार की कॉन्फ़िगरेशन उपलब्ध हैं, जिन्हें अलग-अलग पेलोड आवश्यकताओं और लागत के अनुसार तैयार किया गया है। नई कॉन्फ़िगरेशन का उद्देश्य कम लागत में प्रभावी प्रक्षेपण क्षमता प्रदान करना है।
मिशन की सफलता और उपग्रह प्रक्षेपण
इस मिशन में विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों द्वारा विकसित छह छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा गया। प्रक्षेपण के बाद रॉकेट का दूसरा चरण निर्धारित कक्षा में पहुंच गया और सभी उपग्रहों के सफलतापूर्वक अलग होने की संभावना जताई गई। यह मिशन जापान की उपग्रह प्रक्षेपण क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ छोटे उपग्रहों के बढ़ते वैश्विक बाजार में उसकी भागीदारी को भी बढ़ावा देगा।
पूर्व विफलताओं के बाद वापसी
एच3 कार्यक्रम को हाल के वर्षों में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। दिसंबर 2025 में फ्लाइट 8 मिशन असफल रहा था, जब उपग्रह माउंट में तकनीकी दोष के कारण एक नेविगेशन उपग्रह को निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका। इसके अलावा कार्यक्रम में इससे पहले भी एक मिशन विफलता दर्ज की गई थी। ऐसे में फ्लाइट 6 की सफलता को एच3 कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह प्रक्षेपण मूल रूप से 10 जून 2026 को निर्धारित था, लेकिन प्रतिकूल मौसम पूर्वानुमान के कारण इसे दो दिन के लिए स्थगित कर दिया गया था।
जापान की अंतरिक्ष रणनीति में महत्व
जापान अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी स्वतंत्र क्षमता को मजबूत करने के लिए लगातार नए प्रक्षेपण यानों का विकास कर रहा है। जाक्सा ने प्रति वर्ष एच3 रॉकेट के छह से आठ प्रक्षेपण करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह कार्यक्रम भविष्य में पुनः प्रयोज्य रॉकेट तकनीकों और उन्नत तरल ईंधन प्रणालियों के विकास से भी जुड़ा हुआ है। इससे जापान को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रक्षेपण बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिल सकती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एच3 जापान का अगली पीढ़ी का प्रक्षेपण यान है।
- इसका विकास जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) और मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज ने संयुक्त रूप से किया है।
- एलई-9 (LE-9) एच3 कार्यक्रम में उपयोग किया जाने वाला तरल ईंधन रॉकेट इंजन है।
- तानेगाशिमा स्पेस सेंटर जापान के कागोशिमा प्रान्त में स्थित है।
- फ्लाइट 6 मिशन में छह छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा गया।
- एच3 कार्यक्रम का उद्देश्य अंतरिक्ष प्रक्षेपण लागत कम करना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाना है।
एच3 रॉकेट की सफल वापसी जापान के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। नई ‘30 कॉन्फ़िगरेशन’ के साथ प्राप्त सफलता न केवल तकनीकी विश्वसनीयता को मजबूत करती है, बल्कि जापान की अंतरिक्ष प्रक्षेपण सेवाओं को अधिक किफायती और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।