कठुआ के छह सीमावर्ती गांव वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II में शामिल
जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के छह सीमावर्ती गांवों को केंद्र सरकार ने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II के तहत शामिल किया है। यह कदम सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, सरकारी योजनाओं की अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सुनिश्चित करने और ग्रामीण विकास को गति देने के उद्देश्य से उठाया गया है। ये गांव अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित हैं, इसलिए इनका सामरिक महत्व भी काफी अधिक है। सरकार का लक्ष्य है कि इन संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर जीवन सुविधाएं और आर्थिक अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
योजना के तहत चुने गए छह गांव
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II के अंतर्गत जिन गांवों का चयन किया गया है, उनमें बोबिया, कड्याला, गजनाल, करोल कृष्णा, रथुआ और गुज्जर चक शामिल हैं। ये सभी गांव अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास स्थित हैं और लंबे समय से विकास संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
दूरस्थ स्थान, सुरक्षा संबंधी परिस्थितियां और सीमित संसाधनों के कारण यहां सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी देखी जाती रही है। इस योजना के माध्यम से इन क्षेत्रों में बुनियादी सेवाओं को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो सके।
उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक
इन गांवों के चयन को कठुआ के उपायुक्त राजेश शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान अंतिम रूप दिया गया। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि विकास योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि नियमित निगरानी और विभागों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जाना चाहिए। विशेष रूप से सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और शिक्षा सेवाओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया ताकि जमीन पर स्पष्ट सुधार दिखाई दे।
सरकारी योजनाओं की अंतिम छोर तक पहुंच पर जोर
उपायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल बुनियादी ढांचा निर्माण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सभी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचना भी जरूरी है। इसके लिए विभागों को क्षेत्र स्तर पर सत्यापन करने, सेवा संबंधी कमियों की पहचान करने और अंतिम छोर तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
लक्ष्य यह है कि सामाजिक सुरक्षा, आवास, आजीविका सहायता और अन्य प्रमुख सरकारी योजनाओं का पूर्ण संतृप्ति स्तर प्राप्त किया जाए, ताकि कोई भी पात्र परिवार वंचित न रहे। सामुदायिक भागीदारी को भी इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती गांवों का समग्र विकास करना है।
- यह योजना सड़क संपर्क, आवास, पर्यटन और आजीविका के अवसरों को बढ़ाने पर विशेष ध्यान देती है।
- कठुआ जिला जम्मू क्षेत्र में स्थित है और इसकी सीमा का एक हिस्सा पाकिस्तान के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है।
- अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र, नियंत्रण रेखा (एलओसी) से अलग होता है और यहां नागरिक बसावट को अधिक मजबूत समर्थन दिया जाता है।
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II के तहत इन गांवों का शामिल होना केवल विकास की पहल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। बेहतर बुनियादी ढांचा और मजबूत सार्वजनिक सेवाएं सीमावर्ती क्षेत्रों से पलायन को कम करने में मदद करती हैं और स्थानीय आबादी को स्थिर बनाए रखती हैं। इससे रक्षा तैयारियों को मजबूती मिलती है और साथ ही ग्रामीण विकास का समावेशी मॉडल भी स्थापित होता है। यह पहल सीमावर्ती भारत को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।