एलएंडटी और आईटीओचू का हरित अमोनिया समझौता भारत के लिए बड़ी उपलब्धि

एलएंडटी और आईटीओचू का हरित अमोनिया समझौता भारत के लिए बड़ी उपलब्धि

भारत की स्वच्छ ऊर्जा नीति को एक नई मजबूती तब मिली, जब लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ने जापान की आईटीओचू कॉरपोरेशन के साथ हर साल 3 लाख टन हरित अमोनिया की आपूर्ति के लिए दीर्घकालिक समझौता किया। यह समझौता एलएंडटी एनर्जी ग्रीनटेक के माध्यम से लागू किया जाएगा और इसकी आपूर्ति गुजरात स्थित प्रस्तावित उत्पादन केंद्र से की जाएगी। यह भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत देश को हरित हाइड्रोजन और उससे जुड़े उत्पादों का वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

हरित अमोनिया को भविष्य के स्वच्छ ईंधन के रूप में देखा जा रहा है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां कार्बन उत्सर्जन कम करना चुनौतीपूर्ण है। जहाजरानी, भारी उद्योग और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा व्यापार में इसकी भूमिका तेजी से बढ़ रही है। यही कारण है कि जापान जैसे देश भारत के साथ दीर्घकालिक साझेदारी स्थापित कर रहे हैं।

समझौते में क्या शामिल है

इस समझौते के तहत एलएंडटी एनर्जी ग्रीनटेक हर वर्ष 3 लाख टन हरित अमोनिया जापान की आईटीओचू कॉरपोरेशन को उपलब्ध कराएगी। यह उत्पादन गुजरात के प्रस्तावित संयंत्र से किया जाएगा, जहां नवीकरणीय ऊर्जा के माध्यम से हरित हाइड्रोजन तैयार कर उससे अमोनिया बनाया जाएगा।

यह समझौता केवल व्यापारिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह भारत की स्वच्छ ऊर्जा निर्यात क्षमता को भी वैश्विक स्तर पर स्थापित करता है। इससे भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में दीर्घकालिक अवसर मिलने की संभावना बढ़ेगी।

हरित अमोनिया क्यों है इतना महत्वपूर्ण

हरित अमोनिया पारंपरिक अमोनिया से अलग होता है क्योंकि इसके उत्पादन में जीवाश्म ईंधनों का उपयोग नहीं किया जाता। इसे नवीकरणीय ऊर्जा से तैयार हरित हाइड्रोजन के आधार पर बनाया जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आती है।

समुद्री परिवहन क्षेत्र में इसका महत्व विशेष रूप से बढ़ रहा है। जहाजरानी उद्योग आज भी वैश्विक कार्बन उत्सर्जन का बड़ा स्रोत है और इसके डीकार्बोनाइजेशन के लिए हरित अमोनिया एक प्रभावी विकल्प माना जा रहा है। इसके अलावा, यह हाइड्रोजन को सुरक्षित रूप से संग्रहित और परिवहन करने का भी माध्यम बन सकता है।

जापान की रणनीति और भारत की भूमिका

आईटीओचू कॉरपोरेशन का लक्ष्य वैश्विक स्तर पर हरित अमोनिया की आपूर्ति शृंखला तैयार करना है। इसमें सिंगापुर सहित कई प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों और बंदरगाहों को शामिल किया जा रहा है। जापान अपने उद्योगों और जहाजरानी क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक स्वच्छ ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहता है।

भारत, विशेषकर गुजरात, इस दिशा में तेजी से उभर रहा है। यहां बंदरगाहों की उपलब्धता, मजबूत औद्योगिक आधार और नवीकरणीय ऊर्जा की पर्याप्त क्षमता इसे हरित हाइड्रोजन और अमोनिया परियोजनाओं के लिए आदर्श बनाती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • हरित अमोनिया, हरित हाइड्रोजन और नाइट्रोजन से तैयार किया जाता है।
  • अमोनिया को स्वच्छ जहाजरानी ईंधन और हाइड्रोजन कैरियर दोनों रूपों में उपयोग किया जा सकता है।
  • भारत का राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन 2030 तक 50 लाख टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखता है।
  • गुजरात हरित हाइड्रोजन और अमोनिया परियोजनाओं का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।

भारत सरकार स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश, सब्सिडी और नीति समर्थन के माध्यम से देश को वैश्विक हरित ईंधन निर्यातक बनाने की दिशा में काम कर रही है। एलएंडटी और आईटीओचू के बीच हुआ यह समझौता इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल भारत की अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा स्थिति मजबूत होगी, बल्कि औद्योगिक विकास, रोजगार और निर्यात प्रतिस्पर्धा को भी नई गति मिलेगी।

Originally written on April 22, 2026 and last modified on April 22, 2026.

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