एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने में आरबीआई की महत्वपूर्ण भूमिका

एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने में आरबीआई की महत्वपूर्ण भूमिका

भारत की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। जून 2026 में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एमएसएमई को भारत की “उद्यमिता की नर्सरी” बताते हुए इसे रोजगार सृजन, नवाचार और आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बताया। आरबीआई ने इस क्षेत्र के लिए बेहतर ऋण उपलब्धता, वित्तीय समावेशन और औपचारिकरण को अपनी प्रमुख नीतिगत प्राथमिकताओं में शामिल किया है। इसी दिशा में जून 2026 में एमएसएमई योजनाओं और नियामक पहलों को लेकर एक विशेष जागरूकता सप्ताह भी आयोजित किया गया।

एमएसएमई पंजीकरण और औपचारिकरण को बढ़ावा

भारत में एमएसएमई इकाइयों के पंजीकरण के लिए उद्यम (Udyam) और उद्यम असिस्ट (Udyam Assist) प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाता है। मार्च 2026 तक इन दोनों प्लेटफॉर्मों पर 7.9 करोड़ से अधिक एमएसएमई और अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यम पंजीकृत हो चुके थे। उद्यम पोर्टल सरकार का आधिकारिक एमएसएमई पंजीकरण मंच है, जबकि उद्यम असिस्ट का उद्देश्य अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यमों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ना है। इस प्रक्रिया से छोटे व्यवसायों को सरकारी योजनाओं, ऋण सुविधाओं और अन्य लाभों तक आसान पहुंच प्राप्त होती है।

भारतीय अर्थव्यवस्था में एमएसएमई क्षेत्र का योगदान

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में एमएसएमई क्षेत्र का भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान 31.1 प्रतिशत रहा। इसके अलावा देश के कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 48.58 प्रतिशत और विनिर्माण उत्पादन में 35.4 प्रतिशत रही। यह क्षेत्र लगभग 32.8 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों के अवसर प्रदान करता है। यही कारण है कि एमएसएमई को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।

ऋण सुविधा और आरबीआई के नए निर्देश

फरवरी 2026 में आरबीआई ने “लेंडिंग टू एमएसएमई सेक्टर (संशोधन) निर्देश, 2026” जारी किए। इसके तहत बैंकों को सूक्ष्म और लघु उद्यमों को 20 लाख रुपये तक के ऋण पर किसी प्रकार की संपार्श्विक (कोलेटरल) सुरक्षा लेने से रोका गया। इसके अलावा, जिन सूक्ष्म और लघु उद्यमों का वित्तीय रिकॉर्ड अच्छा है, उन्हें बैंक की नीति के अनुसार 25 लाख रुपये तक का कोलेटरल-फ्री ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है। इस कदम का उद्देश्य छोटे उद्यमों के लिए ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाना है।

टीआरईडीएस और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण व्यवस्था

अप्रैल 2026 में आरबीआई ने ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (टीआरईडीएस) प्लेटफॉर्म पर एमएसएमई को शामिल करने के लिए आवश्यक ड्यू डिलिजेंस प्रक्रिया को हटाने का प्रस्ताव दिया। टीआरईडीएस एक इलेक्ट्रॉनिक मंच है, जहां एमएसएमई अपने खरीदारों से मिलने वाली बकाया राशि के आधार पर चालानों का डिस्काउंट कराकर शीघ्र नकदी प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही आरबीआई ने प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) के अंतर्गत एमएसएमई क्षेत्र को विशेष समर्थन जारी रखा। इस व्यवस्था में सूक्ष्म उद्यमों, महिला स्वामित्व वाले व्यवसायों, निर्यातकों तथा हरित एवं सतत उद्यमों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एमएसएमई का वर्गीकरण भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 के तहत किया जाता है।
  • उद्यम पंजीकरण प्रणाली ने पूर्व की उद्योग आधार (उद्योग आधार) व्यवस्था का स्थान लिया है।
  • टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य एमएसएमई को चालान आधारित वित्तीय सहायता देकर उनकी नकदी प्रवाह समस्या को कम करना है।
  • प्राथमिकता क्षेत्र ऋण में कृषि, शिक्षा, आवास और एमएसएमई जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया जाता है।

एमएसएमई क्षेत्र भारत की आर्थिक प्रगति, रोजगार सृजन और उद्यमिता विकास का महत्वपूर्ण स्तंभ है। आरबीआई द्वारा उठाए गए हालिया कदम, जैसे कोलेटरल-फ्री ऋण, टीआरईडीएस में सुधार और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने वाली नीतियां, छोटे उद्यमों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इससे न केवल उद्यमियों को नए अवसर मिलेंगे, बल्कि भारत की समग्र आर्थिक विकास यात्रा को भी नई गति मिलेगी।

Originally written on June 22, 2026 and last modified on June 22, 2026.

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