एफएसएसएआई ने पान मसाला और गुटखा की प्लास्टिक पैकेजिंग पर पूर्ण प्रतिबंध का प्रस्ताव दिया
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पान मसाला, गुटखा और इसी तरह के उत्पादों की प्लास्टिक पैकेजिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है। खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) विनियम, 2018 में संशोधन के इस मसौदे का उद्देश्य सिंगल-यूज प्लास्टिक सैशे की जगह कागज, पेपरबोर्ड, सेल्यूलोज और अन्य प्राकृतिक सामग्री से बने पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देना है।
यह कदम प्लास्टिक कचरे को कम करने, पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य नियमों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
मसौदा संशोधन में क्या प्रस्तावित है
नए मसौदे के अनुसार, पान मसाला, गुटखा और संबंधित तंबाकू उत्पादों की पैकेजिंग केवल गैर-प्लास्टिक सामग्री में ही की जा सकेगी। इसमें पॉलीथीन, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलिएस्टर, पीवीसी और मल्टीलेयर लैमिनेट जैसी सभी प्रकार की प्लास्टिक पैकेजिंग पर प्रतिबंध लगाया गया है।
साथ ही, एल्युमिनियम फॉयल और मेटलाइज्ड लेयर का उपयोग भी प्रतिबंधित किया जाएगा, जो आमतौर पर छोटे सैशे पैक में इस्तेमाल होते हैं। यह नियम तंबाकू और गैर-तंबाकू दोनों प्रकार के पान मसाला उत्पादों पर लागू होगा।
विशेष रसायनों और सामग्री पर रोक
एफएसएसएआई ने कुछ विशेष कोपॉलिमर जैसे विनाइल एसीटेट–मेलिक एसिड–विनाइल क्लोराइड के उपयोग पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। इन्हें गुटखा, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों की पैकेजिंग में उपयोग किया जाता था।
इन बदलावों को पैकेजिंग विनियमों की अनुसूची-IV में जोड़ा गया है, जहां विभिन्न खाद्य श्रेणियों के लिए अनुमत पैकेजिंग सामग्री निर्धारित की जाती है। अब पान मसाला को एक अलग श्रेणी के रूप में शामिल किया गया है।
यह कदम क्यों महत्वपूर्ण है
पान मसाला और चबाने वाले तंबाकू उद्योग में मल्टीलेयर प्लास्टिक सैशे का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है, जिन्हें रिसाइकिल करना बेहद कठिन होता है। ये सैशे पर्यावरण प्रदूषण और कचरे की बड़ी समस्या पैदा करते हैं।
इसके अलावा, गुटखा और तंबाकू युक्त पान मसाला पहले से ही मौखिक कैंसर, लत और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े हैं। इसलिए यह प्रस्ताव पर्यावरण और स्वास्थ्य—दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- FSSAI की स्थापना खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत हुई थी।
- गुटखा में सुपारी, तंबाकू, कत्था, पैराफिन और फ्लेवरिंग एजेंट शामिल होते हैं।
- प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 प्लास्टिक कचरे के उपयोग और निपटान को नियंत्रित करते हैं।
- कई भारतीय राज्य हर वर्ष गुटखा और तंबाकू युक्त पान मसाला पर प्रतिबंध को नवीनीकृत करते हैं।
यदि यह संशोधन लागू होता है, तो पान मसाला और गुटखा उद्योग की पैकेजिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा। इससे प्लास्टिक प्रदूषण कम होगा और स्वास्थ्य सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हो सकता है।