एनसीएलटी के अध्यक्ष बने जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल

एनसीएलटी के अध्यक्ष बने जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के अध्यक्ष पद पर जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश रहे ग्रेवाल की यह नियुक्ति लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद को समाप्त करती है और न्यायाधिकरण के नेतृत्व को स्पष्ट दिशा प्रदान करती है।

केंद्र सरकार ने जारी की अधिसूचना

केंद्र ने 29 अप्रैल 2026 को इस नियुक्ति की औपचारिक अधिसूचना जारी की। जस्टिस ग्रेवाल पांच वर्षों की अवधि तक या 67 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, इस पद पर कार्य करेंगे। एनसीएलटी कॉर्पोरेट विवादों, दिवालियापन मामलों और कंपनी कानून से जुड़े मुद्दों के निपटारे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए यह नियुक्ति अत्यंत अहम मानी जा रही है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने याचिका की समाप्ति की

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले से जुड़ी लंबित याचिका को “निरर्थक” बताते हुए समाप्त कर दिया। अदालत ने कहा कि अब जब एक पूर्णकालिक अध्यक्ष की नियुक्ति हो चुकी है, तो अंतरिम व्यवस्था को लेकर विवाद का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इस प्रकार, तकनीकी सदस्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई समाप्त कर दी गई।

कार्यवाहक अध्यक्ष को लेकर विवाद

यह विवाद कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में बचू वेंकट बालाराम दास की नियुक्ति को लेकर उठा था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि सबसे वरिष्ठ सदस्य, चाहे वह किसी भी श्रेणी का हो, उसे नियुक्त किया जाना चाहिए। हालांकि, केंद्र सरकार ने अपने पक्ष में यह कहा कि परंपरागत रूप से सबसे वरिष्ठ न्यायिक सदस्य को ही ऐसे पदों पर नियुक्त किया जाता है।

कानूनी प्रक्रिया की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता, जिन्हें अक्टूबर 2021 में तकनीकी सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया था, ने अपनी वरिष्ठता का दावा किया था। यह मामला पहले उच्च न्यायालय में और फिर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में गया, जिसने अधिकार क्षेत्र न होने के कारण इसे खारिज कर दिया। अंततः मामला फिर से उच्च न्यायालय पहुंचा, जहां नवीन नियुक्ति के बाद इसे समाप्त कर दिया गया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एनसीएलटी एक अर्ध-न्यायिक निकाय है जो कॉर्पोरेट और दिवालियापन मामलों का निपटारा करता है।
  • यह न्यायाधिकरण कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत कार्य करता है।
  • एनसीएलटी के अध्यक्ष आमतौर पर उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश होते हैं।
  • अंतरिम नियुक्तियों में अक्सर परंपराओं का पालन किया जाता है, जब स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं होते।

इस नियुक्ति के साथ एनसीएलटी के नेतृत्व से जुड़ी अनिश्चितता समाप्त हो गई है। इससे न केवल न्यायिक प्रक्रिया में स्थिरता आएगी, बल्कि कॉर्पोरेट मामलों के त्वरित और प्रभावी निपटारे में भी मदद मिलेगी।

Originally written on May 1, 2026 and last modified on May 1, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *