कराईकल में एचएफ रडार से तटीय निगरानी को मिलेगी मजबूती

कराईकल में एचएफ रडार से तटीय निगरानी को मिलेगी मजबूती

राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT) पुडुचेरी के कराईकल क्षेत्र में तटीय निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए उच्च-आवृत्ति (HF) रडार प्रणाली स्थापित करने जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य वास्तविक समय में समुद्री गतिविधियों की निगरानी बढ़ाना, मौसम पूर्वानुमान की सटीकता में सुधार करना और चक्रवात जैसे चरम घटनाओं के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत बनाना है।

कराईकल में रणनीतिक स्थानों का चयन

NIOT ने इस परियोजना के लिए किलिंजलमेडु और अक्केमपेट्टई को चुना है। इन स्थानों का चयन विभिन्न विकल्पों के मूल्यांकन के बाद किया गया है, ताकि सटीक समुद्री आंकड़े प्राप्त किए जा सकें। यह परियोजना भारत के पूर्वी तट पर समुद्री निगरानी ढांचे के विस्तार का हिस्सा है, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर आपदा प्रबंधन क्षमता को बढ़ाया जा सके।

उन्नत तटीय निगरानी क्षमता

प्रस्तावित HF रडार प्रणाली समुद्र की सतह पर बहने वाली धाराओं और तरंगों को 200 किलोमीटर तक मापने में सक्षम होगी। यह प्रणाली धारा की गति, तरंगों के पैटर्न, वायु दबाव और तापमान में बदलाव जैसे महत्वपूर्ण मापदंडों की निगरानी करेगी। साथ ही, यह 80–100 किलोमीटर के दायरे में मौसम संबंधी घटनाओं का पता लगा सकेगी, जिससे मौसम पूर्वानुमान मॉडल अधिक सटीक बनेंगे।

मौजूदा रडार नेटवर्क के साथ एकीकरण

कराईकल में स्थापित होने वाला रडार कड्डलोर स्थित मौजूदा रडार स्टेशन के साथ ‘पेयरिंग मोड’ में कार्य करेगा। इससे तटीय धाराओं के मापन की सटीकता और रिज़ॉल्यूशन में सुधार होगा। यह एकीकृत नेटवर्क वैज्ञानिक अनुसंधान और व्यावहारिक उपयोग के लिए अधिक विश्वसनीय डेटा प्रदान करेगा।

ब्लू इकोनॉमी और तटीय सुरक्षा में योगदान

यह परियोजना पुडुचेरी और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के बीच हुए समझौते के अनुरूप ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने में सहायक होगी। इसके माध्यम से सतत मत्स्य पालन, तटीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन और समुद्री योजना को मजबूती मिलेगी। इस रडार से प्राप्त डेटा भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) जैसी एजेंसियों के साथ साझा किया जाएगा, जिससे तटीय समुदायों को समय पर चेतावनी और सटीक जानकारी मिल सकेगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • हाई-फ्रीक्वेंसी रडार समुद्री सतह की धाराओं और तरंगों की वास्तविक समय में निगरानी के लिए उपयोग किए जाते हैं।
  • NIOT पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
  • HF रडार से प्राप्त डेटा चक्रवात पूर्वानुमान और तटीय चेतावनी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • भारत अपने पूर्वी तट पर तटीय रडार नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रहा है।

कुल मिलाकर, कराईकल में HF रडार की स्थापना भारत की तटीय सुरक्षा और समुद्री अनुसंधान क्षमताओं को नई दिशा देगी। यह पहल न केवल आपदा प्रबंधन को सशक्त बनाएगी, बल्कि ब्लू इकोनॉमी के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

Originally written on May 1, 2026 and last modified on May 1, 2026.

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