सुखोई Su-30MKI बेड़े के लिए आईआईटी बॉम्बे और भारतीय वायुसेना के बीच महत्वपूर्ण समझौता

भारतीय वायुसेना ने 27 मई 2026 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे के साथ तीन महत्वपूर्ण अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य भारतीय वायुसेना के सुखोई Su-30MKI लड़ाकू विमान बेड़े के लिए उन्नत प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस तकनीकों का विकास और उपयोग करना है। यह पहल विमानों की उपलब्धता बढ़ाने, मिशन तैयारियों को मजबूत करने तथा रखरखाव प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Su-30MKI: भारतीय वायुसेना की प्रमुख शक्ति

सुखोई Su-30MKI भारतीय वायुसेना का एक अत्याधुनिक ट्विन-इंजन मल्टीरोल लड़ाकू विमान है। इसे रूस की सुखोई कंपनी द्वारा विकसित किया गया था और भारतीय आवश्यकताओं के अनुसार विशेष रूप से अनुकूलित किया गया है। इसका लाइसेंस उत्पादन भारत में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा किया जाता है। यह विमान वायु श्रेष्ठता, जमीनी हमले, समुद्री अभियानों और लंबी दूरी के मिशनों में सक्षम है। इसकी बहुउद्देशीय क्षमता के कारण इसे भारतीय वायुसेना की रीढ़ माना जाता है।

प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस तकनीक क्या है?

प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस एक आधुनिक तकनीक है जो सेंसर डेटा, डायग्नोस्टिक्स और उन्नत विश्लेषण का उपयोग करके किसी उपकरण की वर्तमान स्थिति का आकलन करती है और संभावित खराबी का पूर्वानुमान लगाती है। इसका उद्देश्य उपकरण के खराब होने से पहले ही आवश्यक रखरखाव सुनिश्चित करना है। इस प्रणाली के अंतर्गत दो प्रमुख अवधारणाएं शामिल हैं:

  • प्रोग्नोस्टिक मेंटेनेंस: इसमें किसी उपकरण या पुर्जे की शेष उपयोगी आयु (Remaining Useful Life) का अनुमान लगाया जाता है।
  • प्रिस्क्रिप्टिव मेंटेनेंस: यह उपलब्ध आंकड़ों और सिस्टम मॉडल के आधार पर उचित रखरखाव उपायों की सिफारिश करती है।

इन तकनीकों के उपयोग से विमानों की अनियोजित खराबियों में कमी आती है और परिचालन दक्षता बढ़ती है।

स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा

इन अनुबंधों के तहत विकसित की जाने वाली तकनीकें आईआईटी बॉम्बे की स्वदेशी विशेषज्ञता पर आधारित हैं। यह सहयोग भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास ढांचे का हिस्सा है, जिसमें शैक्षणिक संस्थान, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और सशस्त्र बल मिलकर कार्य करते हैं। यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के उद्देश्यों को भी मजबूती प्रदान करती है। रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीकों का विकास विदेशी निर्भरता कम करने और रणनीतिक क्षमताओं को सुदृढ़ करने में सहायक है।

समझौते का महत्व

इन परियोजनाओं से Su-30MKI बेड़े की परिचालन उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। समय पर रखरखाव और संभावित तकनीकी समस्याओं की पूर्व पहचान से मिशन सफलता दर में सुधार होगा तथा रखरखाव लागत को भी नियंत्रित किया जा सकेगा। समझौते पर हस्ताक्षर समारोह की देखरेख भारतीय वायुसेना के महानिदेशक (विमान) एयर मार्शल केएए संजीब तथा आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष बी. केदारे ने की। यह सहयोग रक्षा क्षेत्र में उद्योग, अकादमिक जगत और सैन्य संस्थानों के बीच बढ़ती साझेदारी का उदाहरण है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारतीय वायुसेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी।
  • आईआईटी बॉम्बे की स्थापना वर्ष 1958 में हुई थी और यह भारत के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में से एक है।
  • ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का उद्देश्य रणनीतिक क्षेत्रों में भारत की स्वावलंबन क्षमता को बढ़ाना है।
  • प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस तकनीक का उपयोग विमानन, रेलवे, विनिर्माण और विद्युत उत्पादन क्षेत्रों में व्यापक रूप से किया जाता है।

भारतीय वायुसेना और आईआईटी बॉम्बे के बीच हुआ यह सहयोग भारत की रक्षा क्षमताओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस जैसी उन्नत प्रणालियां न केवल लड़ाकू विमानों की कार्यक्षमता बढ़ाएंगी, बल्कि भविष्य में स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी विकास को भी नई गति प्रदान करेंगी।

Originally written on May 29, 2026 and last modified on May 29, 2026.

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