अग्नि-VI और हाइपरसोनिक तकनीक से भारत की रक्षा शक्ति को नई दिशा
भारत की रणनीतिक रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति सामने आई है, जहां रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अग्नि-VI मिसाइल कार्यक्रम पर काम शुरू करने की पूरी तैयारी जताई है। यह कदम औपचारिक सरकारी मंजूरी के बाद भारत की लंबी दूरी की मारक क्षमता और आधुनिक युद्ध तैयारी को नई ऊंचाई पर ले जा सकता है।
अग्नि-VI कार्यक्रम के लिए DRDO की तैयारी
DRDO के अध्यक्ष समीर वी के कामत ने स्पष्ट किया है कि संगठन तकनीकी रूप से अग्नि-VI परियोजना को शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि यह कार्यक्रम अभी सरकार के नीतिगत निर्णय पर निर्भर है। यह संकेत देता है कि भारत के वैज्ञानिक ढांचे में इस उन्नत मिसाइल के विकास के लिए आवश्यक अनुसंधान और तकनीकी क्षमता पहले से मौजूद है।
अग्नि-VI की संभावित उन्नत क्षमताएं
अग्नि-VI मिसाइल अपने पूर्ववर्ती संस्करणों की तुलना में अधिक दूरी और उन्नत तकनीक से लैस होने की उम्मीद है। इसे एक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के रूप में विकसित किया जा सकता है, जिसकी मारक क्षमता 5500 किलोमीटर से अधिक हो सकती है। यह मिसाइल भारत की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत करेगी, खासकर बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में।
हाइपरसोनिक हथियारों में तेज प्रगति
भारत हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन तकनीक पर आधारित लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइल (LR-AShM) का विकास उन्नत चरण में है और इसके परीक्षण जल्द शुरू हो सकते हैं। हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइलें बूस्टर रॉकेट के जरिए प्रारंभिक गति प्राप्त करती हैं और फिर बिना इंजन के ग्लाइड करती हैं, जबकि क्रूज मिसाइलें स्क्रैमजेट इंजन की सहायता से निरंतर गति बनाए रखती हैं।
पारंपरिक मिसाइल बल का विस्तार
रणनीतिक प्रणालियों के साथ-साथ भारत पारंपरिक मिसाइल बल को भी मजबूत करने पर विचार कर रहा है। इसमें 2000 किलोमीटर तक की दूरी वाले शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ क्रूज और हाइपरसोनिक सिस्टम शामिल होंगे। ‘प्रलय’ जैसी शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल जल्द ही सेना में शामिल हो सकती है, जो युद्धक्षेत्र स्तर पर भारत की क्षमता को और सुदृढ़ करेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अग्नि श्रृंखला की मिसाइलें भारत की प्रमुख बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली हैं, जिन्हें DRDO द्वारा विकसित किया गया है।
- हाइपरसोनिक मिसाइलें मैक 5 से अधिक गति से चलती हैं।
- स्क्रैमजेट इंजन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों को निरंतर गति प्रदान करता है।
- ICBM की रेंज सामान्यतः 5500 किलोमीटर से अधिक होती है।
भारत की यह रक्षा प्रगति न केवल उसकी सामरिक ताकत को बढ़ा रही है, बल्कि उसे वैश्विक स्तर पर एक सक्षम और आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।