एनटीए परीक्षा सुधारों पर नंदन नीलेकणी की अगुवाई में नई पहल
सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) की परीक्षा प्रणाली की समीक्षा और उसे अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी तथा तकनीक-सक्षम बनाने के लिए एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स गठित की है। इस समिति की अध्यक्षता इन्फोसिस के सह-संस्थापक और यूआईडीएआई के संस्थापक अध्यक्ष नंदन नीलेकणी करेंगे। यह कदम हाल के समय में परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठी चिंताओं, खासकर अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे मामलों के बाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एनटीए की भूमिका और सुधारों की जरूरत
एनटीए की स्थापना 2017 में शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त परीक्षण संगठन के रूप में की गई थी। यह जेईई और नीट जैसी देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करता है, जिनका असर लाखों विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा प्रवेश पर पड़ता है। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की त्रुटि या संदेह सीधे तौर पर छात्रों के भरोसे को प्रभावित करता है।नई टास्क फोर्स को एनटीए की मौजूदा संरचना, परीक्षा संचालन, तकनीकी सुरक्षा और सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने के उपायों पर सुझाव देने हैं। सरकार का संकेत है कि अब परीक्षा व्यवस्था को केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि तकनीकी और संस्थागत सुधारों के साथ मजबूत किया जाएगा।
कौन-कौन हैं टास्क फोर्स में
यह समिति बहु-विषयक स्वरूप में बनाई गई है, जिसमें प्रशासन, विज्ञान, खुफिया और शिक्षा क्षेत्र के अनुभवी लोग शामिल हैं। इसमें पूर्व इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ, पूर्व खुफिया ब्यूरो निदेशक तपन डेका, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमित लाल मीणा शामिल हैं।नंदन नीलेकणी को डिजिटल गवर्नेंस और बड़े पैमाने की पहचान प्रणाली के संचालन का व्यापक अनुभव है। वे 2009 में स्थापित यूआईडीएआई के संस्थापक अध्यक्ष रहे हैं, जो आधार कार्यक्रम से जुड़ी वैधानिक संस्था है। इसी कारण परीक्षा सुधारों में तकनीक, डेटा सुरक्षा और सिस्टम डिजाइन पर उनके नेतृत्व को अहम माना जा रहा है।
कानूनी ढांचा और आगे की दिशा
परीक्षा सुधारों की यह पहल केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि कानूनी स्तर पर भी जुड़ी हुई है। सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और अन्य अनुचित तरीकों पर रोक के लिए Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 लागू है। इसके तहत सार्वजनिक परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का ढांचा तय किया गया है।सरकार 2026 के लिए प्रस्तावित संशोधन विधेयक के जरिए दंड को और सख्त करने तथा जांच को समयबद्ध बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसी पृष्ठभूमि में टास्क फोर्स से अपेक्षा है कि वह जल्द से जल्द व्यावहारिक सुझाव दे, ताकि आगामी परीक्षाओं में पारदर्शिता और भरोसा दोनों बढ़ सकें।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की स्थापना 2017 में शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था के रूप में हुई थी।
- यूआईडीएआई की स्थापना 2009 में हुई थी और यह आधार कार्यक्रम से जुड़ी वैधानिक संस्था है।
- लोकसभा भारतीय संसद का निचला सदन है और इसके सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं।
- Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक जैसी अनियमितताओं से निपटने के लिए बनाया गया है।
इस टास्क फोर्स की सिफारिशें आने वाले समय में भारत की परीक्षा प्रणाली को अधिक भरोसेमंद और तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाने की दिशा तय कर सकती हैं।