एनएफएचएस-6 में मध्य प्रदेश में बाल कुपोषण की गंभीर स्थिति उजागर

एनएफएचएस-6 में मध्य प्रदेश में बाल कुपोषण की गंभीर स्थिति उजागर

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस-6) 2023-24 की रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश में बाल कुपोषण की चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है। सर्वेक्षण के अनुसार राज्य में बच्चों में कुपोषण के कई प्रमुख संकेतकों की स्थिति राष्ट्रीय औसत से भी खराब है। विशेष रूप से ‘वेस्टिंग’ यानी लंबाई के अनुपात में कम वजन वाले बच्चों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे मध्य प्रदेश इस श्रेणी में देश में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है। एनएफएचएस भारत में स्वास्थ्य, पोषण और जनसंख्या संबंधी संकेतकों का आकलन करने वाला एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सर्वेक्षण है, जिसके आंकड़ों का उपयोग नीति निर्माण और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए किया जाता है।

वेस्टिंग के मामले में देश में सबसे आगे

वेस्टिंग (Wasting) का अर्थ है बच्चे का उसकी लंबाई के अनुपात में कम वजन होना। यह तीव्र कुपोषण (Acute Malnutrition) का प्रमुख संकेतक माना जाता है। एनएफएचएस-6 के अनुसार मध्य प्रदेश में वेस्टिंग की दर बढ़कर 23.8 प्रतिशत हो गई है, जबकि एनएफएचएस-5 में यह 18.9 प्रतिशत थी। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत 19 प्रतिशत से काफी अधिक है। इस वृद्धि के साथ मध्य प्रदेश इस संकेतक में देश का सबसे प्रभावित राज्य बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार वेस्टिंग में वृद्धि बच्चों के स्वास्थ्य, भोजन की उपलब्धता और संक्रमण संबंधी समस्याओं की ओर संकेत करती है।

अंडरवेट और स्टंटिंग की स्थिति

अंडरवेट (Underweight) का अर्थ है उम्र के अनुसार कम वजन होना, जबकि स्टंटिंग (Stunting) उम्र के अनुसार कम लंबाई को दर्शाता है। मध्य प्रदेश में अंडरवेट बच्चों की संख्या 39.7 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो पिछले सर्वेक्षण में 33 प्रतिशत थी। इस श्रेणी में राज्य देश में दूसरे स्थान पर है। झारखंड 41.1 प्रतिशत अंडरवेट बच्चों के साथ पहले स्थान पर है। हालांकि स्टंटिंग के मामले में कुछ सुधार देखने को मिला है। एनएफएचएस-5 में जहां यह दर 35.7 प्रतिशत थी, वहीं एनएफएचएस-6 में यह घटकर 31.4 प्रतिशत रह गई है। इसके बावजूद यह स्तर अभी भी गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।

शिशु और बाल आहार संबंधी चुनौतियां

शिशुओं के लिए जन्म के बाद पहले छह महीनों तक केवल स्तनपान कराने की सलाह दी जाती है। इसे एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग कहा जाता है। मध्य प्रदेश में यह दर घटकर 56.4 प्रतिशत रह गई है, जबकि पिछले सर्वेक्षण में यह 74 प्रतिशत थी। यह गिरावट शिशु पोषण के लिए एक गंभीर संकेत मानी जा रही है। इसके अलावा छह से 23 महीने की आयु के बच्चों में केवल 12 प्रतिशत बच्चों को ही न्यूनतम स्वीकार्य आहार (Minimum Acceptable Diet) मिल रहा है। यह दर्शाता है कि अधिकांश बच्चों को उनकी आयु के अनुसार पर्याप्त और संतुलित भोजन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक गंभीर समस्या

सर्वेक्षण के अनुसार ग्रामीण मध्य प्रदेश में स्थिति और अधिक चिंताजनक है। यहां 42 प्रतिशत बच्चे अंडरवेट हैं और लगभग एक-चौथाई बच्चे वेस्टिंग से प्रभावित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण संबंधी जागरूकता और गुणवत्तापूर्ण भोजन की उपलब्धता जैसी चुनौतियां इस समस्या को और बढ़ाती हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एनएफएचएस का पूरा नाम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (National Family Health Survey) है।
  • वेस्टिंग का अर्थ लंबाई के अनुसार कम वजन, अंडरवेट का अर्थ उम्र के अनुसार कम वजन और स्टंटिंग का अर्थ उम्र के अनुसार कम लंबाई होता है।
  • एनएफएचएस-6 में झारखंड ने 41.1 प्रतिशत अंडरवेट बच्चों के साथ देश में पहला स्थान प्राप्त किया है।
  • न्यूनतम स्वीकार्य आहार (Minimum Acceptable Diet) छह से 23 माह के बच्चों के पोषण स्तर को मापने का एक अंतरराष्ट्रीय मानक संकेतक है।

मध्य प्रदेश में बाल कुपोषण की स्थिति यह दर्शाती है कि स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में अभी भी व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है। यद्यपि संस्थागत प्रसव और टीकाकरण कवरेज में सुधार हुआ है, लेकिन बच्चों के पोषण संबंधी संकेतकों में गिरावट चिंता बढ़ाने वाली है। पोषण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन, जागरूकता अभियान और समय पर संसाधनों की उपलब्धता से ही इस चुनौती का समाधान संभव हो सकेगा।

Originally written on June 2, 2026 and last modified on June 2, 2026.

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