एनएफएचएस-6 में बढ़ती मोटापा और मधुमेह की चुनौती उजागर
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस-6) के आंकड़ों ने भारत में बढ़ते मोटापे और उच्च रक्त शर्करा की समस्या को प्रमुखता से सामने रखा है। वर्ष 2023-24 में आयोजित इस सर्वेक्षण को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और मुंबई स्थित International Institute for Population Sciences ने मिलकर संचालित किया। सर्वेक्षण के अनुसार, एनएफएचएस-5 (2019-21) की तुलना में देश में वयस्कों के बीच मोटापा और उच्च रक्त शर्करा के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह स्थिति गैर-संचारी रोगों के बढ़ते खतरे की ओर संकेत करती है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण क्या है?
National Family Health Survey भारत का एक व्यापक घरेलू सर्वेक्षण है, जो स्वास्थ्य और जनसंख्या से जुड़े विभिन्न संकेतकों का आकलन करता है। इसके अंतर्गत प्रजनन दर, मृत्यु दर, पोषण, एनीमिया, परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा गैर-संचारी रोगों से संबंधित आंकड़े एकत्र किए जाते हैं। एनएफएचएस-6 में मोटापा, रक्त शर्करा स्तर और अन्य स्वास्थ्य मानकों से जुड़े आंकड़ों को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में दर्ज किया गया, जिससे देश की स्वास्थ्य स्थिति का विस्तृत चित्र सामने आया।
वयस्कों में बढ़ता मोटापा
सर्वेक्षण के अनुसार 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में मोटापे की दर एनएफएचएस-5 के 24 प्रतिशत से बढ़कर 30.7 प्रतिशत हो गई है। इसी आयु वर्ग के पुरुषों में यह दर 22.9 प्रतिशत से बढ़कर 27.3 प्रतिशत तक पहुंच गई। शहरी क्षेत्रों में मोटापे की समस्या ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक गंभीर पाई गई। वर्ष 2023-24 में शहरी महिलाओं में 42.8 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में थीं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 25.5 प्रतिशत दर्ज किया गया। यह अंतर जीवनशैली, खान-पान और शारीरिक गतिविधियों में बदलाव को दर्शाता है।
उच्च रक्त शर्करा और मधुमेह के बढ़ते मामले
एनएफएचएस-6 के अनुसार 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं में उच्च रक्त शर्करा अथवा रक्त शर्करा नियंत्रित करने वाली दवाओं के उपयोग की दर 13.5 प्रतिशत से बढ़कर 17.8 प्रतिशत हो गई है। पुरुषों में यह वृद्धि और अधिक रही, जहां यह आंकड़ा 15.6 प्रतिशत से बढ़कर 20.9 प्रतिशत तक पहुंच गया। राज्यों के स्तर पर Kerala में मधुमेह की सर्वाधिक व्यापकता दर्ज की गई, जहां पुरुषों में 31.9 प्रतिशत और महिलाओं में 28.9 प्रतिशत की दर पाई गई। महिलाओं में मोटापे की दृष्टि से Puducherry शीर्ष पर रहा, जहां 46.3 प्रतिशत महिलाएं मोटापे से प्रभावित थीं। इसके बाद Chandigarh में 44 प्रतिशत और Delhi में 41.4 प्रतिशत का आंकड़ा दर्ज किया गया।
गैर-संचारी रोगों की बढ़ती चुनौती
मोटापा और मधुमेह दोनों को गैर-संचारी रोगों की श्रेणी में रखा जाता है। भारत वर्तमान में दोहरी स्वास्थ्य चुनौती का सामना कर रहा है, जहां एक ओर कुपोषण की समस्या बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर मोटापा और मधुमेह जैसे रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का बढ़ता उपयोग, अत्यधिक नमक और चीनी का सेवन, तनावपूर्ण जीवनशैली, अपर्याप्त नींद और बढ़ती आयु जैसी परिस्थितियां इन रोगों के प्रमुख जोखिम कारक हैं। दक्षिणी राज्यों में एनएफएचएस-6 के कई संकेतकों में अधिक वजन, मोटापा और मधुमेह की उच्च दर दर्ज की गई है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आयोजित किया जाता है।
- एनएफएचएस-6 वर्ष 2023-24 में संचालित सर्वेक्षण का छठा संस्करण है।
- मोटापा और मधुमेह दोनों गैर-संचारी रोगों की श्रेणी में आते हैं।
- इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज, मुंबई सर्वेक्षण को तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
- भारत में कुपोषण और गैर-संचारी रोगों की एक साथ मौजूदगी को “डबल बर्डन ऑफ डिजीज” कहा जाता है।
एनएफएचएस-6 के निष्कर्ष भारत में बदलती स्वास्थ्य चुनौतियों की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। मोटापा और मधुमेह जैसी गैर-संचारी बीमारियों में वृद्धि यह संकेत देती है कि स्वास्थ्य जागरूकता, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय पर जांच को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक हो गया है। भविष्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण में यह सर्वेक्षण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।