उत्तर प्रदेश में देश की पहली एकीकृत लिथियम-आयन बैटरी रीसाइक्लिंग सुविधा शुरू
उत्तर प्रदेश के सिकंदराबाद स्थित यूपीएसआईडीसी औद्योगिक क्षेत्र में भारत की पहली एकीकृत लिथियम-आयन बैटरी और रेयर अर्थ मैग्नेट रीसाइक्लिंग सुविधा स्थापित की गई है। रॉकलिंक इंडिया द्वारा विकसित यह संयंत्र देश में महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू पुनर्प्राप्ति को मजबूत करने और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह परियोजना भारत की आयात निर्भरता कम करने और टिकाऊ औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
महत्वपूर्ण सामग्रियों के लिए एकीकृत रीसाइक्लिंग
यह सुविधा लिथियम-आयन बैटरियों, रेयर अर्थ मैग्नेट और धातु युक्त औद्योगिक अपशिष्ट को संसाधित करने के लिए तैयार की गई है। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों और उन्नत विनिर्माण उद्योगों में उपयोग होने वाली सामग्रियों के लिए एक सर्कुलर सप्लाई चेन विकसित करना है।
इससे उपयोग की जा चुकी बैटरियों और औद्योगिक कचरे से मूल्यवान धातुओं को दोबारा प्राप्त किया जा सकेगा, जिससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम होगा और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
प्रसंस्करण क्षमता और रेयर अर्थ रिकवरी
इस संयंत्र की प्रारंभिक लिथियम-आयन बैटरी रीसाइक्लिंग क्षमता 10,000 टन प्रति वर्ष निर्धारित की गई है। इसके अलावा यह हर महीने 60 टन रेयर अर्थ मैग्नेट का प्रसंस्करण भी कर सकता है।
साथ ही 1,500 टन वार्षिक क्षमता वाली रेयर-अर्थ क्लोराइड प्रसंस्करण इकाई भी वर्ष 2026 में चालू होने की योजना है। इससे भारत को महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी, जो इलेक्ट्रिक वाहन और पवन ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
उन्नत रिकवरी तकनीक और ईपीआर अनुपालन
यह सुविधा विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) मानकों के तहत पंजीकृत है और 95 प्रकार के बैटरी स्क्रैप को संभाल सकती है, जिनमें प्री-कंज्यूमर और पोस्ट-कंज्यूमर दोनों प्रकार के अपशिष्ट शामिल हैं।
इसकी इन-हाउस R2 रीसाइक्लिंग प्रक्रिया एल्यूमीनियम, तांबा और लोहे जैसी धातुओं की 98 प्रतिशत से अधिक रिकवरी सुनिश्चित करती है। साथ ही खतरनाक उत्सर्जन का सुरक्षित प्रबंधन भी किया जाता है, जिससे पर्यावरणीय जोखिम कम होता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) के तहत उत्पादकों को अपने उत्पादों से उत्पन्न कचरे के प्रबंधन की जिम्मेदारी दी जाती है।
- NdFeB जैसे रेयर अर्थ मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहन मोटर और पवन टरबाइन में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं।
- ब्लैक मास उपयोग की गई लिथियम-आयन बैटरियों से प्राप्त वह पदार्थ है जिसमें लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसी मूल्यवान धातुएं होती हैं।
- क्रिटिकल मिनरल्स स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों और रणनीतिक विनिर्माण क्षेत्रों के लिए अत्यंत आवश्यक माने जाते हैं।
यह सुविधा बैटरी रिफर्बिशमेंट को भी समर्थन देगी, जिसमें उपयोग योग्य सेल्स की जांच कर उन्हें दोबारा इस्तेमाल किया जाएगा। इससे बैटरियों का जीवनकाल बढ़ेगा और अपशिष्ट कम होगा। NdFeB, SmCo और AlNiCo जैसे मैग्नेट्स के लिए समर्पित रीसाइक्लिंग प्रणाली सामग्री की ट्रेसबिलिटी को बेहतर बनाएगी। यह परियोजना भारत को आत्मनिर्भर और टिकाऊ क्रिटिकल मिनरल्स इकोसिस्टम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।