उत्तर प्रदेश बनेगा डीप-टेक राजधानी, एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी पर बड़ा फोकस
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को देश की डीप-टेक राजधानी बनाने की दिशा में बड़ा विजन पेश किया है। इस योजना के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, ड्रोन तकनीक, ग्रीन हाइड्रोजन, साइबर सुरक्षा और मेडिकल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। राज्य सरकार ने इसे आत्मनिर्भर भारत की सोच और “इनोवेट इन यूपी, स्केल फॉर द वर्ल्ड” के लक्ष्य से जोड़ा है।
क्या है डीप-टेक तकनीक
डीप-टेक उन तकनीकों को कहा जाता है जो उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान, इंजीनियरिंग और लंबे विकास चक्र पर आधारित होती हैं। इन तकनीकों में उच्च स्तर का शोध और नवाचार शामिल होता है। उत्तर प्रदेश ने जिन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है उनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, ड्रोन तकनीक, मेडिकल टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा और ग्रीन हाइड्रोजन प्रमुख हैं। सरकार का उद्देश्य इन क्षेत्रों में अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप्स और उद्योगों को एक मंच पर लाना है।
आईआईटी कानपुर की अहम भूमिका
आईआईटी कानपुर को राज्य के तकनीकी विकास का प्रमुख केंद्र माना जा रहा है। संस्थान का गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी मेड-टेक समाधान विकसित कर रहा है और इसके नवंबर 2026 से शुरू होने की संभावना है। राज्य सरकार की योजना के अनुसार अनुसंधान कार्य आईआईटी कानपुर में होगा, जबकि तकनीक का विस्तार और औद्योगिक उपयोग नोएडा से किया जाएगा। इसी उद्देश्य से नोएडा में “यूपी डीप-टेक हब” स्थापित करने की योजना बनाई गई है।
साइबर सुरक्षा और तकनीकी अनुसंधान
उत्तर प्रदेश सरकार साइबर सुरक्षा क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर काम कर रही है। इसके लिए “साइबर सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी ट्रांसलेशन रिसर्च पार्क” की स्थापना की जा रही है। ऐसे रिसर्च पार्क भारत में तकनीकी हस्तांतरण, प्रोटोटाइप निर्माण और उद्योगों के साथ सहयोग के लिए उपयोग किए जाते हैं। इससे साइबर सुरक्षा से जुड़ी नई तकनीकों के विकास और व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
ग्रीन हाइड्रोजन और आयुर्वेद पर फोकस
राज्य सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना बनाई है। इसमें उत्पादन, भंडारण, सुरक्षा मानक और औद्योगिक उपयोग जैसे क्षेत्रों पर काम किया जाएगा। इसके अलावा आयुर्वेदिक दवाओं के वैज्ञानिक परीक्षण और वैश्विक मान्यता के लिए एक विशेष संस्थागत केंद्र स्थापित करने पर भी चर्चा की गई है। क्लिनिकल वैलिडेशन के माध्यम से आयुर्वेदिक उपचारों की वैज्ञानिक जांच की जाएगी।
युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण
सरकार ने “रोबोटिक्स एंड एआई मिशन” और “टेक युवा-समर्थ युवा” योजना भी शुरू की है। इन योजनाओं का उद्देश्य युवाओं को रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षण देना है। इससे राज्य में तकनीकी कौशल वाले युवाओं की संख्या बढ़ेगी और स्टार्टअप संस्कृति को भी मजबूती मिलेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस भारत में हर वर्ष 11 मई को मनाया जाता है।
- नोएडा को उत्तर प्रदेश का प्रस्तावित डीप-टेक हब बनाया जा रहा है।
- आईआईटी कानपुर उत्तर प्रदेश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में से एक है।
- ग्रीन हाइड्रोजन पानी और बिजली से इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया द्वारा तैयार किया जाता है।
उत्तर प्रदेश की यह डीप-टेक रणनीति राज्य को तकनीकी नवाचार और उन्नत अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहचान दिला सकती है। इससे रोजगार, स्टार्टअप और औद्योगिक विकास को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।