उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति 2026: एआई और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा नया विस्तार
उत्तर प्रदेश सरकार ने 6 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में डेटा सेंटर नीति, 2026 को मंजूरी दे दी। यह नई नीति वर्ष 2021 की डेटा सेंटर नीति का स्थान लेगी, जिसकी अवधि 27 जनवरी 2026 को समाप्त हो गई थी। नई नीति का उद्देश्य राज्य को देश के प्रमुख डिजिटल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित करना है। इसके साथ ही हरित एवं ऊर्जा-कुशल डेटा सेंटरों को बढ़ावा देकर बड़े निवेश और रोजगार के अवसर सृजित करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
डेटा सेंटर और एआई-रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
डेटा सेंटर ऐसे आधुनिक केंद्र होते हैं, जहां सर्वर, स्टोरेज सिस्टम और नेटवर्क उपकरणों के माध्यम से डिजिटल डेटा का संग्रहण, प्रसंस्करण और वितरण किया जाता है। नई नीति में विशेष रूप से एआई-रेडी डेटा सेंटर विकसित करने पर बल दिया गया है, जिनमें जीपीयू आधारित उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। साथ ही ऊर्जा दक्षता, हरित तकनीकों और टिकाऊ संचालन को भी प्राथमिकता दी गई है। सरकार का लक्ष्य राज्य में 2 गीगावाट से अधिक अतिरिक्त डेटा सेंटर क्षमता विकसित करना है।
निवेश और प्रोत्साहन की प्रमुख विशेषताएं
उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति 2026 के तहत 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने कई वित्तीय प्रोत्साहनों की घोषणा की है। इनमें पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, भूमि संबंधी रियायतें, स्टाम्प शुल्क में छूट, बिजली शुल्क में राहत तथा बुनियादी ढांचे से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा टियर-3 और टियर-4 डेटा सेंटरों के लिए विशेष प्रोत्साहन, एआई कंप्यूट बूस्टर प्रोत्साहन तथा हरित एवं टिकाऊ संचालन को बढ़ावा देने हेतु अतिरिक्त लाभ भी प्रदान किए जाएंगे। इससे छोटे शहरों और उभरते औद्योगिक क्षेत्रों में भी निवेश को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
पिछली नीति की उपलब्धियां और नई दिशा
वर्ष 2021 की डेटा सेंटर नीति के तहत उत्तर प्रदेश में लगभग 21,343 करोड़ रुपये के निवेश वाले कई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी। इन परियोजनाओं की कुल क्षमता 644 मेगावाट रही और वर्ष 2026 तक सात परियोजनाएं संचालन शुरू कर चुकी थीं। नई नीति का उद्देश्य इन उपलब्धियों को आगे बढ़ाते हुए राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर डेटा सेंटर निवेश का प्रमुख केंद्र बनाना है।
क्षेत्रीय विकास और रोजगार सृजन
नई नीति में बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्रों के लिए विशेष प्रोत्साहनों का प्रावधान किया गया है, जिससे इन क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को गति मिल सके। सरकार के अनुसार इस नीति से लगभग 7,500 स्थायी प्रत्यक्ष रोजगार तथा निर्माण अवधि के दौरान करीब 50,000 अल्पकालिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे क्षेत्रीय संतुलित विकास के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की दिशा में कदम
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। डेटा सेंटर नीति 2026 इसी व्यापक आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। डिजिटल अवसंरचना के विस्तार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों को बढ़ावा, औद्योगिक निवेश और क्षेत्रीय विकास के माध्यम से यह नीति राज्य की आर्थिक प्रगति को नई गति देने का प्रयास करेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जीपीयू (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) का उपयोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग में व्यापक रूप से किया जाता है।
- टियर-3 और टियर-4 डेटा सेंटर बड़े उद्योगों, क्लाउड सेवाओं और मिशन-क्रिटिकल डिजिटल सेवाओं के लिए उच्च विश्वसनीयता प्रदान करते हैं।
- स्टाम्प शुल्क और बिजली शुल्क में छूट औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्यों द्वारा दी जाने वाली प्रमुख वित्तीय रियायतों में शामिल हैं।
- उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ है और यह जनसंख्या की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य है।
उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति 2026 राज्य को डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीकी अवसंरचना के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि नीति के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो यह न केवल बड़े निवेश आकर्षित करेगी बल्कि रोजगार सृजन, क्षेत्रीय विकास और राज्य की एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने की महत्वाकांक्षा को भी मजबूत आधार प्रदान करेगी।