इसरो के सेमी-क्रायोजेनिक इंजन ने परीक्षण में हासिल की बड़ी सफलता
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 24 जून 2026 को अपने सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के पावर हेड का सफल हॉट टेस्ट कर अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। यह परीक्षण तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में किया गया। परीक्षण के दौरान इंजन ने 175 टन का थ्रस्ट उत्पन्न किया, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 88 प्रतिशत था। यह पावर हेड टेस्ट आर्टिकल श्रृंखला का आठवां हॉट टेस्ट था और भविष्य के भारी प्रक्षेपण यानों के विकास की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
सेमी-क्रायोजेनिक प्रोपल्शन स्टेज की विशेषताएं
इसरो द्वारा विकसित किया जा रहा सेमी-क्रायोजेनिक प्रोपल्शन स्टेज एससी120 (SC120) नाम से जाना जाता है। इसमें एसई2000 (SE2000) इंजन का उपयोग किया जाएगा, जिसकी क्षमता 2,000 किलोन्यूटन थ्रस्ट उत्पन्न करने की है। इस नए प्रोपल्शन स्टेज का उद्देश्य एलवीएम3 प्रक्षेपण यान के मौजूदा एल110 कोर स्टेज का स्थान लेना है। इसके सफल संचालन से भारत की भारी उपग्रह प्रक्षेपण क्षमता और अधिक मजबूत होगी।
प्रोपेलेंट और भविष्य की उपयोगिता
सेमी-क्रायोजेनिक इंजन में तरल ऑक्सीजन और केरोसीन का उपयोग प्रोपेलेंट के रूप में किया जाता है। यह संयोजन उच्च दक्षता, बेहतर प्रदर्शन तथा अपेक्षाकृत कम लागत के कारण आधुनिक रॉकेट प्रोपल्शन प्रणालियों में महत्वपूर्ण माना जाता है। इस तकनीक के माध्यम से प्रक्षेपण यान की वहन क्षमता बढ़ाने और मिशनों को अधिक किफायती बनाने की दिशा में सहायता मिलेगी।
वर्ष 2026 में इसरो के अन्य महत्वपूर्ण इंजन परीक्षण
वर्ष 2026 इसरो के लिए इंजन विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहा है। मार्च 2026 में इसरो ने सीई20 क्रायोजेनिक इंजन का समुद्र-स्तरीय हॉट टेस्ट 22 टन थ्रस्ट पर सफलतापूर्वक किया। इसके अलावा 9 मई 2026 को एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग तकनीक से विकसित पुनः डिज़ाइन किए गए पीएस4 इंजन का भी सफल परीक्षण महेंद्रगिरि स्थित प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में किया गया। इन परीक्षणों से स्पष्ट है कि इसरो आधुनिक निर्माण तकनीकों और उन्नत इंजन प्रणालियों पर लगातार कार्य कर रहा है।
भविष्य की योजनाएं
इसरो का लक्ष्य उन्नत एलवीएम3 प्रक्षेपण यान को लगभग वर्ष 2027 तक परिचालन में लाना है। इसके लिए सेमी-क्रायोजेनिक इंजन का पूर्ण क्षमता वाला 200 टन थ्रस्ट प्रदर्शन परीक्षण अगला महत्वपूर्ण चरण होगा। इस परीक्षण की सफलता भारत की अंतरिक्ष प्रक्षेपण क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एलवीएम3 भारत का हेवी-लिफ्ट प्रक्षेपण यान है, जिसका उपयोग बड़े उपग्रहों और गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए किया जाता है।
- तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में रॉकेट इंजनों और प्रोपल्शन प्रणालियों का परीक्षण किया जाता है।
- एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग एक ऐसी निर्माण तकनीक है जिसमें डिजिटल डिज़ाइन के आधार पर वस्तुओं को परत-दर-परत तैयार किया जाता है।
- सेमी-क्रायोजेनिक इंजन में तरल ऑक्सीजन और केरोसीन का उपयोग किया जाता है, जो उच्च दक्षता वाले रॉकेट प्रोपेलेंट संयोजनों में शामिल हैं।
सेमी-क्रायोजेनिक इंजन का यह सफल परीक्षण भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे भविष्य में एलवीएम3 की क्षमता बढ़ेगी, प्रक्षेपण अधिक प्रभावी और किफायती होंगे तथा भारत वैश्विक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को और मजबूत कर सकेगा।