जर्मनी की लाकर झील के नीचे मिला विशाल मैग्मा भंडार, वैज्ञानिकों ने तैयार की पहली त्रि-आयामी तस्वीर

जर्मनी की लाकर झील के नीचे मिला विशाल मैग्मा भंडार, वैज्ञानिकों ने तैयार की पहली त्रि-आयामी तस्वीर

जर्मनी के पश्चिमी भाग में स्थित लाकर झील (Laacher See) के नीचे मौजूद मैग्मा भंडार का पहली बार उच्च-रिज़ॉल्यूशन त्रि-आयामी (3D) मानचित्र तैयार किया गया है। जर्मन वैज्ञानिकों ने पैसिव सिस्मोलॉजी, सूक्ष्म भूकंपों (Microearthquakes) के आंकड़ों और फाइबर-ऑप्टिक सेंसिंग तकनीक का उपयोग करके झील के नीचे स्थित मैग्मा संरचना का विस्तृत अध्ययन किया। यह शोध जर्मनी के आइफेल ज्वालामुखीय क्षेत्र की भूगर्भीय सक्रियता को समझने और भविष्य में ज्वालामुखीय गतिविधियों की बेहतर निगरानी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लाकर झील और आइफेल ज्वालामुखीय क्षेत्र

लाकर झील, जिसे लाखर सी (Laacher See) भी कहा जाता है, पश्चिमी जर्मनी के आइफेल ज्वालामुखीय क्षेत्र में स्थित एक ज्वालामुखीय झील है। यह क्षेत्र ईस्ट आइफेल वोल्केनिक फील्ड का हिस्सा है और यहाँ चतुर्थकालीन (Quaternary) ज्वालामुखीय संरचनाएँ पाई जाती हैं। हालाँकि इस क्षेत्र में लंबे समय से कोई बड़ा ज्वालामुखीय विस्फोट नहीं हुआ है, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी भूमिगत संरचना आज भी तापीय और यांत्रिक रूप से सक्रिय बनी हुई है, जिससे यह भूवैज्ञानिक अनुसंधान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

आइफेल लार्ज-एन प्रयोग

सितंबर 2022 से अगस्त 2023 के बीच जीएफजेड जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज़ और पॉट्सडैम विश्वविद्यालय ने संयुक्त रूप से आइफेल लार्ज-एन प्रयोग संचालित किया। इस परियोजना के अंतर्गत 494 से अधिक भूकंपीय स्टेशन तथा 64 किलोमीटर लंबी फाइबर-ऑप्टिक केबल का उपयोग किया गया। यह मध्य यूरोप में अब तक का सबसे बड़ा पैसिव सिस्मोलॉजी अभियान माना जाता है। इस तकनीक से प्राकृतिक भूकंपीय तरंगों का विश्लेषण कर भूमिगत संरचनाओं का अध्ययन किया गया।

मैग्मा भंडार की त्रि-आयामी तस्वीर

शोधकर्ताओं ने सितंबर 2025 तक लाकर झील के नीचे स्थित मैग्मा भंडार की पहली उच्च-रिज़ॉल्यूशन 3डी तस्वीर तैयार की। इसके बाद दिसंबर 2025 में उन्होंने लगभग 2 से 10 किलोमीटर की गहराई तक फैली हुई एक झुकी हुई मैग्माई संरचना की पहचान की। वैज्ञानिकों के अनुसार इस मैग्मा भंडार का अनुमानित आयतन लगभग 75 घन किलोमीटर है और यह लगभग 53 डिग्री के कोण पर दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर झुका हुआ है। यह खोज इस क्षेत्र की ज्वालामुखीय संरचना को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

सूक्ष्म भूकंप और ज्वालामुखीय निगरानी

अध्ययन के दौरान एक वर्ष में 1,000 से अधिक सूक्ष्म भूकंप दर्ज किए गए, जिनमें से अधिकांश 10 से 16 किलोमीटर की गहराई पर आए। अक्टूबर 2025 में लाकर झील के पश्चिमी ढलान के नीचे 92 सूक्ष्म भूकंप रिकॉर्ड किए गए, जबकि वर्ष 2026 की शुरुआत से ईस्ट आइफेल ज्वालामुखीय क्षेत्र में 83 छोटे भूकंप दर्ज किए गए, जिनकी तीव्रता 1.5 तक रही। वैज्ञानिकों ने निचली भू-पर्पटी में एक सक्रिय ज्वालामुखीय चैनल की भी पहचान की है, जहाँ वर्ष 2013 से लगातार निम्न-आवृत्ति वाले ज्वालामुखीय भूकंप दर्ज किए जा रहे हैं। इन गतिविधियों से संकेत मिलता है कि भूमिगत मैग्मा प्रणाली में द्रवों का प्रवाह और दबाव अभी भी सक्रिय है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • लाकर झील (Laacher See) पश्चिमी जर्मनी के आइफेल ज्वालामुखीय क्षेत्र में स्थित एक ज्वालामुखीय झील है।
  • पैसिव सिस्मोलॉजी में प्राकृतिक भूकंपीय तरंगों का अध्ययन किया जाता है, इसमें कृत्रिम विस्फोटों का उपयोग नहीं होता।
  • सूक्ष्म भूकंप (Microearthquakes) ज्वालामुखीय और विवर्तनिक गतिविधियों के अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • फाइबर-ऑप्टिक केबल का उपयोग डिस्ट्रिब्यूटेड एकॉस्टिक सेंसर (DAS) के रूप में भू-भौतिकीय सर्वेक्षणों में किया जा सकता है।

लाकर झील के नीचे मैग्मा भंडार की त्रि-आयामी तस्वीर तैयार होना ज्वालामुखी विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि है। यह शोध न केवल भूमिगत मैग्मा प्रणाली की संरचना को बेहतर ढंग से समझने में सहायता करेगा, बल्कि भविष्य में संभावित ज्वालामुखीय गतिविधियों की निगरानी और प्राकृतिक आपदा प्रबंधन के लिए भी उपयोगी साबित होगा।

Originally written on June 27, 2026 and last modified on June 27, 2026.

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