इलेक्ट्रिक सीप्लेन पर पवन हंस की नई पहल

इलेक्ट्रिक सीप्लेन पर पवन हंस की नई पहल

भारत में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को अधिक टिकाऊ और आधुनिक बनाने की दिशा में पवन हंस लिमिटेड ने नॉर्वे की नोएमी एयरोस्पेस के साथ एक गैर-बाध्यकारी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। 5 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में हुए इस समझौते का उद्देश्य इलेक्ट्रिक सीप्लेन तकनीक और अन्य सस्टेनेबल एविएशन समाधानों की संभावनाओं का अध्ययन करना है।

समझौते का मकसद और साझेदारी की दिशा

यह समझौता पूरी तरह अन्वेषणात्मक है, यानी इससे किसी तरह की वित्तीय प्रतिबद्धता, खरीद बाध्यता, निवेश का वादा या विशेष अधिकार नहीं बनते। फिर भी यह भारत में सीप्लेन आधारित हवाई सेवाओं की संभावनाओं को परखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। समझौते पर पवन हंस के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सुनील कुमार नागडवने और नोएमी एयरोस्पेस के सीईओ एरिक फ्रांस्वा लिथुन ने हस्ताक्षर किए।इस अवसर पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु और नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा भी मौजूद रहे। इससे संकेत मिलता है कि सरकार भी ऐसे नवाचारों को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और हरित विमानन के व्यापक एजेंडे से जोड़कर देख रही है।

इलेक्ट्रिक सीप्लेन क्यों अहम हैं

इलेक्ट्रिक सीप्लेन ऐसे विमान होते हैं जो पानी से उड़ान भरते और पानी पर ही उतरते हैं, और इनमें इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणाली का उपयोग होता है। इनका उपयोग छोटे दूरी के क्षेत्रीय मार्गों, जल-आधारित संचालन और कम उत्सर्जन वाले विमानन अनुसंधान में किया जा सकता है। भारत जैसे देश में, जहां कई तटीय क्षेत्र, द्वीप और जलमार्ग हैं, यह तकनीक भविष्य में परिवहन के नए विकल्प खोल सकती है।नोएमी एयरोस्पेस, जिसका मुख्यालय नॉर्वे के बर्गेन में है, नौ यात्रियों वाले इलेक्ट्रिक सीप्लेन पर काम कर रही है। कंपनी को उड़ान परीक्षण के लिए इनोवेशन नॉर्वे से 30 मिलियन नॉर्वेजियन क्रोनर, यानी लगभग 3 मिलियन यूरो की सहायता मिली है। कंपनी का लक्ष्य 2027 के अंत तक पहली उड़ान और 2030 तक वाणिज्यिक सेवा शुरू करना है।

भारत के लिए नीति और निर्माण का संदर्भ

भारत सरकार सीप्लेन विकास को मेक इन इंडिया और स्वदेशी निर्माण से जोड़कर देख रही है। इसी क्रम में 2026 के केंद्रीय बजट में घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन और सीप्लेन संचालन के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग जैसी व्यवस्था का उल्लेख किया गया था। ऐसे कदमों का उद्देश्य शुरुआती लागत और संचालन संबंधी चुनौतियों को कम करना है, ताकि नई तकनीकें व्यावहारिक रूप से अपनाई जा सकें।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • पवन हंस लिमिटेड भारत की सरकारी स्वामित्व वाली हेलीकॉप्टर ऑपरेटर कंपनी है।
  • नोएमी एयरोस्पेस पहले एलफ्लाई एएस के नाम से जानी जाती थी।
  • यह समझौता गैर-बाध्यकारी है, इसलिए इससे तत्काल खरीद या निवेश की जिम्मेदारी नहीं बनती।
  • कंपनी 2021 से अपने इलेक्ट्रिक सीप्लेन प्रोजेक्ट पर काम कर रही है और मई 2026 तक अपने पहले पूर्ण-स्तरीय प्रोटोटाइप का निर्माण शुरू कर चुकी थी।

यह साझेदारी भारत में हरित विमानन, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और उभरती हुई सीप्लेन तकनीक के बीच तालमेल बनाने की एक शुरुआती कोशिश है। आने वाले वर्षों में इसके परिणाम इस क्षेत्र की व्यावसायिक व्यवहार्यता तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

Originally written on August 6, 2026 and last modified on August 6, 2026.

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