इंडियन पोटाश लिमिटेड और जैन इरिगेशन ने ड्रिप सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए किया समझौता
कृषि में जल संरक्षण और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) और जैन इरिगेशन सिस्टम्स लिमिटेड ने 8 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित इंडियन पोटाश लिमिटेड के कॉर्पोरेट कार्यालय में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत गुजरात में गन्ना खेती के लिए ड्रिप सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा दिया जाएगा। परियोजना में सर्वेक्षण, डिजाइन, उपकरणों की आपूर्ति, स्थापना, किसान प्रशिक्षण और खेतों में प्रदर्शन जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
ड्रिप सिंचाई क्या है?
ड्रिप सिंचाई, जिसे ट्रिकल सिंचाई भी कहा जाता है, सूक्ष्म सिंचाई (माइक्रो इरिगेशन) की एक आधुनिक तकनीक है। इसमें पानी को पाइप, ड्रिपर या माइक्रो-ट्यूब के माध्यम से सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। इससे पानी की बर्बादी कम होती है और पौधों को आवश्यक मात्रा में नमी मिलती है। इस तकनीक का उपयोग गन्ना, फलों के बाग, सब्जियों और अन्य व्यावसायिक फसलों में विशेष रूप से जल-संकट वाले और सिंचित क्षेत्रों में किया जाता है।
फर्टिगेशन और माइक्रो इरिगेशन का महत्व
फर्टिगेशन वह तकनीक है, जिसमें सिंचाई के पानी के साथ उर्वरकों को भी सीधे पौधों तक पहुंचाया जाता है। यह प्रक्रिया सामान्यतः ड्रिप या स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली के माध्यम से की जाती है। माइक्रो इरिगेशन प्रणाली में ड्रिप और स्प्रिंकलर दोनों तकनीकें शामिल होती हैं, जिनका उद्देश्य वाष्पीकरण, सतही बहाव और भूमि के भीतर अत्यधिक जल रिसाव से होने वाली पानी की हानि को कम करना है। इससे जल उपयोग दक्षता बढ़ती है और फसल उत्पादन में सुधार होता है।
समझौते की प्रमुख विशेषताएं
इंडियन पोटाश लिमिटेड देश की प्रमुख उर्वरक और कृषि-इनपुट कंपनियों में से एक है, जबकि जैन इरिगेशन सिस्टम्स लिमिटेड सिंचाई उपकरणों और कृषि समाधान प्रदान करने वाली अग्रणी कंपनी है। इस साझेदारी के तहत किसानों को आधुनिक माइक्रो इरिगेशन प्रणाली अपनाने के लिए क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, तथा पात्र किसानों के लिए ऋण और अनुदान सहायता उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने में सहायता मिलेगी।
कृषि और जैव ईंधन क्षेत्र में महत्व
यह पहल गन्ना उत्पादन, चीनी उद्योग और जैव ईंधन के लिए कच्चे माल की उपलब्धता को मजबूत करने से भी जुड़ी हुई है। गुजरात भारत के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में शामिल है, जहां कई जिलों में सिंचाई आधारित खेती की जाती है। ड्रिप सिंचाई और फर्टिगेशन जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से जल की बचत, उर्वरकों का कुशल उपयोग और फसल की गुणवत्ता में सुधार संभव होता है। यह पहल टिकाऊ कृषि और जल संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ड्रिप सिंचाई को कृषि विज्ञान में ट्रिकल सिंचाई भी कहा जाता है।
- फर्टिगेशन में सिंचाई और उर्वरक के प्रयोग को एक ही प्रणाली के माध्यम से किया जाता है।
- माइक्रो इरिगेशन में मुख्य रूप से ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीकें शामिल होती हैं।
- भारत में जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए माइक्रो इरिगेशन को विभिन्न सरकारी कृषि योजनाओं के तहत प्रोत्साहित किया जाता है।
इंडियन पोटाश लिमिटेड और जैन इरिगेशन सिस्टम्स लिमिटेड के बीच हुआ यह समझौता आधुनिक कृषि, जल संरक्षण और गन्ना उत्पादन को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ड्रिप सिंचाई और फर्टिगेशन जैसी तकनीकों के व्यापक उपयोग से किसानों की लागत कम होगी, उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और देश में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा।