इंटरप्लेनेटरी कोरोनल मास इजेक्शन पर भारतीय अध्ययन: अंतरिक्ष मौसम की समझ में नई प्रगति
सूर्य से निकलने वाले शक्तिशाली विस्फोट पृथ्वी के अंतरिक्ष वातावरण और आधुनिक तकनीकी प्रणालियों को प्रभावित कर सकते हैं। इन्हीं घटनाओं में इंटरप्लेनेटरी कोरोनल मास इजेक्शन (ICMEs) सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। हाल ही में भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए), बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने वर्ष 1995 से 2024 तक के 29 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण कर ICMEs के तापीय व्यवहार का विस्तृत अध्ययन किया। यह शोध सौर चक्र 23, 24 और वर्तमान सौर चक्र 25 के शुरुआती चरण पर आधारित है। अध्ययन के निष्कर्ष 1 जुलाई 2026 को प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका मंथली नोटिसेज ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी में प्रकाशित हुए।
इंटरप्लेनेटरी कोरोनल मास इजेक्शन क्या हैं?
इंटरप्लेनेटरी कोरोनल मास इजेक्शन, कोरोनल मास इजेक्शन (CME) का अंतरग्रहीय रूप हैं। CME सूर्य के कोरोना से निकलने वाले प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र के विशाल विस्फोट होते हैं। जब ये विस्फोट अंतरिक्ष में यात्रा करते हुए पृथ्वी की कक्षा तक पहुंचते हैं, तो इन्हें ICME कहा जाता है। पृथ्वी और सूर्य के बीच की औसत दूरी, जिसे 1 खगोलीय इकाई (1 Astronomical Unit या 1 AU) कहा जाता है, पर इनका चुंबकीय और तापीय स्वरूप अंतरिक्ष यानों द्वारा मापा जा सकता है।
अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष
भारतीय वैज्ञानिकों के अध्ययन में पाया गया कि लगभग 45 प्रतिशत मैग्नेटिक इजेक्टा ने 1 AU पर पहुंचने के बाद भी ताप बढ़ने (हीटिंग) के संकेत दिखाए, विशेषकर सौर गतिविधि के अधिकतम चरण के दौरान। यह निष्कर्ष पहले की उस धारणा को चुनौती देता है, जिसके अनुसार ICMEs केवल अंतरिक्ष में फैलते समय ठंडे होते जाते हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया कि सौर चक्र 23 में हीटिंग जैसी अवस्थाएं अधिक थीं, जबकि सौर चक्र 24 में कूलिंग (शीतलन) की प्रवृत्ति अधिक प्रमुख रही।
अंतरिक्ष मौसम और पृथ्वी पर प्रभाव
ICMEs का तापीय व्यवहार पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव से गहराई से जुड़ा होता है। इनके कारण उत्पन्न भू-चुंबकीय तूफान रेडियो संचार, विमानन मार्ग, उपग्रह संचालन, जीपीएस सेवाओं और विद्युत ग्रिड को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए अंतरिक्ष मौसम (स्पेस वेदर) का पूर्वानुमान लगाने में सूर्य और अंतरग्रहीय अंतरिक्ष के निरंतर अवलोकन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इससे संभावित सौर तूफानों के समय और प्रभाव का बेहतर अनुमान लगाया जा सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- 1 खगोलीय इकाई (1 AU) पृथ्वी और सूर्य के बीच की औसत दूरी है, जो लगभग 14.96 करोड़ किलोमीटर होती है।
- सौर चक्र 23 की शुरुआत वर्ष 1996 में, सौर चक्र 24 की शुरुआत वर्ष 2008 में हुई, जबकि वर्तमान में सौर चक्र 25 चल रहा है।
- कोरोनल मास इजेक्शन पृथ्वी पर आने वाले भू-चुंबकीय तूफानों के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
- मंथली नोटिसेज ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी खगोल विज्ञान की एक प्रतिष्ठित सहकर्मी-समीक्षित वैज्ञानिक पत्रिका है।
भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान का यह दीर्घकालिक अध्ययन अंतरिक्ष मौसम की समझ को और अधिक सटीक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान है। ICMEs के तापीय व्यवहार से जुड़े नए निष्कर्ष भविष्य में सौर तूफानों की बेहतर भविष्यवाणी करने तथा उपग्रह, संचार और ऊर्जा अवसंरचना को सुरक्षित रखने में उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।