माउंट एरेबस: अंटार्कटिका का सोना उगलने वाला सक्रिय ज्वालामुखी

माउंट एरेबस: अंटार्कटिका का सोना उगलने वाला सक्रिय ज्वालामुखी

पृथ्वी पर मौजूद ज्वालामुखियों में माउंट एरेबस अपनी अनूठी विशेषताओं के कारण वैज्ञानिकों और भूगर्भशास्त्रियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। पूर्वी अंटार्कटिका के रॉस द्वीप पर स्थित यह ज्वालामुखी दक्षिणी ध्रुव से लगभग 1,350 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह पृथ्वी का सबसे दक्षिणी सक्रिय ज्वालामुखी माना जाता है और वर्ष 1972 से लगातार सक्रिय बना हुआ है। इसकी सबसे रोचक विशेषता यह है कि यह वातावरण में सूक्ष्म आकार के मौलिक सोने के क्रिस्टल छोड़ता है, जो सैकड़ों किलोमीटर दूर तक हवा के साथ फैल सकते हैं।

माउंट एरेबस का स्थान और विशेषताएँ

माउंट एरेबस अंटार्कटिका के रॉस सागर क्षेत्र में स्थित रॉस द्वीप पर मौजूद है। यह दुनिया के उन चुनिंदा ज्वालामुखियों में शामिल है, जिनमें स्थायी लावा झील पाई जाती है। इसकी निरंतर ज्वालामुखीय गतिविधि इसे वैज्ञानिक अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। लगातार सक्रिय रहने के बावजूद यह अत्यंत दुर्गम क्षेत्र में स्थित है, जिससे इसके अध्ययन और निगरानी का कार्य चुनौतीपूर्ण बना रहता है।

वातावरण में सोने के क्रिस्टलों का उत्सर्जन

माउंट एरेबस प्रतिदिन लगभग 80 ग्राम मौलिक सोने के सूक्ष्म क्रिस्टल वातावरण में छोड़ता है। इनकी अनुमानित कीमत लगभग 6,000 अमेरिकी डॉलर प्रतिदिन तथा लगभग 21.9 लाख अमेरिकी डॉलर प्रतिवर्ष आंकी जाती है। ये क्रिस्टल लगभग 60 माइक्रोमीटर तक के आकार के हो सकते हैं और वायुमंडलीय धाराओं के माध्यम से लगभग 1,000 किलोमीटर तक फैल जाते हैं। हालांकि इनका आर्थिक मूल्य उल्लेखनीय है, लेकिन अत्यंत छोटे आकार और व्यापक फैलाव के कारण इन्हें एकत्र करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

वैज्ञानिक अध्ययन और संभावित सिद्धांत

इस अनोखी घटना का पहला वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण वर्ष 1991 में Geophysical Research Letters में प्रकाशित शोधपत्र में किया गया था। इस अध्ययन में भू-रसायनविद किम्बरली मीकर सहित कई वैज्ञानिक शामिल थे। अब तक वैज्ञानिक सोने के इन सूक्ष्म क्रिस्टलों के निर्माण की एक निश्चित प्रक्रिया की पुष्टि नहीं कर पाए हैं। एक प्रमुख सिद्धांत के अनुसार, क्लोरीन या सल्फर युक्त वाष्पशील यौगिक ठंडे होकर क्रिस्टलों का निर्माण करते हैं। दूसरा सिद्धांत यह बताता है कि ये क्रिस्टल स्थायी लावा झील की सतह पर बनते हैं और बाद में ज्वालामुखीय गैसों तथा वायुमंडलीय धाराओं के साथ दूर-दूर तक फैल जाते हैं। वर्तमान में माउंट एरेबस को ऐसा एकमात्र ज्ञात ज्वालामुखी माना जाता है जो नियमित रूप से मौलिक सोने के क्रिस्टल उत्सर्जित करता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • पृथ्वी का सबसे दक्षिणी सक्रिय ज्वालामुखी माउंट एरेबस है।
  • यह ज्वालामुखी वर्ष 1972 से लगातार सक्रिय बना हुआ है।
  • Geophysical Research Letters भू-विज्ञान से संबंधित शोध प्रकाशित करने वाली एक प्रतिष्ठित सहकर्मी-समीक्षित वैज्ञानिक पत्रिका है।
  • माइक्रोमीटर एक मीटर का दस लाखवाँ (1/10,00,000) भाग होता है।

माउंट एरेबस प्रकृति की उन अद्भुत घटनाओं में से एक है जो वैज्ञानिकों को आज भी नई जानकारियाँ प्रदान कर रही हैं। वातावरण में सोने के सूक्ष्म क्रिस्टलों का उत्सर्जन इसे विश्व के सबसे अनोखे ज्वालामुखियों में स्थान दिलाता है। यद्यपि इन क्रिस्टलों का आर्थिक उपयोग संभव नहीं है, फिर भी यह घटना भू-विज्ञान और ज्वालामुखीय प्रक्रियाओं के अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

Originally written on July 2, 2026 and last modified on July 2, 2026.

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