आरबीआई ने क्वांटम तकनीक पर ‘क्यू-सेफ’ विशेषज्ञ समिति गठित की
Reserve Bank of India ने 25 मई 2026 को वित्तीय क्षेत्र में क्वांटम तकनीक से जुड़े लाभ, जोखिम और चुनौतियों का अध्ययन करने के लिए आठ सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया। इस समिति का नाम “क्वांटम सिक्योर एंड अडैप्टिव फाइनेंशियल इकोसिस्टम” यानी Q-SAFE रखा गया है। समिति का मुख्य उद्देश्य भारत की वित्तीय प्रणाली पर संभावित क्वांटम साइबर खतरों का अध्ययन करना और भविष्य के लिए सुरक्षित डिजिटल ढांचा तैयार करना है। क्वांटम कंप्यूटिंग के तेजी से विकास को देखते हुए इसे बैंकिंग और डिजिटल भुगतान प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
वित्तीय क्षेत्र में क्वांटम तकनीक क्या है?
क्वांटम तकनीक क्वांटम मैकेनिक्स के सिद्धांतों जैसे सुपरपोजिशन और एंटैंगलमेंट पर आधारित होती है। पारंपरिक कंप्यूटरों के विपरीत क्वांटम कंप्यूटर “क्यूबिट” का उपयोग करते हैं, जो एक समय में कई अवस्थाओं का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। वित्तीय क्षेत्र में क्वांटम तकनीक का उपयोग पोर्टफोलियो ऑप्टिमाइजेशन, जोखिम मूल्यांकन और व्यापक आर्थिक मॉडलिंग में किया जा सकता है। हालांकि, यह मौजूदा क्रिप्टोग्राफी प्रणालियों के लिए चुनौती भी बन सकती है, जिनका उपयोग बैंकिंग और डिजिटल भुगतान सुरक्षा में किया जाता है।
समिति की संरचना और प्रमुख सदस्य
Q-SAFE के संयोजक आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर Anil Prabhakar हैं। आरबीआई के फिनटेक विभाग के मुख्य महाप्रबंधक Suvendu Pati समिति के सदस्य-सचिव बनाए गए हैं। समिति में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के Sunil Kumar, State Bank of India के सतीश राव नागेश, National Payments Corporation of India के दिलीप अस्बे, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के मनोज कुमार जैन, डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के विनायक गोडसे और आईबीएम क्वांटम इंडिया के पूर्व प्रमुख एल वेंकट सुब्रमण्यम भी शामिल हैं।
समिति का कार्यक्षेत्र
समिति वित्तीय क्षेत्र की क्रिप्टोग्राफिक संपत्तियों का अध्ययन “क्रिप्टोग्राफी बिल ऑफ मटेरियल्स” यानी सीबीओएम के माध्यम से करेगी। सीबीओएम किसी प्रणाली में उपयोग हो रही क्रिप्टोग्राफिक संपत्तियों की संरचित सूची होती है। इसके अलावा समिति “क्रिप्टो एजिलिटी” का भी मूल्यांकन करेगी। क्रिप्टो एजिलिटी का अर्थ है किसी डिजिटल प्रणाली में बिना बड़े बदलाव के क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिद्म को बदलने या अपडेट करने की क्षमता। समिति यह भी पहचान करेगी कि कौन-सी महत्वपूर्ण प्रणालियां क्वांटम खतरों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं और उद्योग किस हद तक क्वांटम-सुरक्षित क्रिप्टोग्राफी के लिए तैयार है। साथ ही बाजार में उपलब्ध तकनीकी समाधानों और उपकरणों की क्षमता और परिपक्वता का भी अध्ययन किया जाएगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- Reserve Bank of India की स्थापना 1935 में हुई थी।
- क्वांटम कंप्यूटिंग “क्यूबिट” पर आधारित होती है, जो एक समय में कई अवस्थाओं का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।
- सीबीओएम का अर्थ “क्रिप्टोग्राफी बिल ऑफ मटेरियल्स” है।
- क्रिप्टो एजिलिटी का संबंध क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिद्म को बदलने की क्षमता से है।
- National Payments Corporation of India यूपीआई और रुपे जैसी भुगतान प्रणालियों का संचालन करती है।
- Q-SAFE अपनी पहली बैठक से छह महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
क्वांटम तकनीक भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। ऐसे में आरबीआई की यह पहल भारत की बैंकिंग और भुगतान प्रणाली को भविष्य के साइबर खतरों से सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।