आयुर्वेद मानकों को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने की पहल

आयुर्वेद मानकों को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने की पहल

आयुर्वेदिक उत्पादों की गुणवत्ता, परीक्षण और प्रमाणन को अधिक वैज्ञानिक और मानकीकृत बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने नई दिल्ली में 7 अगस्त 2026 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह साझेदारी आयुष क्षेत्र के लिए गुणवत्ता मानकों, अनुरूपता आकलन और वैज्ञानिक अनुसंधान को एक साझा ढांचे में आगे बढ़ाएगी।

समझौते का फोकस क्या है

यह समझौता आयुर्वेद सहित आयुष की सभी प्रमुख प्रणालियों—योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी—से जुड़े मानकों को मजबूत करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य ऐसे गुणवत्ता मानक विकसित करना है जो न केवल देश में उपयोगी हों, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्वीकार्य हों।

समझौते के तहत सुरक्षित उत्पादों, वैज्ञानिक सत्यापन और परीक्षण-प्रमाणन की उन प्रक्रियाओं पर भी काम होगा, जिन्हें वैश्विक मानकों के अनुरूप माना जाता है। इससे आयुर्वेदिक उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

CCRAS और BIS की भूमिका

CCRAS आयुर्वेदिक विज्ञान के क्षेत्र में मंत्रालय आयुष के अधीन शीर्ष अनुसंधान संगठन है। यह आयुर्वेद से जुड़े शोध, प्रमाण-आधारित अध्ययन और वैज्ञानिक मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दूसरी ओर, BIS देश का राष्ट्रीय मानक निकाय है, जो उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अधीन काम करता है और उत्पादों, प्रक्रियाओं तथा सेवाओं के लिए भारतीय मानक तय करता है।

दोनों संस्थानों की यह साझेदारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आयुर्वेदिक क्षेत्र में मानकीकरण और वैज्ञानिक परीक्षण की मांग लगातार बढ़ रही है। इससे उद्योग, शोध संस्थानों और नियामक व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल बन सकता है।

प्रयोगशालाओं और अनुरूपता आकलन को मिलेगा बल

इस समझौते का एक अहम पहलू अनुरूपता आकलन है, जिसमें परीक्षण, निरीक्षण, प्रमाणन और संबंधित प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। इन प्रक्रियाओं के जरिए यह जांचा जाता है कि कोई उत्पाद या सेवा तय मानकों के अनुरूप है या नहीं।

सहयोग के तहत CCRAS की संस्थाओं और प्रयोगशालाओं की गुणवत्ता को और मजबूत किया जाएगा। इनमें से कई प्रयोगशालाएं NABL और ISO मान्यता प्राप्त हैं, जो परीक्षण की विश्वसनीयता और स्वीकार्यता को बढ़ाती हैं। इससे आयुर्वेदिक उत्पादों के लिए अधिक भरोसेमंद वैज्ञानिक आधार तैयार होने की संभावना है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • BIS की आयुर्वेद सेक्शनल कमेटी पारंपरिक चिकित्सा क्षेत्र के लिए 128 भारतीय मानकों का प्रबंधन करती है।
  • CCRAS आयुर्वेदिक विज्ञान में अनुसंधान का शीर्ष निकाय है और यह मंत्रालय आयुष के अधीन कार्य करता है।
  • BIS भारत का राष्ट्रीय मानक निकाय है और विभिन्न क्षेत्रों के लिए भारतीय मानक जारी करता है।
  • समझौते पर प्रो. (वैद्य) राबिनारायण आचार्य और श्री संजय पंत ने हस्ताक्षर किए।

अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण से जुड़ी कड़ी

यह पहल भारत की उस व्यापक कोशिश से भी जुड़ी है, जिसके तहत साक्ष्य-आधारित पारंपरिक चिकित्सा को अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण मंचों पर अधिक मजबूत उपस्थिति दिलाई जा रही है। आयुर्वेद भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा का प्रमुख हिस्सा है और इसके ग्रंथीय तथा वैज्ञानिक दोनों आयाम लंबे समय से चर्चा में रहे हैं।

ऐसे में CCRAS और BIS का यह समझौता आयुर्वेद को अधिक प्रमाणिक, सुरक्षित और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और वैज्ञानिक कदम माना जा रहा है।

Originally written on August 8, 2026 and last modified on August 8, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *