भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में 800 kN इंजन से नई छलांग
बेंगलुरु की एयरोस्पेस स्टार्टअप Astrobase Space Technologies ने EVEREST नाम का ऐसा रॉकेट इंजन पेश किया है, जिसे भारत का पहला निजी तौर पर विकसित 80-टन श्रेणी का फुल-फ्लो स्टेज्ड कंबशन इंजन माना जा रहा है। यह इंजन तरल ऑक्सीजन और तरल मीथेन पर आधारित है, 800 किलोन्यूटन थ्रस्ट पैदा करता है और पुन: उपयोग योग्य मध्यम-क्षमता वाले प्रक्षेपण यानों के लिए तैयार किया गया है।
EVEREST क्यों खास है
EVEREST को भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि यह उन उन्नत इंजन प्रणालियों में शामिल है जो आमतौर पर उच्च प्रदर्शन, बेहतर दक्षता और कम तापीय दबाव के लिए जानी जाती हैं। फुल-फ्लो स्टेज्ड कंबशन यानी FFSC तकनीक में दोनों प्रोपेलेंट मुख्य दहन कक्ष में जाने से पहले प्रीबर्नर से गुजरते हैं। यह व्यवस्था जटिल जरूर होती है, लेकिन इससे इंजन की कार्यक्षमता और नियंत्रण क्षमता बेहतर मानी जाती है।
कंपनी के अनुसार, EVEREST का विशिष्ट आवेग लगभग 340 सेकंड है और इसमें 50% से 110% तक थ्रॉटलिंग की क्षमता है। यही विशेषता इसे पुन: उपयोग योग्य लॉन्च सिस्टम के लिए उपयोगी बनाती है, क्योंकि ऐसे वाहनों में उड़ान के दौरान, लैंडिंग और रिकवरी के समय थ्रस्ट को नियंत्रित करना जरूरी होता है।
विकास और परीक्षण की प्रगति
Astrobase को 10 जून 2026 को IN-SPACe के Technology Adoption Fund के तहत इस 800 kN LOX-मीथेन इंजन के स्वदेशी विकास के लिए चुना गया था। इससे पहले कंपनी ने सितंबर 2025 में सब-स्केल हॉट-फायर टेस्ट पूरे किए थे और जनवरी 2026 में टर्बोपंप ट्रायल भी किए थे। पूर्ण-स्तरीय हॉट-फायर परीक्षण 2026 के बाद के हिस्से में निर्धारित थे।
कंपनी की स्थापना 2024 में पूर्व ISRO प्रोपल्शन इंजीनियर देवकुमार थम्मिसेट्टी और CoinDCX के सह-संस्थापक नीरज खंडेलवाल ने की थी। बेंगलुरु में इसका 46,000 वर्ग फुट का संयंत्र है, जहां मुख्य घटकों के लिए भारत का सबसे बड़ा औद्योगिक मेटल 3D प्रिंटर इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में 21.5 एकड़ में फैली प्रोपल्शन टेस्ट सुविधा भी विकसित की गई है।
निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए संकेत
भारत में निजी अंतरिक्ष कंपनियां अब केवल उपग्रह या छोटे उपकरणों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लॉन्च वाहन, प्रोपल्शन सिस्टम और ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे जटिल क्षेत्रों में भी प्रवेश कर रही हैं। IN-SPACe इस क्षेत्र में नियामक और प्रोत्साहन देने वाली संस्था के रूप में काम करता है। EVEREST जैसे इंजन यह दिखाते हैं कि निजी उद्योग अब उच्च-प्रदर्शन रॉकेट तकनीक में भी अपनी क्षमता बढ़ा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- LOX का अर्थ liquid oxygen यानी तरल ऑक्सीजन होता है, जो कई रॉकेट इंजनों में ऑक्सीडाइज़र के रूप में इस्तेमाल होती है।
- तरल मीथेन आधुनिक रॉकेट डिजाइनों में अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है।
- थ्रस्ट की इकाई न्यूटन होती है; 800 किलोन्यूटन का अर्थ 8,00,000 न्यूटन होता है।
- Specific impulse रॉकेट इंजन की दक्षता मापने का मानक है और इसे सेकंड में व्यक्त किया जाता है।
EVEREST का अनावरण भारत के निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में बढ़ती तकनीकी परिपक्वता का संकेत है। उन्नत इंजन, स्वदेशी परीक्षण क्षमता और पुन: उपयोग योग्य लॉन्च सिस्टम की दिशा में यह कदम आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।