FAIR परियोजना के लिए भारत का बीम कैचर, वैज्ञानिक क्षमता की बड़ी उपलब्धि

FAIR परियोजना के लिए भारत का बीम कैचर, वैज्ञानिक क्षमता की बड़ी उपलब्धि

भारत ने जर्मनी के डार्मस्टाट में बन रहे अंतरराष्ट्रीय कण भौतिकी प्रोजेक्ट FAIR के लिए बीम कैचर विकसित किया है। यह उपकरण सुपर-एफआरएस (Super Fragment Separator) का अहम हिस्सा है और इसकी पहली स्वदेशी इकाई 7 अगस्त 2026 को स्थापना के लिए FAIR स्थल पर पहुंची। यह उपलब्धि भारत की उच्च-स्तरीय वैज्ञानिक निर्माण क्षमता और वैश्विक अनुसंधान सहयोग में उसकी भूमिका को मजबूत करती है।

FAIR परियोजना क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है

FAIR का पूरा नाम Facility for Antiproton and Ion Research है। यह एक अंतरराष्ट्रीय एक्सीलरेटर-आधारित अनुसंधान सुविधा है, जहां अत्यधिक ऊर्जा वाले आयन बीमों की मदद से पदार्थ की चरम परिस्थितियों में प्रकृति का अध्ययन किया जाता है। इस तरह के प्रयोग नाभिकीय और कण भौतिकी के कई जटिल सवालों को समझने में मदद करते हैं।

भारत 4 अक्टूबर 2010 को वीसबाडेन, जर्मनी में अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन पर हस्ताक्षर करके FAIR का संस्थापक सदस्य बना था। FAIR GmbH से जुड़े ढांचे में भारत एकमात्र गैर-यूरोपीय शेयरधारक है, जो इस परियोजना में उसकी विशेष भागीदारी को दर्शाता है।

बीम कैचर की तकनीकी भूमिका

बीम कैचर सुपर-एफआरएस का एक महत्वपूर्ण घटक है। इसका काम प्राथमिक भारी-आयन बीम के बचे हुए हिस्से को अवशोषित करना है, ताकि आगे रेडियोधर्मी बीम तैयार किए जा सकें। ये बीम नाभिकीय अनुसंधान में उपयोगी होते हैं और पदार्थ के व्यवहार को समझने में मदद करते हैं।

यह प्रणाली लगभग 40 टन वजनी है और इसमें शील्डिंग प्लेट्स के साथ ग्रेफाइट तथा अत्यंत शुद्ध तांबे के अवशोषक लगाए गए हैं। यह वैक्यूम चैंबर में काम करती है, जिसका दबाव लगभग 10-7 mbar तक रखा जाता है। इसे 0.4 से 1.5 GeV प्रति न्यूक्लियॉन ऊर्जा सीमा वाले बीम को संभालने के लिए बनाया गया है।

भारत में डिजाइन, निर्माण और संस्थागत सहयोग

बीम कैचर का डिजाइन CSIR-Central Mechanical Engineering Research Institute (CSIR-CMERI), दुर्गापुर ने तैयार किया। पहली इकाई का निर्माण कानपुर स्थित Trident Auto Components की उत्पादन सुविधा में किया गया और 27 मार्च 2026 को वहां से भेजा गया।

भारत की ओर से इस परियोजना में बोस इंस्टीट्यूट, कोलकाता प्रमुख समन्वयक, नोडल भारतीय संस्थान और FAIR GmbH में नामित शेयरधारक के रूप में कार्य कर रहा है। यह संस्थान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त अनुसंधान एवं विकास संस्था है। भारत का योगदान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा समान रूप से, 50:50 हिस्सेदारी के आधार पर वित्तपोषित किया जाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • FAIR का पूरा नाम Facility for Antiproton and Ion Research है।
  • यह परियोजना डार्मस्टाट, जर्मनी में विकसित की जा रही है।
  • Super-FRS का अर्थ Super Fragment Separator है।
  • भारत FAIR GmbH में एकमात्र गैर-यूरोपीय शेयरधारक है।

यह उपलब्धि दिखाती है कि भारत अब केवल वैज्ञानिक सहयोगी नहीं, बल्कि अत्याधुनिक शोध उपकरणों के डिजाइन और निर्माण में भी महत्वपूर्ण भागीदार बन रहा है।

Originally written on August 8, 2026 and last modified on August 8, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *