आईबीएम-एमईआईटीवाई साझेदारी से डीप-टेक स्टार्टअप को मिलेगा नया सहारा
आईबीएम और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) की पहल एमईआईटीवाई स्टार्टअप हब ने 13 अक्टूबर 2026 को मुंबई में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। आईबीएम थिंक 2026 सम्मेलन में घोषित इस साझेदारी का उद्देश्य भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप को उन्नत तकनीक, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और नवाचार मंचों तक बेहतर पहुंच देना है।
स्टार्टअप को तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन
समझौते के तहत एमईआईटीवाई स्टार्टअप हब और आईबीएम चुने हुए संभावनाशील स्टार्टअप को उद्यम-स्तरीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हाइब्रिड क्लाउड और क्वांटम कंप्यूटिंग से जुड़ी विशेषज्ञता से जोड़ेंगे। आईबीएम अपने वॉटसनएक्स मंच, आईबीएम बॉब, आईबीएम सॉवरेन कोर तथा सुरक्षा और स्वचालन समाधानों पर तकनीकी मार्गदर्शन देगा।
वॉटसनएक्स उद्यमों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा मंच है, जिसका उपयोग एआई मॉडल बनाने, प्रशिक्षित करने, लागू करने और उनके संचालन पर निगरानी रखने में किया जा सकता है। आईबीएम बॉब एक एआई-आधारित कोडिंग एजेंट है, जो सॉफ्टवेयर विकास की विभिन्न प्रक्रियाओं को स्वचालित करता है। साझेदारियां अलग-अलग विकास चरणों वाले स्टार्टअप की जरूरतों के अनुरूप सहयोग के विकल्प तलाशेंगी।
प्रस्तावित सहयोग में उद्यमों के साथ प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट परियोजनाएं, संप्रभु एआई नवाचार, मुक्त-स्रोत तकनीकी तंत्र का विकास, संस्थापकों का मार्गदर्शन और तकनीकी कौशल प्रशिक्षण शामिल हैं। बैंकिंग, वित्त, सरकार और उद्योग जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप के समाधान उपयोगी हो सकते हैं।
भारत-केंद्रित एआई और तकनीकी नियंत्रण
आईबीएम सॉवरेन कोर ऐसा एआई-सक्षम सॉफ्टवेयर ढांचा है, जिसके माध्यम से संगठन अपने नियंत्रण में सुरक्षित डिजिटल वातावरण और एआई कार्यभार संचालित कर सकते हैं। सम्मेलन में आईबीएम ने भारत के लिए अनुकूलित एआई ढांचे ‘भारत कोर’ की भी घोषणा की। यह सॉवरेन कोर के ऊपर काम करेगा और एआई के विभिन्न चरणों के लिए उपयुक्त तकनीकी घटक तथा बुनियादी ढांचा चुनने में उपयोगकर्ताओं का मार्गदर्शन करेगा।
आईबीएम इंडिया और दक्षिण एशिया के प्रबंध निदेशक संदीप पटेल ने इस संदर्भ में ‘डिजिटल स्वराज’ की बात कही। इसका आशय केवल डेटा को देश के भीतर रखना नहीं, बल्कि डेटा, तकनीकी संसाधनों और एआई प्रणालियों के संचालन पर नियंत्रण बनाए रखना है। यह विचार उन संगठनों के लिए अहम है जिन्हें सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल व्यवस्था की जरूरत है।
छोटे शहरों के नवाचारकर्ताओं तक पहुंच
साझेदारी का एक उद्देश्य दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों में मौजूद नवाचारकर्ताओं की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाना भी है। स्टार्टअप को अपने समाधान उद्यमों और निवेशकों के सामने रखने के अवसर मिल सकते हैं। डीप-टेक कंपनियां आमतौर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग या उन्नत इंजीनियरिंग जैसी क्षमताओं पर आधारित उत्पाद विकसित करती हैं। ऐसे उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में तकनीकी मार्गदर्शन और संभावित ग्राहकों से जुड़ाव सहायक हो सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय केंद्र सरकार में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े विषयों के लिए जिम्मेदार है।
- एमईआईटीवाई स्टार्टअप हब, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की पहल है।
- हाइब्रिड क्लाउड में निजी कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक क्लाउड सेवाओं का संयोजन होता है।
- क्वांटम कंप्यूटिंग सूचना के प्रसंस्करण के लिए क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों का उपयोग करती है।
यह पहल भारतीय डीप-टेक कंपनियों को उन्नत तकनीक और उद्यमों से जोड़ने के साथ-साथ देश में एआई विकास पर नियंत्रण को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है।