आईएसआई को नया वैधानिक ढांचा देने की तैयारी
लोकसभा में भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026 पेश किया गया है, जिसका उद्देश्य भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959 को निरस्त कर उसकी जगह नया कानून लाना है। इस प्रस्ताव के तहत कोलकाता स्थित भारतीय सांख्यिकी संस्थान को एक वैधानिक निकाय निगम के रूप में स्थापित करने की बात कही गई है, ताकि उसके प्रशासन, शासन और शैक्षणिक कामकाज के लिए स्पष्ट कानूनी ढांचा बनाया जा सके।
संस्थान की मौजूदा स्थिति और प्रस्तावित बदलाव
अभी भारतीय सांख्यिकी संस्थान पश्चिम बंगाल सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1961 के तहत पंजीकृत सोसाइटी के रूप में काम करता है। नया विधेयक इसे अधिक औपचारिक वैधानिक दर्जा देने की दिशा में कदम है। इससे संस्थान की संपत्ति, प्रशासनिक निर्णयों और शैक्षणिक संरचना को कानून के दायरे में अधिक स्पष्टता मिलने की संभावना है।भारतीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना 1931 में कोलकाता में हुई थी और यह भारत के सबसे पुराने सांख्यिकी तथा गणितीय संस्थानों में गिना जाता है। लंबे समय से यह संस्थान शोध, डेटा विश्लेषण और उच्च स्तरीय सांख्यिकीय अध्ययन के लिए जाना जाता रहा है।
‘स्टैटिस्टिकल साइंसेज’ की परिभाषा का विस्तार
विधेयक में संस्थान के लिए ‘सांख्यिकी विज्ञान’ की परिभाषा को व्यापक किया गया है। इसमें सैद्धांतिक सांख्यिकी, अनुप्रयुक्त सांख्यिकी, गणित, अर्थशास्त्र, डेटा साइंस, कंप्यूटर साइंस, क्रिप्टोलॉजी और अन्य मात्रात्मक विज्ञान शामिल किए गए हैं। यह विस्तार दिखाता है कि आधुनिक शोध और विश्लेषण में सांख्यिकी अब केवल पारंपरिक गणना तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक, अर्थव्यवस्था और डिजिटल सुरक्षा जैसे क्षेत्रों से भी गहराई से जुड़ चुकी है।
शासन व्यवस्था में नई संरचना
नए विधेयक के अनुसार भारत के राष्ट्रपति संस्थान के विजिटर होंगे। विजिटर को संस्थान के कामकाज की समीक्षा करने, जांच कराने और बाध्यकारी निर्देश जारी करने का अधिकार होगा। इसके साथ ही एक बोर्ड ऑफ गवर्नर्स बनाया जाएगा, जो संस्थान की मुख्य नीति-निर्माण कार्यकारी इकाई होगी। बोर्ड के अध्यक्ष की नियुक्ति विजिटर द्वारा नामित की जाएगी।यह नया ढांचा पहले की 33-सदस्यीय काउंसिल व्यवस्था की जगह लेगा। समर्थकों के अनुसार इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हो सकती है, जबकि आलोचकों को आशंका है कि इससे संस्थान की स्वायत्तता पर असर पड़ सकता है। कोलकाता परिसर के फैकल्टी, छात्रों और कर्मचारियों ने निर्णय-निर्माण के केंद्रीकरण को लेकर आपत्ति जताई है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना 1931 में कोलकाता में हुई थी।
- वर्तमान में यह पश्चिम बंगाल सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1961 के तहत पंजीकृत सोसाइटी है।
- विधेयक में राष्ट्रपति को संस्थान का विजिटर बनाने का प्रावधान है।
- ‘वैधानिक निकाय निगम’ का अर्थ है ऐसा निकाय जिसे कानून के तहत कानूनी व्यक्तित्व प्राप्त हो।
यह विधेयक भारतीय उच्च शिक्षा और शोध संस्थानों के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव की बहस को भी आगे बढ़ाता है। अब निगाहें इस पर रहेंगी कि संसद में इसके प्रावधानों पर किस तरह की चर्चा होती है और संस्थान की स्वायत्तता बनाम प्रशासनिक नियंत्रण के संतुलन पर क्या रुख सामने आता है।