आईआईटी बॉम्बे के प्रो. कार्तिकेयन लंका को NASI युवा वैज्ञानिक सम्मान

आईआईटी बॉम्बे के प्रो. कार्तिकेयन लंका को NASI युवा वैज्ञानिक सम्मान

आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर कार्तिकेयन लंका को नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया (NASI) के यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड 2026 के लिए चुना गया है। यह सम्मान उन युवा वैज्ञानिकों को दिया जाता है, जिनका शोध अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिखाता है। पुरस्कार वितरण 4–5 दिसंबर 2026 को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में NASI के 96वें वार्षिक सत्र और संगोष्ठी के दौरान होगा।

कौन हैं प्रोफेसर कार्तिकेयन लंका

प्रो. लंका आईआईटी बॉम्बे के सेंटर ऑफ स्टडीज इन रिसोर्सेज इंजीनियरिंग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। इसके साथ ही वे इंटरडिसिप्लिनरी प्रोग्राम इन क्लाइमेट स्टडीज में भी एसोसिएट फैकल्टी सदस्य हैं। उनका शोध मुख्य रूप से रिमोट सेंसिंग, स्थलीय प्रक्रियाओं, भूमि-वायुमंडल अंतःक्रिया और कृषि सूखे जैसे विषयों पर केंद्रित है।रिमोट सेंसिंग में उपग्रह और हवाई डेटा की मदद से पृथ्वी की सतह का अध्ययन किया जाता है। यही तकनीक भूगोल, कृषि, जल संसाधन और जलवायु अध्ययन में बेहद उपयोगी मानी जाती है।

NASI युवा वैज्ञानिक पुरस्कार का महत्व

नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया देश की सबसे पुरानी विज्ञान अकादमियों में से एक है। इसकी स्थापना 1930 में हुई थी और इसका मुख्यालय प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में है। अकादमी वैज्ञानिकों के लिए वार्षिक सत्र, संगोष्ठियां और सम्मान कार्यक्रम आयोजित करती है।NASI यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड को शुरुआती करियर वाले वैज्ञानिकों के लिए एक महत्वपूर्ण पहचान माना जाता है। यह पुरस्कार न केवल शोध की गुणवत्ता को रेखांकित करता है, बल्कि विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में नई पीढ़ी के योगदान को भी सामने लाता है। 2026 की सूची में प्रो. कार्तिकेयन लंका के अलावा प्रोफेसर अंकित अग्रवाल, डॉ. अशुतोष के. सिंह और डॉ. अकांक्षा सिंह जैसे नाम भी शामिल हैं।

क्यों अहम है यह चयन

जलवायु परिवर्तन, कृषि जोखिम और पर्यावरणीय बदलावों के दौर में रिमोट सेंसिंग और भूमि-वायुमंडल अध्ययन जैसे विषयों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में प्रो. लंका का चयन इस बात का संकेत है कि भारत में पृथ्वी विज्ञान और जलवायु अध्ययन से जुड़े शोध को भी राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल रही है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया की स्थापना 1930 में हुई थी।
  • NASI का मुख्यालय प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में स्थित है।
  • NASI का 96वां वार्षिक सत्र और संगोष्ठी 4–5 दिसंबर 2026 को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में होगी।
  • रिमोट सेंसिंग का उपयोग भूगोल, कृषि, जलविज्ञान और जलवायु अध्ययन में व्यापक रूप से किया जाता है।

प्रो. कार्तिकेयन लंका का चयन आईआईटी बॉम्बे और भारतीय वैज्ञानिक समुदाय दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सम्मान युवा शोधकर्ताओं के लिए भी प्रेरणा का काम करेगा।

Originally written on August 6, 2026 and last modified on August 6, 2026.

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