आंध्र प्रदेश में बनेगा भारत का पहला स्वायत्त समुद्री शिपबिल्डिंग केंद्र
सागर डिफेंस इंजीनियरिंग ने 12 मार्च 2026 को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले स्थित जुव्वलादिन्ने फिशिंग हार्बर में भारत के पहले ऑटोनॉमस मैरीटाइम शिपबिल्डिंग एंड सिस्टम्स सेंटर का शिलान्यास किया। यह परियोजना देश में स्वायत्त समुद्री तकनीकों और आधुनिक जहाज निर्माण क्षमता को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। यह केंद्र समुद्री जहाजों के निर्माण, परीक्षण और तैनाती के लिए विकसित किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य मानव रहित और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समुद्री प्रणालियों के निर्माण में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है।
परियोजना का स्थान और भूमि आवंटन
आंध्र प्रदेश सरकार ने इस परियोजना के लिए जुव्वलादिन्ने क्षेत्र में 29.58 एकड़ भूमि आवंटित की है। यह फिशिंग हार्बर बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित है, जिससे समुद्री परीक्षण और संचालन के लिए सीधा जलमार्ग उपलब्ध होगा। नेल्लोर जिला पहले से ही समुद्री गतिविधियों और मत्स्य उद्योग के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है।
विकसित की जाने वाली आधुनिक तकनीकें
इस केंद्र में मानव रहित सतही पोत, स्वायत्त अंडरवाटर वाहन, स्मार्ट नेविगेशन सिस्टम और एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा परियोजना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिपयार्ड प्रबंधन, डिजिटल ट्विन तकनीक, रोबोटिक फैब्रिकेशन और 3डी प्रिंटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। डिजिटल ट्विन तकनीक के माध्यम से वास्तविक जहाजों और प्रणालियों के वर्चुअल मॉडल तैयार किए जाएंगे, जिससे निगरानी, परीक्षण और सिमुलेशन आसान होगा।
रक्षा और नागरिक क्षेत्रों में उपयोग
स्वायत्त समुद्री प्लेटफॉर्म ऐसे सिस्टम होते हैं जो बिना चालक दल या न्यूनतम मानव हस्तक्षेप के समुद्र में कार्य कर सकते हैं। इनका उपयोग समुद्री निगरानी, लॉजिस्टिक्स, अनुसंधान और रक्षा अभियानों में किया जाता है। यह परियोजना केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्मार्ट फिशिंग नेटवर्क, समुद्री अनुसंधान और अपतटीय ऊर्जा परियोजनाओं में भी उपयोगी होगी। इससे भारत की समुद्री तकनीकी क्षमता को नया विस्तार मिलने की उम्मीद है।
रोजगार और नेतृत्व
इस परियोजना से लगभग 750 रोजगार अवसर उत्पन्न होने की संभावना है, जिनमें करीब 300 प्रत्यक्ष और 450 अप्रत्यक्ष नौकरियां शामिल होंगी। सागर डिफेंस इंजीनियरिंग के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैप्टन निकुंज पराशर इस परियोजना का नेतृत्व कर रहे हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- मानव रहित सतही पोत समुद्र की सतह पर बिना चालक दल के संचालित होते हैं।
- ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल समुद्र के भीतर अनुसंधान और मैपिंग कार्यों में उपयोग किए जाते हैं।
- डिजिटल ट्विन तकनीक किसी वास्तविक प्रणाली का वर्चुअल मॉडल तैयार करती है।
- आंध्र प्रदेश की लंबी तटरेखा बंगाल की खाड़ी के साथ स्थित है और यहां कई प्रमुख फिशिंग हार्बर मौजूद हैं।
भारत का यह पहला स्वायत्त समुद्री शिपबिल्डिंग केंद्र देश की रक्षा, समुद्री अनुसंधान और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह परियोजना भारत को आधुनिक समुद्री तकनीकों के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान दिला सकती है।