लद्दाख में ‘शान संरक्षण सोसाइटी’ का गठन, हिम तेंदुए और उच्च हिमालयी जैव विविधता संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

लद्दाख में ‘शान संरक्षण सोसाइटी’ का गठन, हिम तेंदुए और उच्च हिमालयी जैव विविधता संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

16 जून 2026 को लद्दाख के उपराज्यपाल ने स्नो लेपर्ड एंड हाई-एल्टीट्यूड नेचर (SHAN) कंजर्वेशन सोसाइटी के गठन को मंजूरी प्रदान की। यह संस्था लद्दाख के पर्वतीय और शीत मरुस्थलीय पारिस्थितिक तंत्रों में वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता के वैज्ञानिक प्रबंधन और समुदाय-आधारित पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए स्थापित की गई है। यह लद्दाख में प्राकृतिक संसाधनों और दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण हेतु एक समर्पित संस्थागत तंत्र के रूप में कार्य करेगी।

हिम तेंदुआ और भारत में उसका महत्व

हिम तेंदुआ (Snow Leopard) एक दुर्लभ बड़ी बिल्ली प्रजाति है, जो हिमालय और ट्रांस-हिमालयी क्षेत्रों के ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में पाई जाती है। यह प्रजाति अत्यधिक ठंडे वातावरण, कम ऑक्सीजन और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए विशेष रूप से अनुकूलित होती है। भारत में वर्ष 2024 की स्नो लेपर्ड जनसंख्या आकलन रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल 718 हिम तेंदुए पाए गए, जिनमें से 477 केवल लद्दाख में दर्ज किए गए। इससे स्पष्ट होता है कि लद्दाख इस प्रजाति के संरक्षण के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है।

शान संरक्षण सोसाइटी का उद्देश्य

शान संरक्षण सोसाइटी का मुख्य उद्देश्य लद्दाख की संवेदनशील जैव विविधता और प्राकृतिक आवासों का संरक्षण करना है। संस्था निम्नलिखित क्षेत्रों में कार्य करेगी—

  • हिम तेंदुए सहित उच्च हिमालयी वन्यजीवों का संरक्षण
  • अल्पाइन वनस्पतियों और जीवों की सुरक्षा
  • उच्च ऊंचाई वाले आर्द्रभूमि (Wetlands) का संरक्षण
  • शीत मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा
  • वैज्ञानिक अनुसंधान और निगरानी
  • वन्यजीव आवासों का संरक्षण
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष का समाधान
  • पर्यावरण-अनुकूल आजीविका और इको-डेवलपमेंट को बढ़ावा

संस्थागत संरचना

शान संरक्षण सोसाइटी की अध्यक्षता लद्दाख के उपराज्यपाल करेंगे। इसके पदेन (Ex-officio) सदस्यों में शामिल हैं—

  • लद्दाख के मुख्य सचिव
  • लद्दाख के सांसद
  • लेह और कारगिल के लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषदों (LAHDC) के मुख्य कार्यकारी पार्षद

इसके अतिरिक्त कई गैर-सरकारी और विशेषज्ञ सदस्य भी संस्था से जुड़े हैं, जिनमें प्रमुख हैं—

  • पालगा रिनपोछे
  • डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया की सेजल वोहरा
  • नेशनल जियोग्राफिक सोसाइटी के संदीश कदूर
  • वीमेंस अलायंस ऑफ लद्दाख की अध्यक्ष
  • गुलाम मोहम्मद खान

यह विविध प्रतिनिधित्व संरक्षण प्रयासों को अधिक प्रभावी और समुदाय-केंद्रित बनाने में मदद करेगा।

सामुदायिक संरक्षण की भूमिका

हिमालयी क्षेत्रों में संरक्षण कार्यक्रमों की सफलता में स्थानीय समुदायों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। शान संरक्षण सोसाइटी भी स्थानीय निवासियों, ग्रामीण समुदायों और महिला समूहों को संरक्षण गतिविधियों में शामिल करेगी। इससे वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करने में सहायता मिलेगी।

लद्दाख का शीत मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र

लद्दाख एक उच्च हिमालयी शीत मरुस्थल (Cold Desert) क्षेत्र है। यह क्षेत्र—

  • अत्यंत कम वर्षा
  • विरल वनस्पति
  • अत्यधिक तापमान परिवर्तन
  • ऊंचाई आधारित पारिस्थितिकी

के लिए जाना जाता है। इन परिस्थितियों के बावजूद यहां अनेक दुर्लभ जीव-जंतु और वनस्पति प्रजातियां पाई जाती हैं, जो ट्रांस-हिमालयी पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • SHAN का पूर्ण रूप Snow Leopard and High-Altitude Nature Conservation Society है।
  • लद्दाख में 2024 के आकलन के अनुसार 477 हिम तेंदुए पाए गए।
  • भारत में कुल हिम तेंदुओं की अनुमानित संख्या 718 है।
  • हिम तेंदुआ IUCN रेड लिस्ट में “Vulnerable” श्रेणी में सूचीबद्ध है।
  • लद्दाख एक उच्च हिमालयी शीत मरुस्थलीय क्षेत्र है।
  • समुदाय-आधारित संरक्षण हिमालयी क्षेत्रों में व्यापक रूप से अपनाया जाता है।
  • शान संरक्षण सोसाइटी के अध्यक्ष लद्दाख के उपराज्यपाल होंगे।
  • संस्था जैव विविधता संरक्षण, अनुसंधान और मानव-वन्यजीव संघर्ष समाधान पर कार्य करेगी।

शान संरक्षण सोसाइटी का गठन लद्दाख की अनूठी जैव विविधता और हिम तेंदुए जैसे दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह संस्था वैज्ञानिक अनुसंधान, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और सतत विकास के माध्यम से क्षेत्र के संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Originally written on June 17, 2026 and last modified on June 17, 2026.

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