आरबीआई ने शुरू किया ‘आरबीआई रीलाथॉन 2026’, छात्रों को साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के प्रति करेगा जागरूक
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 16 जून 2026 को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम स्थित अपने कार्यालय में “आरबीआई रीलाथॉन 2026” अभियान की शुरुआत की। यह विशेष जागरूकता कार्यक्रम कॉलेज छात्रों को साइबर वित्तीय धोखाधड़ी, सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग, स्मार्ट उधारी (Smart Borrowing) और ऑनलाइन वित्तीय सुरक्षा के बारे में शिक्षित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
क्या है आरबीआई रीलाथॉन 2026?
आरबीआई रीलाथॉन 2026 एक बहु-चरणीय जागरूकता अभियान है, जिसे केरल के लगभग 150 कॉलेजों के छात्रों के लिए तैयार किया गया है। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को बढ़ते डिजिटल वित्तीय अपराधों के प्रति जागरूक बनाना तथा उन्हें सुरक्षित ऑनलाइन लेनदेन के बारे में जानकारी देना है। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को ध्यान में रखते हुए इस अभियान में छात्रों को रचनात्मक वीडियो सामग्री तैयार करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
अभियान के चरण
अभियान को दो प्रमुख चरणों में विभाजित किया गया है। पहले चरण में कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें निम्न विषयों पर जानकारी दी जाएगी—
- सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग
- स्मार्ट उधारी की आदतें
- साइबर सुरक्षा
- वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव
दूसरे चरण में छात्रों को विभिन्न विषयों पर लघु वीडियो (Reels) तैयार कर प्रस्तुत करने होंगे।
वीडियो प्रतियोगिता के विषय
प्रतियोगिता के लिए जिन प्रमुख विषयों का चयन किया गया है, उनमें शामिल हैं—
- अवैध ऋण ऐप (Illegal Loan Apps)
- म्यूल अकाउंट (Mule Accounts)
- साइबर वित्तीय धोखाधड़ी
- साइबर स्वच्छता (Cyber Hygiene)
- डिजिटल सुरक्षा
इन विषयों पर तैयार किए गए सर्वश्रेष्ठ वीडियो को व्यापक स्तर पर साझा किया जाएगा।
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी क्या है?
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी ऐसे अपराधों को कहा जाता है जिनमें डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल ऐप, इंटरनेट या इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियों का उपयोग करके लोगों को ठगा जाता है। अभियान में जिन प्रमुख धोखाधड़ी तरीकों का उल्लेख किया गया है, उनमें शामिल हैं—
- फर्जी निवेश योजनाएं
- डिजिटल अरेस्ट स्कैम
- अवैध लोन ऐप
- नकली नौकरी के प्रस्ताव
- म्यूल अकाउंट नेटवर्क
ये धोखाधड़ी विशेष रूप से छात्रों और मोबाइल उपयोगकर्ताओं को निशाना बनाती हैं।
‘गोल्डन आवर’ की अवधारणा
अभियान में “गोल्डन आवर” के महत्व पर भी जोर दिया गया है। साइबर अपराध के संदर्भ में गोल्डन आवर वह शुरुआती समय होता है जब धोखाधड़ी की घटना के तुरंत बाद शिकायत दर्ज कराई जाती है। समय पर रिपोर्टिंग से संदिग्ध लेनदेन को रोका जा सकता है और धन की वसूली की संभावना बढ़ जाती है।
साइबर स्वच्छता (Cyber Hygiene)
साइबर स्वच्छता का अर्थ है डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग करना। इसमें शामिल हैं—
- मजबूत पासवर्ड का उपयोग
- संदिग्ध लिंक से बचाव
- मोबाइल ऐप की सत्यता जांचना
- बैंकिंग जानकारी साझा न करना
- दो-स्तरीय प्रमाणीकरण का उपयोग
ये उपाय साइबर धोखाधड़ी से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पुरस्कार और समापन समारोह
अभियान का समापन 2026 में एक भव्य फाइनल कार्यक्रम के साथ होगा। विजेताओं को निम्नलिखित नकद पुरस्कार दिए जाएंगे—
- प्रथम पुरस्कार – ₹75,000
- द्वितीय पुरस्कार – ₹50,000
- तृतीय पुरस्कार – ₹25,000
सर्वश्रेष्ठ जागरूकता वीडियो को आरबीआई, केरल पुलिस, बैंकों और अन्य साझेदार संस्थाओं के आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों पर भी साझा किया जाएगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आरबीआई रीलाथॉन 2026 की शुरुआत 16 जून 2026 को तिरुवनंतपुरम में हुई।
- यह अभियान केरल के लगभग 150 कॉलेजों के छात्रों को लक्षित करता है।
- भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना 1935 में हुई थी।
- म्यूल अकाउंट साइबर अपराध से प्राप्त धन को स्थानांतरित या छिपाने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
- गोल्डन आवर साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग का शुरुआती महत्वपूर्ण समय होता है।
- साइबर स्वच्छता में सुरक्षित पासवर्ड और डिजिटल सतर्कता शामिल है।
- प्रथम पुरस्कार ₹75,000, द्वितीय ₹50,000 और तृतीय ₹25,000 रखा गया है।
- तिरुवनंतपुरम केरल की राजधानी है।
आरबीआई रीलाथॉन 2026 डिजिटल युग में बढ़ते साइबर वित्तीय अपराधों के प्रति युवाओं को जागरूक बनाने की एक महत्वपूर्ण पहल है। यह अभियान छात्रों को न केवल सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करेगा, बल्कि उन्हें साइबर सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने में भी मदद करेगा।