आंध्र प्रदेश की एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति से नेट-ज़ीरो 2047 का लक्ष्य

आंध्र प्रदेश की एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति से नेट-ज़ीरो 2047 का लक्ष्य

आंध्र प्रदेश ने दक्षिण कोरिया के योसू शहर में आयोजित वर्ल्ड क्लाइमेट सिटीज फोरम में अपनी एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति प्रस्तुत कर यह स्पष्ट किया है कि राज्य स्वयं को वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित करना चाहता है। इस अवसर पर तिरुपति शहरी विकास प्राधिकरण (टूडा) के अध्यक्ष सी. दिवाकर रेड्डी ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के उस विज़न को सामने रखा, जिसके तहत वर्ष 2047 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, सभी उपभोक्ताओं को सस्ती और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराना भी इस नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

यह पहल केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षण और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करना है। स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से आर्थिक प्रगति और जलवायु संतुलन—दोनों को साथ लेकर चलने की रणनीति इस नीति की सबसे बड़ी विशेषता है।

नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार पर विशेष ध्यान

आंध्र प्रदेश सरकार सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, पंप्ड स्टोरेज, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, हरित हाइड्रोजन और जैव ईंधन तकनीकों को तेजी से बढ़ावा दे रही है। राज्य की एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई प्रोत्साहन प्रदान करती है।

इस नीति के तहत सिंगल-विंडो क्लीयरेंस व्यवस्था लागू की गई है, जिससे उद्योगों को अनुमति प्रक्रिया में आसानी होगी। साथ ही, विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) की सुविधा भी दी जा रही है, ताकि बड़े पैमाने पर स्वच्छ ऊर्जा उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा मिल सके। इससे राज्य को निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास में भी लाभ मिलने की संभावना है।

2047 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य

नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का अर्थ है जितनी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन हो, उतनी ही मात्रा को अवशोषित या संतुलित भी किया जाए। आंध्र प्रदेश की यह नीति भारत के दीर्घकालिक जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप तैयार की गई है।

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि स्वच्छ ऊर्जा विस्तार को औद्योगिक विकास से जोड़ा जाए, ताकि पर्यावरणीय सुरक्षा के साथ आर्थिक मजबूती भी प्राप्त हो। हरित विनिर्माण, ग्रीन निवेश और टिकाऊ ऊर्जा ढांचे के माध्यम से आंध्र प्रदेश स्वयं को स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करना चाहता है।

जलवायु-सहिष्णु गांवों की योजना

तिरुपति शहरी विकास प्राधिकरण (TUDA) अपने क्षेत्र में जलवायु-सहिष्णु गांव विकसित करने की दिशा में भी कार्य कर रहा है। इसके लिए विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है। कंदुलावरिपल्ली ग्राम पंचायत इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां पहले से ही क्लाइमेट एक्शन प्लान लागू किया जा चुका है।

इन प्रयासों का उद्देश्य जलवायु जोखिमों के प्रति ग्रामीण क्षेत्रों की क्षमता बढ़ाना, टिकाऊ बुनियादी ढांचे का विकास करना और पर्यावरण-अनुकूल ग्रामीण योजना को मजबूत करना है। यह मॉडल भविष्य में अन्य क्षेत्रों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का अर्थ है ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन और उनके अवशोषण के बीच संतुलन स्थापित करना।
  • हरित हाइड्रोजन का उत्पादन नवीकरणीय ऊर्जा और जल के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा बिना जीवाश्म ईंधन के किया जाता है।
  • पंप्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर बड़े पैमाने पर बिजली भंडारण के लिए जल को दो जलाशयों के बीच स्थानांतरित करता है।
  • SEZ का पूरा नाम स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन है, जहां उद्योगों को विशेष नीति समर्थन और कर लाभ दिए जाते हैं।

तिरुपति जैसे तीर्थ शहरों के लिए स्वच्छ ऊर्जा और सतत शहरी योजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां हर वर्ष लगभग 1.8 करोड़ श्रद्धालु आते हैं। इससे परिवहन, बिजली, जल और सार्वजनिक सेवाओं पर भारी दबाव पड़ता है। ऐसे में विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक हो जाता है। आंध्र प्रदेश की यह नीति न केवल राज्य के लिए, बल्कि भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य के लिए भी एक महत्वपूर्ण मॉडल बन सकती है।

Originally written on April 22, 2026 and last modified on April 22, 2026.

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