असम के जागीरोड में बन रहा टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का सेमीकंडक्टर प्लांट
असम के मोरीगांव जिले के जागीरोड में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का विशाल सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग संयंत्र विकसित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 मार्च 2024 को इस ग्रीनफील्ड परियोजना की शुरुआत का वर्चुअल उद्घाटन किया था। लगभग ₹27,000 करोड़ यानी करीब 3.6 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश वाली यह परियोजना भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस संयंत्र का उद्देश्य देश में इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना है।
सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग सुविधा क्या है
सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग सुविधा वह औद्योगिक इकाई होती है जहां चिप्स की पैकेजिंग, असेंबली और गुणवत्ता परीक्षण किया जाता है। इसके बाद इन चिप्स का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल प्रणालियों में किया जाता है। असम में स्थापित हो रही टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की यह इकाई एक ग्रीनफील्ड परियोजना है। इसका अर्थ है कि इसे किसी पुराने संयंत्र के विस्तार के बजाय पूरी तरह नई भूमि पर विकसित किया जा रहा है। यह भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थापित होने वाली सबसे बड़ी तकनीकी परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है।
प्रतिदिन 4.8 करोड़ चिप्स उत्पादन की क्षमता
इस संयंत्र में प्रतिदिन लगभग 4.8 करोड़ सेमीकंडक्टर चिप्स के उत्पादन की योजना बनाई गई है। इन चिप्स का उपयोग ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों में किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार सेमीकंडक्टर आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, वाहन, चिकित्सा उपकरण और रक्षा प्रणालियों तक में इनका व्यापक उपयोग होता है। संयंत्र का पहला चरण वर्ष 2025 के मध्य तक चालू होने की संभावना है।
रोजगार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा
यह परियोजना प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 27,000 से अधिक रोजगार अवसर उत्पन्न करने की क्षमता रखती है। इससे असम और पूर्वोत्तर भारत में औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। जागीरोड, मोरीगांव जिले में स्थित है, जो असम के मध्य क्षेत्र का हिस्सा है। इस परियोजना के माध्यम से सरकार पूर्वोत्तर राज्यों को तकनीकी और औद्योगिक निवेश का नया केंद्र बनाने का प्रयास कर रही है।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन से जुड़ी परियोजना
भारत सरकार ने वर्ष 2021 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन को मंजूरी दी थी, जिसके लिए ₹76,000 करोड़ का वित्तीय प्रावधान किया गया। इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर निर्माण और आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थान दिलाना है। सेमीकंडक्टर उद्योग में असेंबली और टेस्टिंग को डाउनस्ट्रीम चरण माना जाता है, जो अंतिम उत्पाद तैयार होने से पहले अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है।
हालिया प्रशासनिक विवाद
20 मई 2026 को असम सरकार ने संयंत्र के निकट प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप के लिए किए जा रहे सर्वेक्षण को अस्थायी रूप से रोक दिया। तिवा और बोडो जनजातीय संगठनों ने भूमि अधिकार और संभावित विस्थापन को लेकर इस सर्वे का विरोध किया था। इसके बाद सरकार ने स्थिति की समीक्षा करने का निर्णय लिया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सेमीकंडक्टर ऐसे पदार्थ होते हैं जिनकी विद्युत चालकता चालक और कुचालक के बीच होती है।
- असेंबली और टेस्टिंग सेमीकंडक्टर उद्योग की डाउनस्ट्रीम प्रक्रियाएं मानी जाती हैं।
- ग्रीनफील्ड परियोजनाएं पूरी तरह नई भूमि पर विकसित की जाती हैं।
- असम भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण राज्य है।
जागीरोड में विकसित हो रहा यह सेमीकंडक्टर संयंत्र भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को मजबूती मिलेगी बल्कि पूर्वोत्तर भारत में रोजगार और औद्योगिक विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे।